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भगवान् जगन्नाथ के रथो का संक्षिप्त वर्णन*

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*भगवान् जगन्नाथ के रथो का संक्षिप्त वर्णन*   भगवान जगन्नाथ जी का रथ    1.रथ का नाम 👉 नंदीघो  2. कुल काष्ठ की संख्या 👉 832 3. कुल चक्के 👉 16    4.रथ की ऊंचाई 👉45 फीट  5. रथ की लम्बाई चौड़ाई 👉 34 फीट 6 इंच    6.सारथि 👉 दारुक 7. रथ का रक्षक 👉 गरुड़    8.रस्से का नाम 👉 शंखचूड    नागुनी 9. पताका का रंग 👉 त्रै लोक्य मोहिनी 10. रथ के  घोड़ों का नाम 👉 वराह, गोवर्धन, कृष्णा, गोपीकृष्ण, न्रसिंह, राम, नारायण, त्रिविक्रम, हनुमान,रूद्र। बलदेव जी का रथ 〰️〰️〰️〰️〰️〰️    1.रथ का नाम 👉 ताल ध्वज    2.कुलकाष्ठ संख्या 👉 763    3.कुल चक्के 👉 14 4. रथ की ऊंचाई 👉 44 फीट 5. रथ की लम्बाई चौड़ाई 👉 33 फीट 6. सारथि 👉 मातली    7.रथ के रक्षक 👉 वासुदेव 8. रस्से का नाम 👉  बासुकी नाग    9.पताका का रंग 👉 उन्नानी 10.रथ के घोड़ों के नाम👉  तीव्र ,घोर, दीर्घाश्रम, स्वर्ण नाभ ।। सुभद्रा जी का रथ 〰️〰️〰️〰️〰️〰️ 1. रथ का नाम 👉 देव दलन 2. कुल काष्ठ 👉 593 3. कुल चक्के 👉 16 ...

कुछ अलग बातें

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👈 * मुझे यह इतना दिलचस्प लगा कि अगर आपने इसे नहीं पढ़ा तो यह सच में शर्म की बात होगी:* कई बीमारियाँ असल में बीमारियाँ नहीं होतीं, बल्कि उम्र बढ़ने का एक नैचुरल प्रोसेस होता है। एक हॉस्पिटल डायरेक्टर ने बुज़ुर्गों को यह सलाह दी: आप बीमार नहीं हैं, आप बूढ़े हो रहे हैं। कई ऐसी स्थितियाँ जिन्हें आप बीमारी समझते हैं, असल में बीमारी नहीं होतीं, बल्कि आपके शरीर की उम्र बढ़ने के लक्षण होती हैं। 1. कमज़ोर याददाश्त ज़रूरी नहीं कि अल्ज़ाइमर हो; यह बूढ़े होते दिमाग का एक प्रोटेक्टिव मैकेनिज़्म है। यह दिमाग की उम्र बढ़ने की निशानी है, कोई बीमारी नहीं। अगर आप अपनी चाबियाँ खो देते हैं और बाद में पाते हैं, तो यह डिमेंशिया नहीं है। 2. धीरे चलना और पैरों या तलवों का डगमगाना पैरालिसिस नहीं, बल्कि मसल्स की कमज़ोरी है। इसका सॉल्यूशन दवा नहीं, बल्कि लगातार हिलना-डुलना है। 3. इंसोम्निया कोई बीमारी नहीं है, बल्कि दिमाग के रूटीन में बदलाव है। यह नींद के पैटर्न को बदल देता है। नींद की गोलियाँ न लें। लंबे समय तक उन पर डिपेंड रहने से गिरने और दिमागी तौर पर कमज़ोर होने का खतरा बढ़ जाता है। बुज़ुर्गों ...

