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*"स्वातंत्र्यवीर" विनायक दामोदर सावरकर को नमन*🙏

*🙏 वंदे मातरम् 🙏*   *"स्वातंत्र्यवीर" विनायक दामोदर सावरकर को नमन* 🚩🔥   *"त्याग, तपस्या, तूफान" - तीन शब्दों में सावरकर जी का जीवन* 🌹 --- *👦 जन्म और प्रारंभिक जीवन* *जन्म*: *28 मई 1883*, *भगूर गाँव*, नासिक, महाराष्ट्र   *माता-पिता*: दामोदर पंत और राधाबाई सावरकर   *उपाधि*: *"वीर"* - इन्हें यह उपाधि *लोकमान्य तिलक* ने दी थी   *बचपन*: 12 साल की उम्र में *"मित्र मेला"* नाम का क्रांतिकारी समूह बनाया। *प्रतिज्ञा*: *"देश की आजादी के लिए सशस्त्र क्रांति"*। --- *📚 शिक्षा और क्रांतिकारी कार्य* *1. फर्ग्युसन कॉलेज, पुणे*: यहीं *"अभिनव भारत सोसाइटी"* बनाई 1904 में। उद्देश्य: *"सशस्त्र क्रांति से अंग्रेजों को भगाना"*। *2. लंदन 1906-1910*: कानून पढ़ने गए, पर *"इंडिया हाउस"* को क्रांति का अड्डा बना दिया।   - *मदनलाल ढींगरा, श्यामजी कृष्ण वर्मा* जैसे क्रांतिकारियों को तैयार किया   - *"1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम"* पुस्तक लिखी। अंग्रेजों ने इसे *"राजद्रोह"* कहकर *प्रकाशन से पहले ही बैन* कर दि...

परम मित्र कौन है..?

.                    परम मित्र कौन है..? एक व्यक्ति था उसके तीन मित्र थे। एक मित्र ऐसा था जो सदैव साथ देता था। एक पल, एक क्षण भी बिछुड़ता नहीं था।  दूसरा मित्र ऐसा था जो सुबह शाम मिलता। और तीसरा मित्र ऐसा था जो बहुत दिनों में कभी कभी मिलता था।    एक दिन कुछ ऐसा हुआ की उस व्यक्ति को अदालत में जाना था और किसी कार्यवश साथ में किसी को गवाह बनाकर साथ ले जाना था।  अब वह व्यक्ति अपने सब से पहले अपने उस मित्र के पास गया जो सदैव उसका साथ देता था और बोला  "मित्र क्या तुम मेरे साथ अदालत में गवाह बनकर चल सकते हो ?   वह मित्र बोला :- माफ़ करो दोस्त, मुझे तो आज फुर्सत ही नहीं।*    उस व्यक्ति ने सोचा कि यह मित्र मेरा हमेशा साथ देता था। आज मुसीबत के समय पर इसने मुझे इंकार कर दिया।अब दूसरे मित्र की मुझे क्या आशा है।  फिर भी हिम्मत रखकर दूसरे मित्र के पास गया जो सुबह शाम मिलता था, और अपनी समस्या सुनाई।    दूसरे मित्र ने कहा कि :- मेरी एक शर्त है कि मैं सिर्फ अदालत के दरवाजे तक जाऊँगा, अन्दर तक नहीं। ...

🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*

*।। राम_राम।।* *✨✨सुप्रभात✨✨* *🌳🦚आज की कहानी🦚🌳* *💐💐अटूट विश्वास की निशानी 💐💐* अशोक वाटिका की शांति में बैठी माता सीता अपने हाथों में पड़ी विवाह की अंगूठी को निहार रही थीं। उस अंगूठी को देखते ही उनके हृदय में अनेक भाव उमड़ने लगे। यह वही अंगूठी थी, जो उनके प्रिय स्वामी भगवान श्री राम ने स्वयं उनके हाथों में पहनाई थी—प्रेम, विश्वास और अटूट बंधन का प्रतीक। किन्तु आज यह अंगूठी यहाँ, लंका की अशोक वाटिका में, उनके हाथों में कैसे आ गई—यही विचार उन्हें विचलित कर रहे थे। माता जानकी भली-भाँति जानती थीं कि प्रभु श्री राम को कोई भी युद्ध में पराजित नहीं कर सकता। वे यह भी जानती थीं कि इस दिव्य अंगूठी का कोई मायावी प्रतिरूप नहीं बना सकता। फिर यह यहाँ कैसे पहुँची? कौन लाया? किसने दी? और क्यों दी? उनका मन आशंका और आश्चर्य के बीच झूलने लगा। कहीं यह कोई छल तो नहीं? कहीं रावण की कोई नई चाल तो नहीं? परंतु उनके हृदय की गहराइयों में एक विश्वास भी था—राम का नाम, राम का चिन्ह कभी असत्य नहीं हो सकता। इन्हीं विचारों में डूबी माता सीता की दृष्टि अचानक सामने खड़े एक छोटे से वानर पर पड़ी। वह विनम्रता से हाथ...

