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जूठन*

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* जूठन* रामायण के अनुसार सीता जी की खोज के समय हनुमानजी ने जब रावण की रसोई में प्रवेश किया तब रावण की जूठी थाली देख कर हनुमानजी समझ गये कि रावण की मृत्यु निकट आ गई है, क्योंकि रावण ने थाली में दही जूठा छोड़ रखा था। *भोजन में जूठा छोड़ने वाले की आयु कम होती जाती है.* शायद इसी कारण से हमारे पूर्वज खाना खाकर थाली में पानी डाल कर फिर जूठन को घोल कर पी जाया करते थे। विद्वानों के अनुसार थाली में जूठा भोजन छोड़ना मां अन्नपूर्णा और मां लक्ष्मी का अपमान माना जाता है। ऐसा करने से आर्थिक स्थिति कमजोर होती है। *साथ ही घर आती लक्ष्मी भी रूठ कर चली जाती* है। *भोजन जूठा छोड़ने वाले बच्चे पढ़ाई में कमजोर होते चले जाते हैं।* मन पढ़ाई से धीरे धीरे पूरी तरह हट जाता है। इसलिए बच्चे पहली बार में जितना खा सकते हैं उतना ही परोसें। *थाली में जूठा भोजन छोड़ने से शनि का प्रकोप झेलना पड़ सकता है*। इसके साथ ही चंद्रमा की भी अशुभ दृष्टि व्यक्ति के जीवन पर पड़ने लग जाती है। चंद्रमा की भी अशुभ दृष्टि की वजह से मानसिक बीमारियां भी व्यक्ति को घेर लेती हैं। इसके अलावा यदि आप यात्रा के दौरान जूठा भोजन फेंकते हैं तो...

विनम्बर श्रद्धांजलि🙏

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1940 में मेहबूब ख़ान अपनी फ़िल्म "औरत" बना रहे थे, जिसमें एक अधेड़ उम्र के बेरहम साहूकार सुखीलाला का किरदार निभाना था। शूटिंग के दिन एक बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई — कोई भी मेकअप आर्टिस्ट इस किरदार के लिए उपलब्ध या तैयार नहीं था। अभिनेता ख़ुद परेशान हो गया, मगर छायाकार फ़रेदून ईरानी ने बड़ी सहजता से कहा — "फ़िक्र मत करो, बस जैसे हो वैसे ही आ जाओ, मैं तुम्हें बिना मेकअप के ही फ़िल्मा लूंगा।" अभिनेता ने बस एक मूंछ लगाई, और बाक़ी कुछ नहीं — कोई मेकअप नहीं, कोई बनावट नहीं। यह परफ़ॉर्मेंस इतनी असरदार और सच्ची रही कि फ़िल्म गोल्डन जुबली हिट बन गई। सत्रह साल बाद, जब मेहबूब ख़ान ने इसी फ़िल्म को "मदर इंडिया" (1957) के नाम से दोबारा बनाया, तो उन्होंने इसी अभिनेता को दोबारा सुखीलाला के किरदार में लिया — हिंदी सिनेमा के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि किसी अभिनेता ने इतने लंबे अंतराल के बाद वही किरदार दोबारा निभाया। यह अभिनेता थे कन्हैयालाल, जिनकी सादगी भरी, बिना बनावट वाली अदाकारी ने उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार खलनायकों में शुमार कर दिया। आज कन्हैयालाल ...

