स्वर्ग, नरक और हम*🌹💐🌹💐🌹💐
* स्वर्ग, नरक और हम*🌹💐🌹💐🌹💐 मृत्यु के बाद स्वर्ग मिले—इस आशा में मनुष्य जीवन भर कितने जतन करता है। कोई व्रत रखता है, कोई दान-पुण्य करता है, कोई तीर्थों की यात्रा करता है, तो कोई भगवान से मन्नतें माँगता है। मानो स्वर्ग कोई नई हाउसिंग सोसायटी हो और वहाँ एक छोटा-सा फ्लैट पाने के लिए पुण्य अंक जमा करने पड़ते हों। लेकिन कभी एक पल ठहरकर यह भी सोचिए... क्या हो, यदि हम पहले से ही स्वर्ग में रह रहे हों? सुबह उठिए और अपने चारों ओर नज़र दौड़ाइए। एक बटन दबाते ही अंधेरा उजाले में बदल जाता है। दूसरा बटन दबाते ही पंखा चलने लगता है। तीसरा दबाते ही ठंडी हवा कमरा भर देती है। नल खोलते ही पानी बहने लगता है। गैस जलाते ही कुछ ही मिनटों में भोजन तैयार हो जाता है। जेब से मोबाइल निकाला और पूरी दुनिया आपकी हथेली पर आ गई। हज़ारों किलोमीटर दूर बैठा अपना कोई प्रिय व्यक्ति कुछ ही सेकंड में आपके सामने दिखाई देने लगता है। इतनी अद्भुत सुविधाएँ... और हम उन्हें इतना सामान्य मान बैठे हैं, जैसे ये हमारा जन्मसिद्ध अधिकार हों। ज़रा कल्पना कीजिए... यदि दो सौ वर्ष पहले का कोई सम्राट आज आपके घर आ जाए, तो शायद वह लौटकर अपन...