कृष्णा की संदेश🙏

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*🦚❤️💛💙🌹💙💛❤️🦚*          *🪴🍀जय सियाराम🍀🪴*           *🌵🌳जय मातादी🌳🌵* 🌸 *राधा ने पूछा :* *कान्हा,* लोग बिना जाने ही आलोचना क्यों करते हैं?   कभी हमारे स्वभाव को गलत समझते हैं, तो कभी हमारे निर्णयों को। सबको खुश कैसे रखा जाए?```   🌸 श्रीकृष्ण कहते है:   राधे,   जो स्वयं से संतुष्ट नहीं होते, वे अक्सर दूसरों में कमी खोजते हैं।   सूर्य भी सबको समान प्रकाश देता है,   फिर भी कोई उसकी रोशनी से प्रसन्न होता है,   तो कोई उसकी तपन से परेशान। ☀️   इसलिए अपना मार्ग सत्य और मन की शांति के अनुसार चुनो, लोगों की सोच के अनुसार नहीं।``` 💞   🌸 *सीख:*   *> हर किसी को खुश करने की कोशिश में,*  *> इंसान अक्सर खुद को खो देता है। ✨*        *💓🌺जयश्री राधेकृष्ण🌺💓*          *♥️🍃शुभ-प्रभात🍃♥️*

वीसीआर और सुनहरा दौर

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सन 80 और 90 के दशक में वीसीआर पर फिल्में देखना एक अलग ही अनुभव हुआ करता था। जब किसी घर में किराए पर वीसीआर मंगाया जाता था, तो पूरे मोहल्ले या गाँव में इसकी चर्चा हो जाती थी। 50-60 रुपये में वीसीआर के साथ दो या तीन फिल्मों की कैसेट मिल जाती थीं और फिर रात भर मनोरंजन का दौर चलता था।📺 वीसीआर आने में अगर थोड़ी भी देर हो जाती, तो लोग दरवाजे के बाहर खड़े होकर उसका इंतजार करते रहते थे। जैसे ही वीसीआर वाला पहुँचता, बच्चों के चेहरे खिल उठते थे। दिलचस्प बात यह थी कि वीसीआर चलाने वाले व्यक्ति का भी खूब सम्मान किया जाता था। उसे बार-बार चाय, नाश्ता और खाने के लिए पूछा जाता था, क्योंकि वही तो पूरी रात फिल्मों का जादू चलाने वाला होता था।💫 फिर शुरू होता था फिल्मों का सिलसिला - एक्शन, रोमांस, कॉमेडी और आखिर में कोई डरावनी फिल्म। परिवार, रिश्तेदार, पड़ोसी और दोस्त सब एक साथ बैठकर फिल्में देखते थे। आज की तरह हर किसी के हाथ में मोबाइल नहीं था, इसलिए मनोरंजन भी सामूहिक होता था और उसका आनंद भी कई गुना ज्यादा होता था।🙌 वह दौर सिर्फ फिल्में देखने का नहीं, बल्कि लोगों के एक-दूसरे के करीब आने का ...

वैभव सूर्यवंशी की दास्तान*

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* वैभव सूर्यवंशी की दास्तान*  यह कहानी बिहार के समस्तीपुर जिले के एक गुमनाम से गांव ताजपुर के मोतीपुर से शुरू होती है, जहां धूल और तंगहाली के बीच एक बाप अपनी अधूरी आंखों में बरसों पुराना जख्म छुपाए बैठा था ।  संजीव सूर्यवंशी कभी खुद क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन बिहार की बदहाल खेल व्यवस्था और खाली जेब ने उनके सपनों का गला घोंट दिया था, पर जब साल 2011 में उनके घर बेटे वैभव का जन्म हुआ, तो संजीव ने ठान लिया था कि जो गरीबी उनसे जीती थी, उसे वो अपने बेटे से हारने नहीं देंगे ।  वैभव जब महज चार साल का था, तो वो दूध की बोतल छोड़कर हाथ में लकड़ी का पट्टा लेकर दिनभर गेंद के पीछे भागता था और बेटे के इसी पागलपन को देखकर संजीव ने बिना देर किए अपने घर के पिछवाड़े की कच्ची मिट्टी को खोदकर एक कामचलाऊ पिच बना दी, जहां सुबह की पहली किरण फूटने से लेकर रात के अंधेरे तक सिर्फ एक ही आवाज गूंजती थी - गेंद और बल्ले की आपसी टक्कर । जब वैभव आठ साल का हुआ, तो उसने जिला स्तर के ट्रायल्स में खुद से दोगुनी उम्र के कड़क गेंदबाजों के घमंड को नेस्तनाबूद कर दिया, जिसे देखकर संजीव समझ गए थे कि...

ईश्वर का धन्यवाद🙏

* ईश्वर का धन्यवाद करने के लिए 10 नायाब कारण:* > 1. *टायर चलने पर घिसते हैं, लेकिन पैर के तलवे जीवनभर दौड़ने के बाद भी नए जैसे रहते हैं।*   > 2. *शरीर 75% पानी से बना है, फिर भी लाखों रोमकूपों के बावजूद एक बूंद भी लीक नहीं होती।*   > 3. *कोई भी वस्तु बिना सहारे नहीं खड़ी रह सकती, लेकिन यह शरीर खुद को संतुलित रखता है।*   > 4. *कोई बैटरी बिना चार्जिंग के नहीं चलती, लेकिन हृदय जन्म से लेकर मृत्यु तक बिना रुके धड़कता है।* > 5. *कोई पंप हमेशा नहीं चल सकता, लेकिन रक्त पूरे जीवनभर बिना रुके शरीर में बहता रहता है।*   > 6. *दुनिया के सबसे महंगे कैमरे भी सीमित हैं, लेकिन आंखें हजारों मेगापिक्सल की गुणवत्ता में हर दृश्य कैद कर सकती हैं।*   > 7. *कोई लैब हर स्वाद टेस्ट नहीं कर सकती, लेकिन जीभ बिना किसी उपकरण के हजारों स्वाद पहचान सकती है।*   > 8. *सबसे एडवांस्ड सेंसर भी सीमित होते हैं, लेकिन त्वचा हर हल्की-से-हल्की संवेदना को महसूस कर सकती है।*   > 9. *कोई भी यंत्र हर ध्वनि नहीं निकाल सकता, लेकिन कंठ से...