कासा वाटी

कासा वाटी पैरों के तलवों पर कांसे धातु की टूल, या कासा कटोरी भी ले सकते हैं,  से मालिश करना एक प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति है, जिसे कांसा वाटी मसाज कहा जाता है।  यह मालिश सिर्फ आराम ही नहीं देती, बल्कि इसके कई गहरे शारीरिक और मानसिक फायदे भी हैंl कांसे की धातु, जो तांबे और टिन का मिश्रण होती है, आयुर्वेद में इसके औषधीय गुणों के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह मालिश शरीर के ऊर्जा बिंदुओं (मर्म) को उत्तेजित करती है, जिससे कई लाभ होते हैं। कांसे की कटोरी से मालिश के फायदे  शरीर की गंदगी (टॉक्सिन) बाहर निकालना कांसे की धातु में शरीर की गर्मी और विषाक्त पदार्थों (toxins) को खींचने का गुण होता है। जब तलवों पर तेल या घी लगाकर कांसे की कटोरी से मालिश की जाती है, तो कटोरी का निचला हिस्सा धीरे-धीरे काला या भूरा हो जाता है। यह इस बात का संकेत माना जाता है कि कटोरी शरीर से जमी हुई गंदगी को बाहर निकाल रही है।   तनाव और थकान दूर करना  पैरों के तलवों में हजारों तंत्रिकाएं (nerves) होती हैं। मालिश करने से ये तंत्रिकाएं शांत होती हैं, जिससे पूरे शरीर को गहरा आराम मिल...

आज का भगवद चिंतन ‼️

  आज का भगवद चिंतन ‼️*।। मन की संतुष्टि बनाम आत्मसंतुष्टि ।।*_‼️ ********************** 🛐संतुष्टि दो प्रकार की होती है एक मन की संतुष्टि दूसरी आत्मा की, किंतु दोनों में अंतर है। जहां संशयात्मक वृत्ति होने से मन का चिंतन स्वार्थपरक होता है। वहीं निर्विकार और तटस्थ भाव का अधिष्ठाता होने से आत्मा का चिंतन सदा परार्थ के लिए होता है। जब मन स्वार्थ के चक्र में फँसकर भौतिक सुखों की प्राप्ति में लगा रहता है, तब उसकी संतुष्टि अस्थिर और क्षणभंगुर हो जाती है। दूसरी ओर, आत्मा का परार्थ चिंतन दूसरों के कल्याण से जुड़कर स्वयं में गहन शांति का अनुभव कराता है। यह शांति न किसी बाहरी वस्तु पर निर्भर करती है, न ही समय के साथ क्षीण होती है। अत: स्वार्थपूर्ण चिंतन होने से मन की संतुष्टि कभी वास्तविक सुख प्रदान नहीं करती, जबकि परार्थमय चिंतन होने से आत्मसंतुष्टि सदैव वास्तविक सुख शांति प्रदान करती है। इसलिए मन की संतुष्टि कभी आत्मसंतुष्टि नहीं हो सकती।🛐 *आज का दिन शुभ मंगलमय हो।🙏🍀जय गुरुदेव 🍀🙏  *यदि हमें ठोकर लगकर भी संभलना नहीं आता तो इसका अर्थ है कि हमें जीवन पथ पर चलना भी नहीं आता। ठोकरों ...

