Posts

हमारा युवा पीढ़ियां बदल रहा है

“ हत्या सिर्फ़ एक व्यक्ति की नहीं होती… उसके साथ कई परिवार उम्र भर के लिए मर जाते हैं।” पिछले कुछ समय से लगातार ऐसी ख़बरें सामने आ रही हैं जहाँ किसी लड़की ने अपने मंगेतर या पति की हत्या कर दी। हर घटना के बाद हम किसी एक व्यक्ति को खलनायक बना देते हैं, सोशल मीडिया अदालत बन जाता है, और कुछ दिनों बाद अगली ख़बर आ जाती है। लेकिन क्या हम कभी ठहरकर यह सोचते हैं कि ऐसी त्रासदियों की शुरुआत कहाँ से होती है? मुझे लगता है कि कहीं न कहीं हम माता-पिता भी इस कहानी का हिस्सा हैं। दोषी नहीं, लेकिन ज़िम्मेदार ज़रूर। हमें यह स्वीकार करना होगा कि बच्चों को जन्म देना, उन्हें पढ़ाना-लिखाना और संस्कार देना हमारी ज़िम्मेदारी है, लेकिन एक उम्र के बाद उनकी ज़िंदगी पर हमारा अधिकार नहीं रह जाता। हम उन्हें समझा सकते हैं, अनुभव बाँट सकते हैं, सही-गलत बता सकते हैं, लेकिन उनके लिए ज़िंदगी नहीं जी सकते। अगर कोई बेटा या बेटी शादी के लिए तैयार नहीं है, तो शायद हमें उसकी “ना” सुननी सीखनी होगी। अगर उसे किसी और के साथ जीवन बिताना है, तो हमें उसके निर्णय को समझने की कोशिश करनी होगी। ज़बरदस्ती से बने रिश्ते अक्सर बाहर से सुं...

मायका, यानी "माँ यह क्या" ?

मायका, यानी "माँ यह क्या" ? कल बहुत लंबे समय के बाद अपने एक पुराने मित्र के यहां अचानक जाना हुआ, जाते ही देखता हूं तो क्या कि उसकी बेटी और नातिन आए हुए है। घर का सारा माहौल ही बदला हुआ था। सारी बातों का केंद्र चार साल की नातिन ही बनी हुई थी। मानो दोस्त और भाभी जी की बातों में सिवाय उसकी नई-नई उपलब्धियों के अलावा कुछ और विषय बातचीत के लिए थे ही नहीं....! यार, साल भर इंतजार के बाद यह सुनहरा समय आता है, फिर इनके चले जाने के बाद यादों के सहारे ही हम एक साल काट पाते हैं.....! मैंने भी दोस्त से कहा की हम भी अभी-अभी इसी दौर से गुजरे हैं। मेरी भी दोनों बेटियां और नातिन  हफ्ते भर के लिए मायके आई थी और हमने भी इस दौरान इसी आनंद को अनुभव किया । गर्मी की छुट्टियां यानी मायके का समय होता है। हमें भी अपने पुराने दिन याद आते हैं, जब गर्मी की छुट्टी में मां के साथ मामा जी के घर जाया करते थे। आप यकीन मानिए कि सारे रिश्तेदारों के घर एक तरफ और ननिहाल एक तरफ होता है। बच्चों के घर आने से कई दिन पहले से ही प्लानिंग शुरू हो जाती है, विशेषकर ऐसी चीज जो साल भर में एक बार ही बनती है, उनको बनाने के लिए...

शब्द ब्रह्म हैं -

Image
* शब्द ब्रह्म हैं - जो बोलते हो वही बन जाते हो* हमारे वेद कहते हैं कि शब्द ब्रह्म होते हैं। वाणी केवल संवाद का माध्यम नहीं है। वह एक शक्ति है। एक ऊर्जा है। जो बोला जाता है, वह केवल हवा में नहीं घुलता बल्कि वह हमारे भीतर उतरता है, हमारी चेतना को आकार देता है, और धीरे-धीरे हमारी वास्तविकता बन जाता है। यही कारण है कि हमारे ऋषियों ने वाणी को इतना महत्व दिया। मंत्र केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं थे। वे चेतना को जगाने के वैज्ञानिक उपकरण थे। आधुनिक मनोविज्ञान भी अब यही कह रहा है जो वेदांत हज़ारों वर्षों से कहता आया है। हम जो बार-बार बोलते हैं, वह हमारा अवचेतन मन सत्य मान लेता है। अगर आप रोज़ कहते हैं – मैं थका हुआ हूं, मेरे साथ हमेशा बुरा होता है, मुझसे नहीं होगा, तो आपका मन इसे सच मानकर उसी दिशा में काम करने लगता है। और जो मन मानता है, जीवन वैसा ही बनने लगता है। यह कोई रहस्यवाद नहीं है। यह चेतना का स्वभाव है। इसका उलटा भी उतना ही सत्य है। जो लोग अपने बारे में, अपने जीवन के बारे में, अपनी संभावनाओं के बारे में सकारात्मक और सजग भाव से बोलते हैं, उनके जीवन में एक अलग ही ऊर्जा दिखती है। ...