2050 की दुनिया👌👌👌

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,* 2050 की दुनिया:मानव, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम बुद्धिमत्ता के संगम की संभावित सभ्यता* 2050 केवल भविष्य की तारीख नहीं होगी 2050 की दुनिया को केवल यह कहकर समझना पर्याप्त नहीं होगा कि उस समय AI अधिक शक्तिशाली होगा, रोबोट अधिक सक्षम होंगे और कंप्यूटर अधिक तेज़ होंगे। असल परिवर्तन इससे कहीं गहरा हो सकता है। आज हम AI को मुख्यतः एक Tool की तरह देखते हैं—हम प्रश्न पूछते हैं, AI उत्तर देता है।  2050 तक AI संभवतः एक Cognitive Infrastructure बन सकता है—ऐसी बुद्धिमान संरचना जो मनुष्य के साथ लगातार सोचती, भविष्य का अनुमान लगाती, विकल्पों का विश्लेषण करती, जटिल प्रणालियों को नियंत्रित करती और वास्तविक दुनिया में परिणाम उत्पन्न करने वाले कार्यों को समन्वित करती हो। इस दुनिया में सबसे मूल्यवान व्यक्ति वह नहीं होगा जिसके पास सबसे अधिक जानकारी है। सबसे मूल्यवान व्यक्ति वह होगा जो— सही प्रश्न पूछ सके, सही AI को सही समस्या दे सके, सही निर्णय ले सके, और मानव मूल्यों के भीतर रहते हुए विशाल intelligent systems को orchestrate कर सके। यहीं से 2050 की वास्तविक शक्ति शुरू होगी। मैं 2050 क...

*संभलने की जरूरत है !!*

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* मित्रोँ* *संभलने की जरूरत है !!* 1. चोटियां छोड़ी , 2. टोपी, पगड़ी छोड़ी , 3. तिलक, चंदन छोड़ा 4. कुर्ता छोड़ा ,धोती छोड़ी , 5. यज्ञोपवीत छोड़ा , 6. संध्या वंदन छोड़ा । 7. रामायण पाठ, गीता पाठ छोड़ा , 8. महिलाओं, लड़कियों ने साड़ी छोड़ी, बिछिया छोड़े, चूड़ी छोड़ी , दुपट्टा, चुनरी छोड़ी, मांग बिन्दी छोड़ी। 9. पैसे के लिये, बच्चे छोड़े (आया पालती है) 10. संस्कृत छोड़ी, हिन्दी छोड़ी, 11. श्लोक छोड़े, लोरी छोड़ी । 12. बच्चों के सारे संस्कार (बचपन के) छोड़े , 13. सुबह शाम मिलने पर राम राम छोड़ी , 14. पांव लागूं, चरण स्पर्श, पैर छूना छोड़े , 15. घर परिवार छोड़े (अकेले सुख की चाह में संयुक्त परिवार)। अब कोई रीति या परंपरा बची है? ऊपर से नीचे तक गौर करो, तुम कहां पर हिन्दू हो, भारतीय हो, सनातनी हो, ब्राह्मण हो, क्षत्रिय हो, वैश्य हो या कुछ और हो कहीं पर भी उंगली रखकर बता दो कि हमारी परंपरा को मैंने ऐसे जीवित रखा है।जिस तरह से हम धीरे धीरे बदल रहे हैं- जल्द ही समाप्त भी हो जाएंगे। बौद्धों ने कभी सर मुंड़ाना नहीं छोड़ा! सिक्खों ने भी सदैव पगड़ी का पालन किया! मुसलमानों ने न दाढ़ी छोड़ी औ...

आज का सन्देश.......

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* आज का सन्देश..................*            *सब कुछ ठीक होने की उम्मीद में इंसान कितना कुछ सह लेता है। जिनका समय अनुकूल होगा, वो उग ही आयेंगे आप चाहे जितने जतन कर लो, प्रकृति खुद देती है। बहुत कुछ इकट्ठा करना पड़ता है जीवन में खुशी के लिए, ऐसा हम लोग कहते हैं।*            *हकीकत में बहुत कुछ छोड़ना पड़ता है खुशी के लिए, ऐसा अनुभव कहता है। कुछ रिश्ते बातों से नहीं, एहसास से जीते है, जिसके एहसास सच्चे होते हैं, उसे कभी समझाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। हालात और निर्णय का संबंध गहरा होता है, बहुत से हालात निर्णय के कारण होते हैं और बहुत से* *निर्णय-हालात के कारण लिये जाते हैं।*            *बहुत तेज दिमाग चाहिये गलतियां निकालने के लिए, लेकिन एक सुंदर दिल होना चाहिए गलतियां कबूल करने के लिए। मन की संतुष्टी के लिए अच्छे काम करते रहना चाहिए लोग चाहें तारीफ करें न करें। कमियां तो लोग भगवान में भी तलाशते रहते हैं।*                         ...

