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ALL THE DESTRUCTIVE WORDS BEGIN WITH THE* *LETTER "D"???*

* ऐसा क्यों है कि सभी नुकसान पहुंचाने वाले शब्द "D" अक्षर से शुरू होते हैं???*   *HOW COME ALL THE DESTRUCTIVE WORDS BEGIN WITH  THE* *LETTER "D"???*   *Check this out:*  Disease Destroy Delete Divorce Disappoint Death Disaster Debt Disrupt Demise Dementia Depression Demons Devil Dubious Diarrhea Demolish Doubt Dangerous Defeat Desperate Deform Dispute Detention Drunkard Dracula Distress Disable Devour Diabolic Distrust Distract Diabetes Disagree Deficit Defecate Dismember Dislocate Disorganize One more …….. *DONALD TRUMP* 😳😳😜🤣🤣🤣

आज का सुभाषित।

 आज का सुभाषित। चलचित्तं काम वित्तं चलज्जीवान् यौवनम् | क्लेचलमिदं सर्वं कीर्तिर्यस्य सजीवति || भावार्थ - मनुष्य का मन (मन की भावनाएँ) परिवर्तनशील है और धन संपत्ति है, युवा अवस्था तथा जीवन भी चलायमान है | ये सभी चलायमान (अस्थाई) हैं, परन्तु किसी व्यक्ति द्वारा अपने शुभ कर्मों से अर्जित उसकी कीर्ति (प्रसिद्धि) सदा बनी रहती है | चलचित्तं चलो वित्तं चलज्जीवनां यौवनम्। चलाचलमिदं सर्वं कीर्तिर्यस्य सजीवति। चाला = परिवर्तनशील। चित्तम् = मन, विचार। चलाओ = 'चला' के समान। विट्टम ​​= धन, चलजजीवन = चल + जीवन। जीवन = जीवन. यौवनम् = युवा। चलाचलमिदम् = चलाचलम् + इदम्। चलचलम् = इधर-उधर घूमने वाला, परिवर्तनशील। इदम्=यह। सर्वम् = सर्वम्। कीर्तिरयस्य = कीर्तिः + यस्य। कीर्तिः = यश। यस्य = जिसका। स = वह। जीवति = जीवित रहता है। अर्थात् मनुष्य का मन (विचार) परिवर्तनशील है, और उसी प्रकार उसका धन और यौवन भी। ये सब परिवर्तनशील हैं और स्थायी नहीं हैं, परन्तु व्यक्ति द्वारा अपने नेक कर्मों से अर्जित यश सदा बना रहता हैl

विधि का विधान*

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* विधि का विधान* *श्री राम का विवाह और राज्याभिषेक, दोनों शुभ मुहूर्त देख कर किए गए थे, फिर भी न वैवाहिक जीवन सफल हुआ, न ही राज्याभिषेक!*  *और जब मुनि वशिष्ठ से इसका उत्तर मांगा गया, तो उन्होंने साफ कह दिया*  *"सुनहु भरत भावी प्रबल,* *बिलखि कहेहूं मुनिनाथ।* *हानि लाभ, जीवन मरण,* *यश अपयश विधि हाथ।।"* *अर्थात - जो विधि ने निर्धारित किया है, वही होकर रहेगा!* *न राम के जीवन को बदला जा सका, न कृष्ण के!* *न ही महादेव शिव जी सती की मृत्यु को टाल सके, जबकि महामृत्युंजय मंत्र उन्हीं का आवाहन करता है!* *न गुरु अर्जुन देव जी, और न ही गुरु तेग बहादुर साहब जी, और दश्मेश पिता गुरु गोविन्द सिंह जी, अपने साथ होने वाले विधि के विधान को टाल सके, जबकि आप सब समर्थ थे!* *रामकृष्ण परमहंस भी अपने कैंसर को न टाल सके!* *न रावण अपने जीवन को बदल पाया, न ही कंस, जबकि दोनों के पास समस्त शक्तियाँ थी!* *मानव अपने जन्म के साथ ही जीवन, मरण, यश, अपयश, लाभ, हानि, स्वास्थ्य, बीमारी, देह, रंग, परिवार, समाज, देश-स्थान सब पहले से ही निर्धारित करके आता है!* *इसलिए सरल रहें, सहज, मन, वचन और कर्म से सद्क...