सुंदर संदेश🙏

Image
तीर्थों को तीर्थ ही रहने दो पर्यटन स्थल का नाम न दो हाल ही में ओंकारेश्वर जाना हुआ, तो कुछ क्षण के लिए इस शिवनगरी में बनी एक जैन धर्मशाला में ठहरना हुआ। यहां प्रत्येक एयरकंडीशंड कमरे के बाहर जो लिखा था, उसने जैन धर्म के प्रति सम्मान और बढ़ा दिया।  हर कमरे के बाहर स्पष्ट शब्दों में लिखा था... आप तीर्थ में हैं, पर्यटन स्थल पर नहीं तीर्थ मौज के लिए नहीं, आत्मकल्याण के लिए हैं। तीर्थ यात्रा सैर-सपाटे के लिए नहीं बल्कि परमार्थ साधने के लिए हैं।  तीर्थ मनोरंजन के लिए नहीं, भावशुद्धि के लिए हैं। तीर्थ खान-पान के लिए नहीं, संयम-नियम के लिए हैं। इन पंक्तियों ने मन निर्मल कर दिया। प्रत्येक तीर्थ, प्रत्येक मंदिर में यह संदेश लिखा जाना चाहिए, ताकि तीर्थों को तीर्थ ही समझा जाए, पर्यटन स्थल नहीं। हर हर महादेव.... ❤🚩 #We_support_hindutava_unity

सुंदर संदेश🙏

Image
तीर्थों को तीर्थ ही रहने दो पर्यटन स्थल का नाम न दो हाल ही में ओंकारेश्वर जाना हुआ, तो कुछ क्षण के लिए इस शिवनगरी में बनी एक जैन धर्मशाला में ठहरना हुआ। यहां प्रत्येक एयरकंडीशंड कमरे के बाहर जो लिखा था, उसने जैन धर्म के प्रति सम्मान और बढ़ा दिया।  हर कमरे के बाहर स्पष्ट शब्दों में लिखा था... आप तीर्थ में हैं, पर्यटन स्थल पर नहीं तीर्थ मौज के लिए नहीं, आत्मकल्याण के लिए हैं। तीर्थ यात्रा सैर-सपाटे के लिए नहीं बल्कि परमार्थ साधने के लिए हैं।  तीर्थ मनोरंजन के लिए नहीं, भावशुद्धि के लिए हैं। तीर्थ खान-पान के लिए नहीं, संयम-नियम के लिए हैं। इन पंक्तियों ने मन निर्मल कर दिया। प्रत्येक तीर्थ, प्रत्येक मंदिर में यह संदेश लिखा जाना चाहिए, ताकि तीर्थों को तीर्थ ही समझा जाए, पर्यटन स्थल नहीं। हर हर महादेव.... ❤🚩 #We_support_hindutava_unity

कृपया आनन्द लें और लोगों को भी आनन्द प्रदान करें.🙏

यह एक कमाल की कहानी है! मार्केटिंग की शक्ति सच में गजब की है.  अरेंज्ड मैरिज में जब हम लड़की देखने जाते हैं, तो एक प्रश्न तो पक्का होता है: *"लड़का क्या करता है ?"* 😉  सोनू का परिवार उसके लिए लड़की देखने गया. चाय-नाश्ता और थोड़ी बहुत बातचीत के बाद, लड़की के पिता धीरे से असली मुद्दे पर आए: "तो अभी आपका बेटा क्या काम करता है ?" सोनू के पिता ने चश्मा ठीक किया, गला साफ किया और पूरी कॉर्पोरेट-स्टाइल प्रेजेंटेशन शुरू कर दी: "देखिए, हमारा बेटा फिलहाल एक एग्रो-बेस्ड डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर स्टार्टअप का फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर है. हम ऑर्गेनिक हेल्थ और वेलनेस सेक्टर में काम करते हैं." यह सुनकर लड़की के पिता आधे तो वहीं इंप्रेस हो गए. "वाह! तो आपका प्रोडक्ट क्या है ?" सोनू के पिता ने आत्मविश्वास से आगे कहा: "हमारे मुख्य पोर्टफोलियो में हाई-प्रोटीन रोस्टेड लेग्यूम्स और ट्रेडिशनल कैरमेलाइज्ड स्वीट्स शामिल हैं. हम कच्चा माल सीधे होलसेल सप्लाई चेन से लेते हैं, फिर उसे अपनी थर्मल प्रोसेसिंग यूनिट में ड्राई-रोस्ट करते हैं. और सबसे बड़ी बात यह है कि हमारी ...

Humor 😂

एक टीचर ने चौथी क्लास के बच्चों से पूछा कि उनमें से कितने राहुल गांधी के फैन हैं। असली मतलब न जानते हुए, लेकिन टीचर को खुश करने के लिए, सभी बच्चों ने हाथ उठा दिए, सिवाय छोटे श्याम के टीचर ने श्याम से पूछा कि वह फिर से बाकी बच्चों से अलग क्यों है। श्याम ने कहा, "क्योंकि मैं राहुल गांधी का फैन नहीं हूं।" टीचर ने पूछा, "तुम राहुल गांधी के फैन क्यों नहीं हो?" श्याम ने कहा, "क्योंकि मैं बीजेपी समर्थक हूं।" टीचर ने पूछा, "तुम बीजेपी समर्थक क्यों हो?" श्याम ने जवाब दिया, "क्योंकि मेरी मां बीजेपी समर्थक हैं और मेरे पापा बीजेपी समर्थक हैं, तो मैं भी बीजेपी समर्थक हूं।" टीचर ने झुंझलाते हुए कहा,  "अगर तुम्हारी मां बेवकूफ होतीं और तुम्हारे पापा मूर्ख होते, तो तुम क्या होते?" मुस्कुराते हुए श्याम ने जवाब दिया, ...... "तो मैं राहुल गांधी का फैन होता।"😛😛😛