प्रभात वंदन,,।*🙏
*सप्रेंम श्री हरि स्मरण,!* *प्रभात वंदन,,।* *जिंदगी का दूसरा नाम परिवर्तन है,अब चाहे परिवर्तन हम में हो, हमारे रिश्तों में हो, हमारे काम में हो, या संसार में हो, उसे अपनाना सीखना होगा.!* *वैचारिक मतभेद भले ही कितने हो जायें, लेकिन उम्र का लिहाज और शब्दों की मर्यादा हमेशा रखनी चाहिए,* *मुक्ति के तीन मार्ग..* *1. सत्संग:- यदि हम नियमित रूप से सत्संग में जाते हैं तो हम अनुभव करते हैं कि हमारे अन्दर बैठे "विकार" धीरे-धीरे कम हो रहे हैं और हमें एक दिन बुरे कामों से स्वतः ही घृणा होने लगेगी..!* *2. सेवा:- यदि हम सेवा/परोपकार कर रहे हैं, तो हमारे पास किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं रहेगी, जो भी आवश्यकताऐं है, यथा समय पूरी होती जायेगी.!* *3. सुमिरण:- यदि हम अपने सतगुरु से प्राप्त "नाम" का सुमिरण निरंतर व बताये अनुसार कर रहें हैं, तो हम अनुभव करेंगे कि हमारे साथकोइ एक अलौकिक एक शक्ति सदा हमारी रक्षा के लिए तत्पर रहती है..!* *ॐश्री परमात्मनै नंमः.!* *नव भोर वंदन..*🙏💐