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रमा एकादशी

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🍀 रमा एकादशी भगवान श्री विष्णु और 🌺माता लक्ष्मी को समर्पित एक पवित्र व्रत है, जो इस वर्ष🌀 5 नवम्बर  2026 (गुरुवार) को मनाई जाएगी।  यह 🔱कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी होती है और 💥दीपावली से पहले पड़ने के कारण इसका विशेष महत्व माना जाता है।👣👣   इस दिन 🌿तुलसी पत्ते तोड़ना निषिद्ध माना गया है, क्योंकि इस दिन स्वयं तुलसी माता भी व्रत रखती हैं। 🌺रमा एकादशी  व्रत करने से घर में धन, वैभव, सुख-शांति, सौभाग्य और संतति की वृद्धि होती है।सभी पापों और दोषों का नाश होता है तथा समृद्धि प्राप्त होती है। 🌺🌿रमा एकादशी, चातुर्मास की अंतिम एकादशी होती है, अतः इस व्रत के 🌼पुण्य से वर्षभर 🌼किए गए सभी व्रतों के बराबर फल मिलता है।🌾🌾🌾🌾🌾🌾 🟡भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और कठिन कार्य भी सहजता से सिद्ध हो जाते हैं। 🌀पितरों की शांति और आत्मा की शुद्धि के लिए भी यह व्रत अद्भुत बताया गया है। 👉विशेष इन मंत्र का जाप लाभकारी होता है। 🌺1. विष्णु गायत्री मंत्र“ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्...

मुझे मंज़िल नहीं, सफ़र का आनंद चाहिए।

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अजीब फ़कीरी है अब हमारे मिज़ाज में... न किसी से आगे निकलने की चाहत, न किसी को पीछे छोड़ने का जुनून। न दुनिया को खुश करने की कोशिश, न ख़ुद को अच्छा साबित करने का शौक़। जिसे रहना है, प्रेम से रहे... जिसे जाना है, मुस्कुराकर जाए। हमने तो अब ज़िंदगी से बस इतना कहा है— **मुझे मंज़िल नहीं, सफ़र का आनंद चाहिए। मुझे भीड़ नहीं, भीतर का उत्सव चाहिए।** ❤️🌿

For your Health

अगर आप हाई बीपी के डर से दाल-सब्जी में नमक बिल्कुल कम कर चुके हैं, फिर भी बीपी की मशीन 140/90 से नीचे नहीं आ रही—तो समझ लीजिए कि आप आधी अधूरी लड़ाई लड़ रहे हैं! ​सालों से हमें यही सिखाया गया है कि "बीपी बढ़ा है तो नमक छोड़ दो।" लेकिन मेडिकल साइंस की सच्चाई यह है कि सिर्फ नमक कम करने से ब्लड प्रेशर में मात्र 2 से 4 पॉइंट की ही कमी आती है। ​अगर आप वाकई बीपी की गोलियों से बचना चाहते हैं या बीपी को जड़ से कंट्रोल करना चाहते हैं, तो आपको उन 5 बातों को समझना होगा जो नमक से भी ज्यादा असरदार हैं: ​1. असली दुश्मन घर का नमक नहीं, 'पैकेटबंद सोडियम' है ​लोग दाल-सब्जी में नमक कम करके फीका खाना खाने लगते हैं, लेकिन शाम को चाय के साथ नमकीन, बिस्कुट, भुजिया, ब्रेड, पापड़, टोमैटो सॉस या पैकेज्ड सूप गटक लेते हैं। इन पैकेटबंद चीजों में प्रिजर्वेटिव के रूप में भारी मात्रा में सोडियम बेंजोएट और मोनोसोडियम ग्लूटामेट छुपा होता है। घर का चुटकी भर सेंधा नमक नुकसान नहीं करता, लेकिन पैकेटबंद प्रोसेस्ड खाना नसों को अंदर से सिकोड़ देता है। ​2. पोटैशियम: नसों को ढीला करने वाला कुदरती औजार ​सोडियम ...

*🌹 अंतर्मन का प्रेम 🌹*

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0️⃣4️⃣💎1️⃣1️⃣💎2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣         *🔥 आज की प्रेरणा प्रसंग 🔥*            *🌹 अंतर्मन का प्रेम 🌹* शहर की तंग गलियों के बीच एक पुरानी ताले की दुकान थी। लोग वहां से ताला-चाबी खरीदते और कभी- कभी चाबी खोने पर डुप्लीकेट चाबी बनवाने भी आते। ताले वाले की दुकान में एक भारी-भरकम हथौड़ा भी था जो कभी-कभार ताले तोड़ने के काम आता था। हथौड़ा अक्सर सोचा करता कि आखिर इन छोटी-छोटी चाबियों में कौन सी खूबी है जो इतने मजबूत तालों को भी चुटकियों में खोल देती हैं जबकि मुझे इसके लिए कितने प्रहार करने पड़ते हैं? एक दिन उससे रहा नहीं गया, और दुकान बंद होने के बाद उसने एक नन्ही चाबी से पूछा- “बहन ये बताओ कि आखिर तुम्हारे अन्दर ऐसी कौन सी शक्ति है जो तुम इतने जिद्दी तालों को भी बड़ी आसानी से खोल देती हो, जबकि मैं इतना बलशाली होते हुए भी ऐसा नहीं कर पाता?” चाबी मुस्कुराई और बोली- दरअसल, तुम तालों को खोलने के लिए बल का प्रयोग करते हो… उनके ऊपर प्रहार करते हो और ऐसा करने से ताला खुलता नहीं टूट जाता है… जबकि मैं ताले को बिलकुल भी चोट नहीं पहुंचाती… बल्कि मै...

