स्वाभिमान की स्त्री 🌼
🌼 शीर्षक — स्वाभिमान की स्त्री 🌼 एक ऐसी स्त्री बनना तुम— जिसकी चाल में संकोच नहीं, संस्कारों की गरिमा हो। 🌿 जिसकी आँखों में सपनों की रोशनी हो, और मन में ज्ञान का उजास हो। 📚✨ जिसकी हथेलियों में मेहनत की गरमी हो, पर हृदय में करुणा की नमी बनी रहे। 💫 जिसके शब्द किसी का मन न तोड़ें, और जिसकी ख़ामोशी भी सम्मान सिखा जाए। 🌸 जिसकी मुस्कान में आत्मविश्वास झलके, और जिसकी उपस्थिति किसी स्थान को अर्थ दे जाए। 🌙 क्योंकि सच्ची स्त्री वही है— जो वैभव से नहीं, अपने विचारों की ऊँचाई से पहचानी जाती है। ✨ शुभ प्रभात राधे राधे