Posts

*भजन*

* भजन* हर पल तुम्हारी याद आती रहे  आती रहे, तेरी छबि मन को लुभाती रहे.....         राघव लुभाती रहे फूलों और कलियों में तेरी हंसी हो, बुलबुल के गीतों में तेरी खुशी हो, वाणी तेरे गुण गाती रहे,                 राघव गाती रहे हर पल तुम्हारी याद आती रहे..... कुछ भी नहीं था सिवा तेरे प्यारे, जो कुछ भी था सब तेरे हवाले, नैनो में तेरी छबि समाती रहे,          राघव समाती रहे हर पल तुम्हारी याद आती रहे..... प्रभु हम भक्तों की चाह यही है, श्रीराम मिलन की आस जगी है, जिव्हा ये नाम गुनगुनाती रहे,             राघव गुनाती रहे हर पल तुम्हारी याद आती रहे                      राघव आती रहे, तेरी छबि मन को लुभाती रहे.....           राघव लुभाती रहे हर पल तुम्हारी याद आती रहे !        *जय श्रीराम 🌹🙏*

𝐓𝐡𝐞 𝐎𝐥𝐝 𝐊𝐞𝐲

𝐓𝐡𝐞 𝐎𝐥𝐝 𝐊𝐞𝐲 A retired professor had a habit of locking an old wooden box every night. Inside it were his most precious papers, memories, and a small amount of cash. One day, he misplaced the tiny key. He searched everywhere—his desk, cupboards, bookshelves, even under the carpets. Nothing. He called his son, an engineer. The son came with gadgets, flashlights, and tools. He examined the lock carefully and said, “Don’t worry, Father. I’ll break it open.” Just then, the professor said, “Wait. Let me call my old Schoolmate first.” The son was puzzled. “Why? He’s not a locksmith!” A little later, the old Schoolmate arrived. They smiled, laughed, and began talking about their college days. After an hour, the old schoolmate suddenly asked, “Do you still hide important things inside your old dictionary, like you did in the hostel?” The professor froze. He walked to his bookshelf, pulled out a thick dictionary, and there—between the pages—was the tiny key. The son laughed. “All my eng...

अमेरिका से एक वरिष्ठ नागरिक की सीख —

अमेरिका से एक वरिष्ठ नागरिक की सीख — *"सेवानिवृत्ति के बाद भारत से अच्छा विकल्प अन्य कोई स्थान नहीं"* प्रिय मित्रों, पिछले दो महीनों से हम अमेरिका के सिएटल (वॉशिंगटन) में रह रहे हैं। भारत से निकलते समय मेरी पत्नी गंभीर श्वसन (सांस) संबंधी समस्या से पीड़ित थीं। इस लिए हम भारत से पर्याप्त दवाइयाँ साथ लेकर आए थे। उन दवाइयों से उन की तबीयत लगभग पूरी तरह ठीक हो गई। लेकिन जब दवाइयाँ समाप्त होने लगीं, तो चिंता हुई कि कहीं बीमारी दोबारा न लौट आए। मैंने अपनी बेटी से एक फेफड़ों के विशेषज्ञ (Pulmonologist) से मिलने का समय लेने को कहा। तब पता चला कि अमेरिका में सीधे विशेषज्ञ डॉक्टर से नहीं मिल सकते। पहले सामान्य चिकित्सक (General Physician) से परामर्श लेना अनिवार्य है। एक सप्ताह बाद केवल वीडियो कॉल पर 10 मिनट का समय मिला।  डॉक्टर ने हमारी बात सुन कर वही दवाइयाँ लिख दीं, जिन्हें मेरी पत्नी भारत में पहले से ले रही थीं। लेकिन असली आश्चर्य तब हुआ, जब मेडिकल स्टोर ने बताया कि दवाइयाँ तुरंत उपलब्ध नहीं हैं और उन्हें आने में 4–5 दिन लगेंगे। पाँचवें दिन दवाइयाँ मिलीं।  पैकेट पर लिखा था—"Mad...