🙏 *आज का वैदिक भजन* 🙏

🙏 *आज का वैदिक भजन* 🙏 00153  कर्म तेरा साथी है  यही साथ जाता है  जो भी पहले बोया है  वो ही आज पाता है  धोखा अगर तू देगा किसी को  बदले में तुझको भी धोखा मिलेगा  घर तू उजाड़ेगा तू किसी का  तेरा चमन भी कैसे खिलेगा  मालिक पे सबका ही खाता है  कर्मों के दुनिया में खेल न्यारे  कर्मों के ही फल पाते हैं सारे  कर्मों के फल से बनते हैं राजा  कर्मों से बनते भिक्षुक बेचारे  कर्मों से नर दु:ख सुख पाता है  निर्बल को गर तू देगा सहारा  तुझको भी मिल जाएगा किनारा  प्यासे को पानी तू जो पिलाये  तुझको मिलेगी अमृत की धारा काहे को तू ये बिसराता है  कर्मो से मानव, कर्मों से दानव  कर्मों से बनते हैं देवता भी  करने से पहले सोचो विचारो  फिर ना मिलेगी - गलती की माफी  जोगी जो गलती दोहराता है  कर्म तेरा साथी है  यही साथ जाता है  जो भी पहले बोया है  वो ही आज पाता है  *रचना व स्वर :- श्री ज्ञानेन्द्र जी शर्मा*

दिवाली

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*अब चूने में नील मिलाकर पुताई का जमाना नहीं रहा। चवन्नी, अठन्नी का जमाना भी नहीं रहा। फिर भी गुलजार साहब की लिखी यह यह कविता-* ..... हफ्तों पहले से साफ़-सफाई में जुट जाते हैं चूने के कनिस्तर में थोड़ी नील मिलाते हैं अलमारी खिसका खोयी चीज़ वापस पाते हैं दोछत्ती का कबाड़ बेच कुछ पैसे कमाते हैं   *चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....*  दौड़-भाग के घर का हर सामान लाते हैं  चवन्नी -अठन्नी पटाखों के लिए बचाते हैं सजी बाज़ार की रौनक देखने जाते हैं सिर्फ दाम पूछने के लिए चीजों को उठाते हैं  *चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....*  बिजली की झालर छत से लटकाते हैं कुछ में मास्टर बल्ब भी लगाते हैं टेस्टर लिए पूरे इलेक्ट्रीशियन बन जाते हैं दो-चार बिजली के झटके भी खाते हैं  *चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....*  दूर थोक की दुकान से पटाखे लाते है मुर्गा ब्रांड हर पैकेट में खोजते जाते है दो दिन तक उन्हें छत की धूप में सुखाते हैं बार-बार बस गिनते जाते है  *चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....*  धनतेरस के दिन कटोरदान लाते है छत के जंगले से क...

कुछ संदेश🙏

एक पक्षी ने एक ही प्रश्न तीन बार पूछा, और उत्तर में आयुर्वेद का पूरा सार छिपा था। आयुर्वेद परंपरा के अनुसार, आचार्य वाग्भट के आश्रम में एक प्रातः एक तेजस्वी पक्षी आकर बैठा और पूछने लगा, "कोऽरुक्?" अर्थात रोग से मुक्त कौन है? शिष्यों ने औषधियाँ और रसायन गिनाए, परंतु पक्षी वही प्रश्न दोहराता रहा। तब आचार्य ने तीन शब्दों में उत्तर दिया: हितभुक्, मितभुक्, ऋतभुक्। जो हितकारी भोजन करे, जो सीमित मात्रा में करे, और जो सत्य से अर्जित अन्न खाए। यही वाग्भट अष्टांग हृदय के रचयिता हैं। : *दांत चाहे कितनी भी बार जीभ को काटे फिर भी वे दोनों साथ रहते हैं, और साथ काम करते हैं,* *यही क्षमा व संबंध की भावना है.!!* *नेकियाँ करते रहिये क्योंकि ये हमारी जीवन की सुरक्षा निधि है।*  *हमारे जीवन में जब भी कभी तूफान आएगा, तो यही नेकियाँ हमारे लिए कश्ती का काम करेंगी....!*      🌴🌴🌴🌴🌴🌴 *मुस्कराना जिन्दगी का वो खुबसूरत लम्हा है ...* *जिसका अंदाज सब रिश्तो से अलबेला है ...* *जिसे मिल जाये वो तन्हाई में भी खुश...* *और जिसे न मिले वो भीड़ में भी अकेला है,,,*      ::::: *मुस्काते...