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शब्द ब्रह्म हैं -

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* शब्द ब्रह्म हैं - जो बोलते हो वही बन जाते हो* हमारे वेद कहते हैं कि शब्द ब्रह्म होते हैं। वाणी केवल संवाद का माध्यम नहीं है। वह एक शक्ति है। एक ऊर्जा है। जो बोला जाता है, वह केवल हवा में नहीं घुलता बल्कि वह हमारे भीतर उतरता है, हमारी चेतना को आकार देता है, और धीरे-धीरे हमारी वास्तविकता बन जाता है। यही कारण है कि हमारे ऋषियों ने वाणी को इतना महत्व दिया। मंत्र केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं थे। वे चेतना को जगाने के वैज्ञानिक उपकरण थे। आधुनिक मनोविज्ञान भी अब यही कह रहा है जो वेदांत हज़ारों वर्षों से कहता आया है। हम जो बार-बार बोलते हैं, वह हमारा अवचेतन मन सत्य मान लेता है। अगर आप रोज़ कहते हैं – मैं थका हुआ हूं, मेरे साथ हमेशा बुरा होता है, मुझसे नहीं होगा, तो आपका मन इसे सच मानकर उसी दिशा में काम करने लगता है। और जो मन मानता है, जीवन वैसा ही बनने लगता है। यह कोई रहस्यवाद नहीं है। यह चेतना का स्वभाव है। इसका उलटा भी उतना ही सत्य है। जो लोग अपने बारे में, अपने जीवन के बारे में, अपनी संभावनाओं के बारे में सकारात्मक और सजग भाव से बोलते हैं, उनके जीवन में एक अलग ही ऊर्जा दिखती है। ...

सुंदर संदेश🙏

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तीर्थों को तीर्थ ही रहने दो पर्यटन स्थल का नाम न दो हाल ही में ओंकारेश्वर जाना हुआ, तो कुछ क्षण के लिए इस शिवनगरी में बनी एक जैन धर्मशाला में ठहरना हुआ। यहां प्रत्येक एयरकंडीशंड कमरे के बाहर जो लिखा था, उसने जैन धर्म के प्रति सम्मान और बढ़ा दिया।  हर कमरे के बाहर स्पष्ट शब्दों में लिखा था... आप तीर्थ में हैं, पर्यटन स्थल पर नहीं तीर्थ मौज के लिए नहीं, आत्मकल्याण के लिए हैं। तीर्थ यात्रा सैर-सपाटे के लिए नहीं बल्कि परमार्थ साधने के लिए हैं।  तीर्थ मनोरंजन के लिए नहीं, भावशुद्धि के लिए हैं। तीर्थ खान-पान के लिए नहीं, संयम-नियम के लिए हैं। इन पंक्तियों ने मन निर्मल कर दिया। प्रत्येक तीर्थ, प्रत्येक मंदिर में यह संदेश लिखा जाना चाहिए, ताकि तीर्थों को तीर्थ ही समझा जाए, पर्यटन स्थल नहीं। हर हर महादेव.... ❤🚩 #We_support_hindutava_unity

सुंदर संदेश🙏

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तीर्थों को तीर्थ ही रहने दो पर्यटन स्थल का नाम न दो हाल ही में ओंकारेश्वर जाना हुआ, तो कुछ क्षण के लिए इस शिवनगरी में बनी एक जैन धर्मशाला में ठहरना हुआ। यहां प्रत्येक एयरकंडीशंड कमरे के बाहर जो लिखा था, उसने जैन धर्म के प्रति सम्मान और बढ़ा दिया।  हर कमरे के बाहर स्पष्ट शब्दों में लिखा था... आप तीर्थ में हैं, पर्यटन स्थल पर नहीं तीर्थ मौज के लिए नहीं, आत्मकल्याण के लिए हैं। तीर्थ यात्रा सैर-सपाटे के लिए नहीं बल्कि परमार्थ साधने के लिए हैं।  तीर्थ मनोरंजन के लिए नहीं, भावशुद्धि के लिए हैं। तीर्थ खान-पान के लिए नहीं, संयम-नियम के लिए हैं। इन पंक्तियों ने मन निर्मल कर दिया। प्रत्येक तीर्थ, प्रत्येक मंदिर में यह संदेश लिखा जाना चाहिए, ताकि तीर्थों को तीर्थ ही समझा जाए, पर्यटन स्थल नहीं। हर हर महादेव.... ❤🚩 #We_support_hindutava_unity

कृपया आनन्द लें और लोगों को भी आनन्द प्रदान करें.🙏

यह एक कमाल की कहानी है! मार्केटिंग की शक्ति सच में गजब की है.  अरेंज्ड मैरिज में जब हम लड़की देखने जाते हैं, तो एक प्रश्न तो पक्का होता है: *"लड़का क्या करता है ?"* 😉  सोनू का परिवार उसके लिए लड़की देखने गया. चाय-नाश्ता और थोड़ी बहुत बातचीत के बाद, लड़की के पिता धीरे से असली मुद्दे पर आए: "तो अभी आपका बेटा क्या काम करता है ?" सोनू के पिता ने चश्मा ठीक किया, गला साफ किया और पूरी कॉर्पोरेट-स्टाइल प्रेजेंटेशन शुरू कर दी: "देखिए, हमारा बेटा फिलहाल एक एग्रो-बेस्ड डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर स्टार्टअप का फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर है. हम ऑर्गेनिक हेल्थ और वेलनेस सेक्टर में काम करते हैं." यह सुनकर लड़की के पिता आधे तो वहीं इंप्रेस हो गए. "वाह! तो आपका प्रोडक्ट क्या है ?" सोनू के पिता ने आत्मविश्वास से आगे कहा: "हमारे मुख्य पोर्टफोलियो में हाई-प्रोटीन रोस्टेड लेग्यूम्स और ट्रेडिशनल कैरमेलाइज्ड स्वीट्स शामिल हैं. हम कच्चा माल सीधे होलसेल सप्लाई चेन से लेते हैं, फिर उसे अपनी थर्मल प्रोसेसिंग यूनिट में ड्राई-रोस्ट करते हैं. और सबसे बड़ी बात यह है कि हमारी ...