अति दुर्लभ ग्रंथ

Image
अति दुर्लभ एक ग्रंथ ऐसा भी है हमारे सनातन धर्म मे इसे तो सात आश्चर्यों में से पहला आश्चर्य माना जाना चाहिए ---🚩 यह है दक्षिण भारत का एक ग्रन्थ क्या ऐसा संभव है कि जब आप किताब को सीधा पढ़े तो राम कथा के रूप में पढ़ी जाती है और जब उसी किताब में लिखे शब्दों को उल्टा करके पढ़े तो कृष्ण कथा के रूप में होती है । जी हां, कांचीपुरम के 17वीं शदी के कवि वेंकटाध्वरि रचित ग्रन्थ "राघवयादवीयम्" ऐसा ही एक अद्भुत ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ को ‘अनुलोम-विलोम काव्य’ भी कहा जाता है। पूरे ग्रन्थ में केवल 30 श्लोक हैं। इन श्लोकों को सीधे-सीधे पढ़ते जाएँ, तो रामकथा बनती है और विपरीत (उल्टा) क्रम में पढ़ने पर कृष्णकथा। इस प्रकार हैं तो केवल 30 श्लोक, लेकिन कृष्णकथा (उल्टे यानी विलोम)के भी 30 श्लोक जोड़ लिए जाएँ तो बनते हैं 60 श्लोक। पुस्तक के नाम से भी यह प्रदर्शित होता है, राघव (राम) + यादव (कृष्ण) के चरित को बताने वाली गाथा है ~ "राघवयादवीयम।" उदाहरण के तौर पर पुस्तक का पहला श्लोक हैः वंदेऽहं देवं तं श्रीतं रन्तारं कालं भासा यः । रामो रामाधीराप्यागो लीलामारायोध्ये वासे ॥ १॥ अर्था...

रोज घूमना क्यों ज़रूरी है*

* *रोज घूमना क्यों ज़रूरी है*   *निम्नलिखित को पढ़ें* *लिपिड प्रोफाइल क्या है* ? एक प्रसिद्ध डॉक्टर ने *लिपिड प्रोफाइल HDL & LDL को बहुत ही बेहतरीन ढंग से समझाया* और अनोखे तरीके से समझाने वाली एक खूबसूरत *कहानी साझा की*। `कल्पना कीजिए कि हमारा शरीर एक छोटा-सा कस्बा है। इस कस्बे में सबसे बड़े उपद्रवी हैं -` *कोलेस्ट्रॉल।* `इनके कुछ साथी भी हैं। इनका मुख्य अपराध में भागीदार है -` *ट्राइग्लिसराइड।* इनका काम है - *गलियों में घूमते रहना, अफरा-तफरी मचाना और रास्तों को ब्लॉक करना*। *दिल* इस कस्बे का *सिटी सेंटर* है। सारी सड़कें दिल की ओर जाती हैं। जब ये *उपद्रवी बढ़ने* लगते हैं तो आप समझ ही सकते हैं क्या होता है। *ये दिल के काम में रुकावट डालने की कोशिश करते हैं*। लेकिन हमारे शरीर-कस्बे के पास एक *पुलिस बल* भी तैनात है - *HDL*   वो अच्छा पुलिसवाला इन उपद्रवियों को पकड़कर जेल *(लिवर)* में डाल देता है। फिर लिवर इनको शरीर से बाहर निकाल देता है – *हमारे ड्रेनेज सिस्टम के ज़रिए*। लेकिन एक बुरा पुलिसवाला भी है - *LDL* जो सत्ता का भूखा है। LDL इन *उपद्रवियों को जेल से निकालकर ...

हमारा युवा पीढ़ियां बदल रहा है

Image
“ हत्या सिर्फ़ एक व्यक्ति की नहीं होती… उसके साथ कई परिवार उम्र भर के लिए मर जाते हैं।” पिछले कुछ समय से लगातार ऐसी ख़बरें सामने आ रही हैं जहाँ किसी लड़की ने अपने मंगेतर या पति की हत्या कर दी। हर घटना के बाद हम किसी एक व्यक्ति को खलनायक बना देते हैं, सोशल मीडिया अदालत बन जाता है, और कुछ दिनों बाद अगली ख़बर आ जाती है। लेकिन क्या हम कभी ठहरकर यह सोचते हैं कि ऐसी त्रासदियों की शुरुआत कहाँ से होती है? मुझे लगता है कि कहीं न कहीं हम माता-पिता भी इस कहानी का हिस्सा हैं। दोषी नहीं, लेकिन ज़िम्मेदार ज़रूर। हमें यह स्वीकार करना होगा कि बच्चों को जन्म देना, उन्हें पढ़ाना-लिखाना और संस्कार देना हमारी ज़िम्मेदारी है, लेकिन एक उम्र के बाद उनकी ज़िंदगी पर हमारा अधिकार नहीं रह जाता। हम उन्हें समझा सकते हैं, अनुभव बाँट सकते हैं, सही-गलत बता सकते हैं, लेकिन उनके लिए ज़िंदगी नहीं जी सकते। अगर कोई बेटा या बेटी शादी के लिए तैयार नहीं है, तो शायद हमें उसकी “ना” सुननी सीखनी होगी। अगर उसे किसी और के साथ जीवन बिताना है, तो हमें उसके निर्णय को समझने की कोशिश करनी होगी। ज़बरदस्ती से बने रिश्ते अक्सर बाहर से सुं...