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बुजुर्ग अब बदलने लगे हैं।

[जीवन में बहुत सी बातें समझ से परे होती है.. जैसे पहाड़ कठोर है, इसलिए नदियाँ उनको छोड़ गई, या नदियाँ छोड़ गई इसलिए पहाड़ कठोर है..🙏  बुजुर्ग अब बदलने लगे हैं। अब लोग बुढ़ापा एंजॉय करने लगे हैं। खुल कर जीने और हंसने लगे हैं। खुद को पोते पोतियों में नहीं उलझाते हैं।  अपने जैसे दोस्तों के संग ये वक्त बिताते हैं। कोई लाचारी बेबसी अब नहीं दिखती हैं। इनकी जिंदगी इनकी शर्तो पर गुजरती हैं । कभी ये गाने गाते,कभी ठुमके लगाते हैं। कभी रामपुर कभी ब्लू लेबल भी लगाते हैं। कभी क्रूज पर, कभी विदेश में छुट्टियां मनाते हैं। अपनी कहानी सुनाते,खुल कर मुस्कुराते हैं। इनकी किट्टियां होती हैं,जन्मदिन मनाते हैं । अपनी पेंशन खुद पर ही ये लुटाते हैं । ना ताना मारते ना बहुओं की सुनते हैं। अपने अधूरे सपने इस उम्र में बुनते हैं। फेस बुक यू ट्यूब के ये दीवाने होते हैं। इनके भी किस्से फंसाने होते हैं। इनको भी दोस्तों का इंतजार होता है। पार्क में रोज जमघटे यार होता है। अब के बुजुर्ग समझने लगे हैं। जिंदगी के बचे लम्हें जीने लगे हैं। समझ गए साथ कुछ नहीं जाने वाला  तो खुशनुमा लम्हें  ये सहेजने लगे ह...

गरबा डांस

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# मंदिर में दस मिनट की आरती में 10 लोग नहीं आते लेकिन 4 घंटे का गरबा डांस देखने के लिए पूरा शहर उमड़ आता है।  इससे स्पष्ट है कि #हिंदू जो है वो #श्रध्दा #भक्ति आस्था पर नहीं मनोरंजन में विश्वास करता है! और यही #मनोरंजन एक दिन #हिंदुओं के पतन का कारण बनेगा...   ये जो #बहन बेटियां है ना जो आधे अधूरे कपड़े पहन के अपनी इज्जत का पोस्टमार्टम करवाने गरबा पांडाल में पहुंचती है तो उनसे मेरा यही कहना है कि अगर आपको देवी शब्द का नाम दिया है तो आप उस देवी शब्द की मर्यादा का ध्यान रखो,,  क्योंकि गरबा कोई खेल नहीं एक सांस्कृतिक परंपरा है देवी की आराधना है तो उसे परंपरागत तरीके से निभाओ वरना यह जो तुम रंग बिरंगे कपड़े पहन कर अधनंगा शरीर लेकर मंच पर #डांडिया करती हो न .. तुम्हारी गलतियों के कारण तुम्हें एक दिन काले परदे से पूरा शरीर ढांक कर रहना पड़ेगा..  मेरी बात को ध्यान से समझना.. आपकी वजह से समाज मे।बुराइयों के चलन बढ़ रहा है। आपको बुरा लगे तो भी ठीक ..! आखिर यह नंगा बदन दिखाकर क्या साबित करना चाहती हैं ? 🤔