What is Brahma Padartham?

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What is Brahma Padartham?🔱  ‘Brahma Padartham’ is said to be a divine, eternal, and mysterious substance embedded within the idol of Lord Jagannath during the Nabakalebara ritual - the ritual of replacing old deities with new ones, which happens every 12-19 years.  According to legends and beliefs:  This sacred object is not man-made and is believed to carry divine consciousness.  It is placed inside the heart cavity of the murty.  Only few designated priests (called Daitapatis) are allowed to handle or see it.  During its transfer, blindfolds are used, and no light is allowed intense. even touching it is considered spiritually 

रोटी, चार प्रकार की होती है।"

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रोटी, चार प्रकार की होती है।"       पहली "सबसे स्वादिष्ट" रोटी "माँ की "ममता" और "वात्सल्य" से भरी हुई। जिससे पेट तो भर जाता है, पर मन कभी नहीं भरता।        एक दोस्त ने कहा, सोलह आने सच, पर शादी के बाद माँ की रोटी कम ही मिलती है।" उन्होंने आगे कहा  "हाँ, वही तो बात है।         दूसरी रोटी पत्नी की होती है जिसमें अपनापन और "समर्पण" भाव होता है जिससे "पेट" और "मन" दोनों भर जाते हैं।", क्या बात कही है यार ?" ऐसा तो हमने कभी सोचा ही नहीं।    फिर तीसरी रोटी किस की होती है?" एक दोस्त ने सवाल किया।       "तीसरी रोटी बहू की होती है जिसमें सिर्फ "कर्तव्य" का भाव होता है जो कुछ कुछ स्वाद भी देती है और पेट भी भर देती है और वृद्धाश्रम की परेशानियों से भी बचाती है", थोड़ी देर के लिए वहाँ चुप्पी छा गई।      "लेकिन ये चौथी रोटी कौन सी होती है ?" मौन तोड़ते हुए एक दोस्त ने पूछा-          "चौथी रोटी नौकरानी की होती है। जिससे ना तो इन्सान का "पेट" भरता है न...

*!! चुहिया का स्वयंवर !!*

0️⃣3️⃣❗0️⃣4️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣ * ♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*             *!! चुहिया का स्वयंवर !!* °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° गंगा नदी के तट पर कुछ तपस्वियों का आश्रम था जहाँ याज्ञवल्क्य नाम के ऋषि रहते थे. एक दिन वो नदी के किनारे आचमन कर रहे थे. उसी वक़्त आकाश में एक बाज अपने पंजे में एक चुहिया को दबाये जा रहा था जो उसकी पकड़ से छूटकर ऋषि की पानी से भरी हथेली में आ गिरी. ऋषि ने उसे एक पीपल के पत्ते पर रखा और दोबारा नदी में स्नान किया. चुहिया अभी मरी नहीं थी इसलिए ऋषि ने अपने तप से उसे एक कन्या बना दिया और आश्रम में ले आये. अपनी पत्नी से कहा इसे अपनी बेटी ही समझकर पालना. दोनों निसंतान थे इसलिए उनकी पत्‍नी ने कन्या का पालन बड़े प्रेम से किया. कन्या उनके आश्रम में पलते हुए बारह साल की हो गयी तो उनकी पत्‍नी ने ऋषि से उसके विवाह के लिए कहा. ऋषि ने कहा में अभी सूर्य को बुलाता हूँ. यदि यह हाँ कहे तो उसके साथ इसका विवाह कर देंगे ऋषि ने कन्या से पूछा तो उसने कहा “यह अग्नि जैसा गरम है. कोई इससे अच्छा वर बुलाइये.” तब सूर्य ने कहा बादल मुझ से अच्छे हैं, ज...

Yashoda and Krishna

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This iconic painting “Yashoda and Krishna” by Raja Ravi Varma sets a new record. It’s sold for Rs. 167.2 crore at a Saffronart auction in Mumbai. It’s acquired by industrialist Cyrus Poonawalla after a competitive bidding war. This marks one of the highest prices ever for an Indian artwork. As per news agency PTI, the painting had been estimated to fetch between Rs. 80 crore and Rs. 120 crore. Painted in the 1890s this piece is considered one of his most accomplished works by Varma. It depicts Yashoda milking a cow while infant Krishna reaches for a goblet of milk from behind.