विचार करना🙏

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🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚 अनमोल वचन          *     *दुआएं इकठ्ठी करने लग जाओ दोस्तों ये पक्का है यही साथ जाती है भक्ति एक के लिए बहुत से प्रेम करती है; और आसक्ति बहुत के लिए एक से प्रेम करती है। ईश्वर भक्त अपने को दीन और तुच्छ समझता है, वह किसी से अभिमान नहीं करता। तुम पवित्र तथा सर्वोपरि निष्ठावान बनो एक मुहूर्त के लिए भी भगवान् के प्रति अपनी आस्था न खोओ, इसी से तुम्हें प्रकाश दिखाई देगा।* 🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚 *कुछ लोग अकड़ की वजह से क़ीमती रिश्ते खो देते हैं..* *और कुछ लोग रिश्ते बचाते बचाते अपनी कदर खो देते हैं. 𝑰’𝒎 𝑯𝒂𝒑𝒑𝒊𝒆𝒔𝒕 𝑾𝒉𝒆𝒏 𝑰’𝒎 𝑵𝒐𝒕 𝑪𝒉𝒆𝒄𝒌𝒊𝒏𝒈 𝑾𝒉𝒐 𝑵𝒐𝒕𝒊𝒄𝒆𝒅, 𝑾𝒉𝒐 𝑨𝒑𝒑𝒓𝒐𝒗𝒆𝒅, 𝑶𝒓 𝑾𝒉𝒐 𝑼𝒏𝒅𝒆𝒓𝒔𝒕𝒐𝒐𝒅. 𝑳𝒊𝒇𝒆 𝑮𝒆𝒕𝒔 𝑸𝒖𝒊𝒆𝒕𝒆𝒓 𝑾𝒉𝒆𝒏 𝒀𝒐𝒖 𝑺𝒕𝒐𝒑 𝑷𝒆𝒓𝒇𝒐𝒓𝒎𝒊𝒏𝒈 𝑭𝒐𝒓 𝑶𝒕𝒉𝒆𝒓 𝑷𝒆𝒐𝒑𝒍𝒆. 🌹* *𝑮𝒐𝒐𝒅 𝑴𝒐𝒓𝒏𝒊𝒏𝒈*❣️ *𝑱𝒂𝒊 𝑺𝒉𝒓𝒆𝒆 𝑲𝒓𝒊𝒔𝒉𝒏𝒂*🤗

स्वाभिमान की स्त्री 🌼

🌼 शीर्षक — स्वाभिमान की स्त्री 🌼 एक ऐसी स्त्री बनना तुम— जिसकी चाल में संकोच नहीं, संस्कारों की गरिमा हो। 🌿 जिसकी आँखों में सपनों की रोशनी हो, और मन में ज्ञान का उजास हो। 📚✨ जिसकी हथेलियों में मेहनत की गरमी हो, पर हृदय में करुणा की नमी बनी रहे। 💫 जिसके शब्द किसी का मन न तोड़ें, और जिसकी ख़ामोशी भी सम्मान सिखा जाए। 🌸 जिसकी मुस्कान में आत्मविश्वास झलके, और जिसकी उपस्थिति किसी स्थान को अर्थ दे जाए। 🌙 क्योंकि सच्ची स्त्री वही है— जो वैभव से नहीं, अपने विचारों की ऊँचाई से पहचानी जाती है। ✨ शुभ प्रभात  राधे राधे