100 'ना' की ताकत - एक सच्ची सीख*

* 100 'ना' की ताकत - एक सच्ची सीख* कल मेरे बेटे विशाल का फोन आया। वो आजकल यूरोप में है। उसने मुझे एक ऐसा किस्सा सुनाया जिसे सुनकर मैं देर तक सोचता रहा, और लगा कि ये सिर्फ एक किस्सा नहीं, हम सबके लिए एक आईना है। विशाल एम्स्टर्डम में Costco स्टोर गया था। बाहर हल्की ठंड थी, लोग जल्दी-जल्दी अंदर-बाहर आ-जा रहे थे। गेट के पास एक छोटा बच्चा खड़ा था। मुश्किल से पाँच साल का होगा। हाथ में चिप्स के कुछ पैकेट और गले में एक छोटा-सा बोर्ड लटका था। बोर्ड पर टेढ़े-मेढ़े अक्षरों में लिखा था - "स्काउट चैरिटी के लिए, सिर्फ $20 में।" लोग उसके बगल से गुजर रहे थे। किसी को जल्दी थी, कोई फोन पर था, कोई देखकर भी अनदेखा कर रहा था। लेकिन वो बच्चा... वो हार नहीं मान रहा था। वो हर आने-जाने वाले के पास अपनी छोटी-छोटी टांगों से चलकर जाता, ऊपर देखता और बड़ी मासूमियत से पूछता, "क्या आप एक पैकेट खरीदेंगे?" कोई खरीद लेता। कोई मुस्कुराकर कहता, "नहीं बेटा, थैंक यू।" मैंने सोचा, इतना छोटा बच्चा, इतनी बार 'ना' सुनकर रो देगा, उदास हो जाएगा, अपनी टीचर के पीछे छिप जाएगा। लेकिन नहीं...

लाल बहादुर शास्त्री जी🙏🙏🙏

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*🇮🇳 लाल बहादुर शास्त्री जी को उनकी जयंती पर याद करते हुए 🇮🇳* आज, हम लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि देते हैं, एक ऐसे नेता जिन्हें उनकी सादगी, ईमानदारी और देश के प्रति अटूट समर्पण के लिए याद किया जाता है। उनका प्रेरणा देने वाला नारा, *“जय जवान, जय किसान,”* हमारे सैनिकों की ताकत और हमारे किसानों के अमूल्य योगदान का सम्मान करता है। उनका जीवन और मूल्य हमें समर्पण, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ सेवा करने के लिए प्रेरित करते रहें। *🙏🏻लाल बहादुर शास्त्री जयंती पर हार्दिक शुभकामनाएं!*🙏🏻 [शास्त्री जी अमर रहे ,,🇮🇳🚩  देश के पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। जय जवान, जय किसान।  देश रोया…लेकिन असली दर्द तो तब लगा जब उनका बैंक बैलेंस निकला। क्या मिला? O 👉बैंक का कर्ज!  👉 कुछ कपड़े 👉 कुछ पुरानी किताबें 👉 और किराए की पावती जो अपने परिवार के लिए भी कर्ज छोड़ गया था। लाल बहादुर शास्त्री.. उन्होंने अपने लिए पहली कार खरीदनी चाही — एक साधारण Fiat. बैंक में करीब ₹7,000 थे, पर कार की कीमत लगभग ₹12,000। इसलिए...

कुछ सीख👍

“मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता।” लेकिन अगर तुम नहीं भी रहे, तो भी मुझे अपने पैरों पर खड़ा होना सीखना ही होगा!"* *यह संदेश हर पति-पत्नी को एक बार जरूर पढ़ना चाहिए...* पत्नी ने पति से पूछा, "सुनिए, क्या आपसे एक बात पूछ सकती हूँ? बुरा मत मानिएगा, मुझे सच-सच जवाब चाहिए।" पति ने कहा, "क्या फिर से कोई मुश्किल सवाल पूछने वाली हो? चलो, पूछो!" पत्नी बोली, "हमारे बच्चे विदेश में सेटल हो गए हैं। हम यहाँ अकेले रह रहे हैं। भगवान की कृपा से हमें खाने, कपड़े या घर की कोई कमी नहीं है। हमारे पास एक-दूसरे का साथ है और हम शांति से जिंदगी बिता रहे हैं। लेकिन जैसे-जैसे साल बीत रहे हैं, हमारी उम्र बढ़ रही है और ताकत धीरे-धीरे कम हो रही है। हम पहले की तरह बच्चों के साथ स्थायी रूप से नहीं रह सकते। उनकी भी नौकरी, बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जिम्मेदारियाँ हैं। वो हमेशा आकर हमारे साथ नहीं रह सकते। _इसीलिए मैं चिंतित हूँ... अगर कभी मुझे कुछ हो गया, तो आप अकेले कैसे संभालेंगे?_ कभी-कभी ये सोचें _मुझे रात भर जगाए रखती हैं।_" पति कुछ देर चुप रहा और फिर बोला, "मुझे भी यही डर ...