स्वर्ग, नरक और हम*🌹💐🌹💐🌹💐

* स्वर्ग, नरक और हम*🌹💐🌹💐🌹💐 मृत्यु के बाद स्वर्ग मिले—इस आशा में मनुष्य जीवन भर कितने जतन करता है। कोई व्रत रखता है, कोई दान-पुण्य करता है, कोई तीर्थों की यात्रा करता है, तो कोई भगवान से मन्नतें माँगता है। मानो स्वर्ग कोई नई हाउसिंग सोसायटी हो और वहाँ एक छोटा-सा फ्लैट पाने के लिए पुण्य अंक जमा करने पड़ते हों। लेकिन कभी एक पल ठहरकर यह भी सोचिए... क्या हो, यदि हम पहले से ही स्वर्ग में रह रहे हों? सुबह उठिए और अपने चारों ओर नज़र दौड़ाइए। एक बटन दबाते ही अंधेरा उजाले में बदल जाता है। दूसरा बटन दबाते ही पंखा चलने लगता है। तीसरा दबाते ही ठंडी हवा कमरा भर देती है। नल खोलते ही पानी बहने लगता है। गैस जलाते ही कुछ ही मिनटों में भोजन तैयार हो जाता है। जेब से मोबाइल निकाला और पूरी दुनिया आपकी हथेली पर आ गई। हज़ारों किलोमीटर दूर बैठा अपना कोई प्रिय व्यक्ति कुछ ही सेकंड में आपके सामने दिखाई देने लगता है। इतनी अद्भुत सुविधाएँ... और हम उन्हें इतना सामान्य मान बैठे हैं, जैसे ये हमारा जन्मसिद्ध अधिकार हों। ज़रा कल्पना कीजिए... यदि दो सौ वर्ष पहले का कोई सम्राट आज आपके घर आ जाए, तो शायद वह लौटकर अपन...

राम क्या है?*

* राम क्या है?* जो रात में सोता है उसे *आ-राम* कहते हैं। जो सोता है और कभी नहीं उठता उसे *हे राम* कहते हैं। जो दोस्त जैसा महसूस करता है उसे *सखा राम* कहते हैं। जो राजा को आदर्श मानता है उसे *राजा राम* कहते हैं। जो दिल को जानता है उसे *आत्मा राम* कहते हैं। और जो एक पत्नी के व्रत के अनुसार काम करता है उसे *सीता राम* कहते हैं। जिसके पैरों की पूजा भगवान भी करते हैं उसे *तुका-राम* कहते हैं। जो किसी मौके पर हाथ में हथियार उठाकर अन्याय और अधर्म के खिलाफ लड़ता है उसे *परशु राम* कहते हैं। जो बिना रुके भगवान श्री राम का गुलाम बना रहता है उसे *राम दास* कहते हैं। आज के ज़माने में जो सुबह उठता है उसे *एला राम* कहते हैं। जो सेवा का व्रत रखता है उसे *सेवा राम* कहते हैं। जो मीठे फलों का प्रसाद बनाता है उसे *मेवा राम* कहते हैं। दूसरी बात, इस आर्टिकल में लिखी बात को समझने वाले हर व्यक्ति को हम *राम-राम, राम-राम* कहते हैं। अगर हम इसे इस तरह से देखें, तो कहा जाता है कि जिसने भी इसे पढ़ा है, उसने अनजाने में *राम-राम* नाम अठारह बार बोला है। मुझे बताओ, क्या तुमने सिर्फ़ जानकारी लेने के लिए *राम-राम* बीस बार ...

*भजन*

* भजन* हर पल तुम्हारी याद आती रहे  आती रहे, तेरी छबि मन को लुभाती रहे.....         राघव लुभाती रहे फूलों और कलियों में तेरी हंसी हो, बुलबुल के गीतों में तेरी खुशी हो, वाणी तेरे गुण गाती रहे,                 राघव गाती रहे हर पल तुम्हारी याद आती रहे..... कुछ भी नहीं था सिवा तेरे प्यारे, जो कुछ भी था सब तेरे हवाले, नैनो में तेरी छबि समाती रहे,          राघव समाती रहे हर पल तुम्हारी याद आती रहे..... प्रभु हम भक्तों की चाह यही है, श्रीराम मिलन की आस जगी है, जिव्हा ये नाम गुनगुनाती रहे,             राघव गुनाती रहे हर पल तुम्हारी याद आती रहे                      राघव आती रहे, तेरी छबि मन को लुभाती रहे.....           राघव लुभाती रहे हर पल तुम्हारी याद आती रहे !        *जय श्रीराम 🌹🙏*