Humor 😂

एक टीचर ने चौथी क्लास के बच्चों से पूछा कि उनमें से कितने राहुल गांधी के फैन हैं। असली मतलब न जानते हुए, लेकिन टीचर को खुश करने के लिए, सभी बच्चों ने हाथ उठा दिए, सिवाय छोटे श्याम के टीचर ने श्याम से पूछा कि वह फिर से बाकी बच्चों से अलग क्यों है। श्याम ने कहा, "क्योंकि मैं राहुल गांधी का फैन नहीं हूं।" टीचर ने पूछा, "तुम राहुल गांधी के फैन क्यों नहीं हो?" श्याम ने कहा, "क्योंकि मैं बीजेपी समर्थक हूं।" टीचर ने पूछा, "तुम बीजेपी समर्थक क्यों हो?" श्याम ने जवाब दिया, "क्योंकि मेरी मां बीजेपी समर्थक हैं और मेरे पापा बीजेपी समर्थक हैं, तो मैं भी बीजेपी समर्थक हूं।" टीचर ने झुंझलाते हुए कहा,  "अगर तुम्हारी मां बेवकूफ होतीं और तुम्हारे पापा मूर्ख होते, तो तुम क्या होते?" मुस्कुराते हुए श्याम ने जवाब दिया, ...... "तो मैं राहुल गांधी का फैन होता।"😛😛😛

खतरनाक सर्वे रिपोर्ट*

* खतरनाक सर्वे रिपोर्ट* *कुंवारेपन का विस्फोट, समाज अंधी दौड़ में कहाँ पहुँच रहा है ?* अब वक्त आ गया है कि चीज़ों को मीठे शब्‍दों में कहना बंद किया जाए। *दुनिया जिस महिला आज़ादी की जय-जयकार कर रही है, वही आज़ादी धीरे-धीरे *परिवार, रिश्तों,* और *सामाजिक संतुलन,* सब कुछ निगलने लगी है। अंतरराष्ट्रीय सर्वे कहता है कि आने वाले कुछ वर्षों में *युवतियों में 45% तक विवाह से दूरी बना सकती हैं।* पहली नज़र में यह *प्रगति* लगती है, पर असल में यह *भविष्य के लिए एक टाइम-बम* है। 1.*कैरियर, पैसे और अकेलापन….यह कैसी प्रगति?* आज की बेटी कलेक्टर डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, टीचर उद्यमी, सब बन रही है। बहुत अच्छा। शानदार। पर क्या कैरियर पूरा जीवन है? *जरा सोचे. पैसा साथी नहीं बनता। पद वृद्धावस्था में हाथ नहीं पकड़ता। मोबाइल और लैपटॉप बुढ़ापे में बात नहीं करते।* लेकिन समाज को इस सच्चाई से फर्क नहीं पड़ता, सबको दौड़ लगानी है। 2.*परिवार ढह रहे हैं…. कोई देख भी रहा है?* कुँवारे लड़के बढ़ रहे हैं, अविवाहित युवतियाँ बढ़ रही हैं, जनसंख्या गिर रही है, और *अकेलेपन उद्योग* (counsellor, therapy, depression pills) फल-फूल रह...

*फ्रेंडशिप रिसेशन (मित्रता में मंदी)*

🌹* फ्रेंडशिप रिसेशन (मित्रता में मंदी)* हार्वर्ड बिजनेस के एक हालिया लेख में कहा गया है - जो आज की पीढ़ी का एक सच्चा आईना है...  1. *फ्रेंडशिप रिसेशन (मित्रता में मंदी)* – पूरी दुनिया में दोस्तों की संख्या में तेजी से गिरावट आ रही है।  2. 1990 से लेकर आज तक, अमेरिका में "मेरा कोई करीबी दोस्त नहीं है" कहने वाले लोगों की संख्या *चार गुना* बढ़कर *12%* हो गई है।  3. वहीं दूसरी ओर, जिनके *10 या उससे अधिक करीबी दोस्त* थे, उनकी संख्या में *एक तिहाई (one-third)* की कमी आई है।  4. ऐसा ही कुछ *भारत के शहरी इलाकों* में भी देखने को मिल रहा है – जान-पहचान वाले (परिचितों) की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन *सच्ची दोस्ती कम हो रही है*।  5. पहले लोग कैफे, क्लब या कार्यक्रमों में अजनबियों से भी बातचीत करते थे। अब लोग *भीड़ में भी अकेले* रहते हैं।6. अमेरिका में पिछले दो सालों में *अकेले खाना खाने वाले* लोगों की संख्या में *29%* की बढ़ोतरी हुई है।  7. *स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी* ने तो बकायदा *दोस्ती पर एक कोर्स* भी शुरू किया है।  8. यह सिर्फ एक सामाजिक मुद्दा नहीं है, बल्कि एक...