मुस्कुराओ

पहले *भटूरे* को फुलाने के लिये  उसमें *ENO* डालिये फिर *भटूरे* से फूले पेट को  पिचकाने के लिये *ENO* पीजिये  *जीवन के कुछ गूढ़ रहस्य* *आप कभी नहीं समझ पायेंगे* *पांचवीं* तक *स्लेट* की बत्ती को  *जीभ* से चाटकर *कैल्शियम* की  कमी पूरी करना हमारी स्थाई आदत थी *लेकिन* इसमें *पापबोध* भी था कि कहीं  *विद्यामाता* नाराज न हो जायें ...!!! *पढ़ाई* का *तनाव* हमने  *पेन्सिल* का पिछला हिस्सा  चबाकर मिटाया था ...!!!😀 *पुस्तक* के बीच *पौधे की पत्ती*  और *मोरपंख* रखने से हम  *होशियार* हो जाएंगे ... ऐसा हमारा *दृढ विश्वास* था.  *कपड़े* के *थैले* में *किताब-कॉपियां* जमाने का *विन्यास* हमारा  *रचनात्मक कौशल* था ...!!! हर साल जब नई *कक्षा* के *बस्ते बंधते* तब *कॉपी किताबों* पर *जिल्द* चढ़ाना  अपने जीवन का *वार्षिक उत्सव* मानते थे ...!!! *माता - पिता* को हमारी *पढ़ाई* की  कोई *फ़िक्र* नहीं थी, न हमारी *पढ़ाई*  उनकी *जेब* पर *बोझा* थी ...☺️ *सालों साल* बीत जाते पर *माता - पिता* के  *कदम* हमारे *स्कूल* में न पड़ते थे ...!!! एक *द...

गर्व से बोलो मैं हिंदू हूँ 👍👍👍

हिंदू होना महत्वपूर्ण नहीं है, रक्त में हिंदुत्व का रचा-बसा होना महत्वपूर्ण है। राइट विंग होना महत्वपूर्ण नहीं है, राष्ट्रप्रेमी होना महत्वपूर्ण है। व्यक्तिपूजक होना महत्वपूर्ण नहीं है, विचारधारा के प्रति निष्ठावान होना महत्वपूर्ण है। आम आदमी होना महत्वपूर्ण नहीं है, जागरूक नागरिक होना महत्वपूर्ण है। हिंदुत्व की बात करना महत्वपूर्ण नहीं है, हिंदुत्व को अपने जीवन और विचारों में धारण करना महत्वपूर्ण है। राष्ट्र का नाम लेना महत्वपूर्ण नहीं है, राष्ट्र को अपने अस्तित्व का अभिन्न अंग मानना महत्वपूर्ण है। राष्ट्रवाद का तमगा लगाना महत्वपूर्ण नहीं है, राष्ट्र के प्रति वास्तविक बोध और निष्ठा होना महत्वपूर्ण है। अपनी संस्कृति पर गर्व करना महत्वपूर्ण नहीं है, अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति सजग और निष्ठावान होना महत्वपूर्ण है। किसी नेता का समर्थक होना महत्वपूर्ण नहीं है, अपने विचार के प्रति ईमानदार होना महत्वपूर्ण है। भीड़ का हिस्सा होना महत्वपूर्ण नहीं है, अपने विवेक से खड़ा होना महत्वपूर्ण है। हर बात पर सहमत होना महत्वपूर्ण नहीं है, सत्य और सिद्धांत के पक्ष में खड़ा होना महत्वपूर्ण है। सबसे महत्...