100 'ना' की ताकत - एक सच्ची सीख*
* 100 'ना' की ताकत - एक सच्ची सीख* कल मेरे बेटे विशाल का फोन आया। वो आजकल यूरोप में है। उसने मुझे एक ऐसा किस्सा सुनाया जिसे सुनकर मैं देर तक सोचता रहा, और लगा कि ये सिर्फ एक किस्सा नहीं, हम सबके लिए एक आईना है। विशाल एम्स्टर्डम में Costco स्टोर गया था। बाहर हल्की ठंड थी, लोग जल्दी-जल्दी अंदर-बाहर आ-जा रहे थे। गेट के पास एक छोटा बच्चा खड़ा था। मुश्किल से पाँच साल का होगा। हाथ में चिप्स के कुछ पैकेट और गले में एक छोटा-सा बोर्ड लटका था। बोर्ड पर टेढ़े-मेढ़े अक्षरों में लिखा था - "स्काउट चैरिटी के लिए, सिर्फ $20 में।" लोग उसके बगल से गुजर रहे थे। किसी को जल्दी थी, कोई फोन पर था, कोई देखकर भी अनदेखा कर रहा था। लेकिन वो बच्चा... वो हार नहीं मान रहा था। वो हर आने-जाने वाले के पास अपनी छोटी-छोटी टांगों से चलकर जाता, ऊपर देखता और बड़ी मासूमियत से पूछता, "क्या आप एक पैकेट खरीदेंगे?" कोई खरीद लेता। कोई मुस्कुराकर कहता, "नहीं बेटा, थैंक यू।" मैंने सोचा, इतना छोटा बच्चा, इतनी बार 'ना' सुनकर रो देगा, उदास हो जाएगा, अपनी टीचर के पीछे छिप जाएगा। लेकिन नहीं...