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Showing posts from October, 2026

कुछ सीख👍

“मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता।” लेकिन अगर तुम नहीं भी रहे, तो भी मुझे अपने पैरों पर खड़ा होना सीखना ही होगा!"* *यह संदेश हर पति-पत्नी को एक बार जरूर पढ़ना चाहिए...* पत्नी ने पति से पूछा, "सुनिए, क्या आपसे एक बात पूछ सकती हूँ? बुरा मत मानिएगा, मुझे सच-सच जवाब चाहिए।" पति ने कहा, "क्या फिर से कोई मुश्किल सवाल पूछने वाली हो? चलो, पूछो!" पत्नी बोली, "हमारे बच्चे विदेश में सेटल हो गए हैं। हम यहाँ अकेले रह रहे हैं। भगवान की कृपा से हमें खाने, कपड़े या घर की कोई कमी नहीं है। हमारे पास एक-दूसरे का साथ है और हम शांति से जिंदगी बिता रहे हैं। लेकिन जैसे-जैसे साल बीत रहे हैं, हमारी उम्र बढ़ रही है और ताकत धीरे-धीरे कम हो रही है। हम पहले की तरह बच्चों के साथ स्थायी रूप से नहीं रह सकते। उनकी भी नौकरी, बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जिम्मेदारियाँ हैं। वो हमेशा आकर हमारे साथ नहीं रह सकते। _इसीलिए मैं चिंतित हूँ... अगर कभी मुझे कुछ हो गया, तो आप अकेले कैसे संभालेंगे?_ कभी-कभी ये सोचें _मुझे रात भर जगाए रखती हैं।_" पति कुछ देर चुप रहा और फिर बोला, "मुझे भी यही डर ...

मुस्कुराओ

पहले *भटूरे* को फुलाने के लिये  उसमें *ENO* डालिये फिर *भटूरे* से फूले पेट को  पिचकाने के लिये *ENO* पीजिये  *जीवन के कुछ गूढ़ रहस्य* *आप कभी नहीं समझ पायेंगे* *पांचवीं* तक *स्लेट* की बत्ती को  *जीभ* से चाटकर *कैल्शियम* की  कमी पूरी करना हमारी स्थाई आदत थी *लेकिन* इसमें *पापबोध* भी था कि कहीं  *विद्यामाता* नाराज न हो जायें ...!!! *पढ़ाई* का *तनाव* हमने  *पेन्सिल* का पिछला हिस्सा  चबाकर मिटाया था ...!!!😀 *पुस्तक* के बीच *पौधे की पत्ती*  और *मोरपंख* रखने से हम  *होशियार* हो जाएंगे ... ऐसा हमारा *दृढ विश्वास* था.  *कपड़े* के *थैले* में *किताब-कॉपियां* जमाने का *विन्यास* हमारा  *रचनात्मक कौशल* था ...!!! हर साल जब नई *कक्षा* के *बस्ते बंधते* तब *कॉपी किताबों* पर *जिल्द* चढ़ाना  अपने जीवन का *वार्षिक उत्सव* मानते थे ...!!! *माता - पिता* को हमारी *पढ़ाई* की  कोई *फ़िक्र* नहीं थी, न हमारी *पढ़ाई*  उनकी *जेब* पर *बोझा* थी ...☺️ *सालों साल* बीत जाते पर *माता - पिता* के  *कदम* हमारे *स्कूल* में न पड़ते थे ...!!! एक *द...