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मुकदमा...कुछ अलग

" अदालत में पहली बार ऐसा मुकदमा आया... जहाँ तीनों बेटे ज़मीन नहीं, अपने बूढ़े माँ-बाप को अपने साथ ले जाने की ज़िद कर रहे थे।" जिला न्यायालय का कमरा नंबर 7 लोगों से खचाखच भरा हुआ था। बाहर खड़े लोग एक-दूसरे से पूछ रहे थे— "किस बात का केस है?" किसी ने जवाब दिया— "सुना है तीनों बेटे लड़ रहे हैं..." एक आदमी हँसकर बोला— "फिर वही ज़मीन-जायदाद का झगड़ा होगा।" तभी कोर्ट का दरवाज़ा खुला। अंदर जो दृश्य था, उसने सबकी सोच बदल दी। कटघरे में कोई अपराधी नहीं खड़ा था। वहाँ बैठे थे सत्तर वर्षीय रामस्वरूप मिश्रा और उनकी पत्नी सरला देवी। दोनों की आँखों में आँसू थे। उनके सामने खड़े थे उनके तीनों बेटे— विनय, दीपक और मोहित। जज ने फाइल खोली और मुस्कुराकर पूछा— "तो बताइए... विवाद क्या है?" सबसे बड़े बेटे विनय ने हाथ जोड़कर कहा— "माननीय न्यायालय... मैं अपने माता-पिता को अपने साथ रखना चाहता हूँ।" जज ने दूसरे बेटे की ओर देखा। दीपक बोला— "नहीं साहब... पिछले दस साल से बड़े भैया ने सबसे ज़्यादा सेवा की है। अब मेरी बारी है। मैं उन्हें अपने घर ले जाना चा...

सी. राधाकृष्ण राव

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_ एकमात्र उदाहरण…_  सी. राधाकृष्ण राव 60 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त हुए और अपनी बेटी व नाती-पोतों के साथ अमेरिका जाकर रहने लगे।  वहाँ 62 वर्ष की उम्र में पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय में सांख्यिकी के प्रोफेसर बने और 70 वर्ष की उम्र में पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय में विभागाध्यक्ष बने।  75 वर्ष की उम्र में उन्हें अमेरिकी नागरिकता मिली।  82 वर्ष की उम्र में उन्हें विज्ञान का राष्ट्रीय पदक और व्हाइट हाउस सम्मान मिला। आज 102 वर्ष की उम्र में उन्हें सांख्यिकी का अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिला है।  भारत सरकार ने उन्हें पहले ही पद्मभूषण (1968) और पद्म विभूषण (2001) से सम्मानित किया है।  राव कहते हैं, _"भारत में रिटायरमेंट के बाद कोई पूछता नहीं। सहकर्मी भी विद्वता का नहीं बल्कि सत्ता का सम्मान करते हैं।"_  102 वर्ष की उम्र में उत्तम स्वास्थ्य के साथ नोबेल प्राप्त करना शायद पहला उदाहरण है। यह एक ऐसी घटना है जिसे हमें हमेशा याद रखना चाहिए।  _सेवानिवृत्त होने का मतलब निष्क्रिय हो जाना नहीं है। जीवन का नाम है आखिरी सांस तक पूरे उत्साह के साथ जीना।_...

रिटायर्ड लोगों के लिए*

यह रिटायरमेंट के बाद खुशहाल और हेल्दी ज़िंदगी के लिए 36 सुझावों की लिस्ट है। यह एक जानी-मानी कंपनी के HR डिपार्टमेंट का सर्कुलेशन है। 1. अकेले ट्रैवल करने से बचें। 2. अपने जीवनसाथी के साथ ट्रैवल करें। 3. पीक आवर्स में बाहर जाने से बचें। 4. बहुत ज़्यादा एक्सरसाइज़ या वॉकिंग से बचें। 5. बहुत ज़्यादा पढ़ने, मोबाइल इस्तेमाल करने या TV देखने से बचें। 6. ज़्यादा दवाएँ लेने से बचें। 7. समय पर डॉक्टर के पास जाएँ और रेगुलर दवाएँ लें। 8. रिटायरमेंट के बाद प्रॉपर्टी डीलिंग से बचें। 9. हमेशा अपनी ID और ज़रूरी फ़ोन नंबर साथ रखें। 10. बीती बातों को भूल जाएँ और भविष्य की ज़्यादा चिंता न करें। 11. वही खाएँ जो आपको ठीक लगे, और धीरे-धीरे चबाएँ। 12. बाथरूम और टॉयलेट में सावधान रहें। 13. स्मोकिंग और शराब पीने से बचें, ये नुकसानदायक हैं। 14. अपनी अचीवमेंट्स के बारे में शेखी न बघारें।  15. रिटायरमेंट के बाद कुछ सालों तक खूब घूमें, फिर भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचें। 16. अपनी प्रॉपर्टी और एसेट्स के बारे में दूसरों से बात न करें। 17. अपनी कैपेसिटी और हेल्थ के हिसाब से एक्सरसाइज करें। 18. अगर आपको हाई BP या ...

राजस्थानी गणेश जी🙏

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राजस्थान की राजधानी जयपुर में अरावली की नाहरगढ़ पहाड़ी पर स्थित गढ़ गणेश मंदिर अपनी अनूठी परंपरा और इतिहास के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। इस मंदिर की स्थापना और बिना सूंड वाले गणेश जी का इतिहास जयपुर शहर की स्थापना से सीधे जुड़ा हुआ है: 18वीं शताब्दी (वर्ष 1730 के आसपास) में जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने 'अश्वमेध यज्ञ' का आयोजन कराया था। यज्ञ के पूरा होने के बाद, जयपुर (जैनगर) की स्थापना से पूर्व उन्होंने इस मंदिर की नींव रखी। शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म माता पार्वती के उबटन से हुआ था और शुरुआत में वह एक सामान्य मानव शिशु (बाल स्वरूप) के रूप में थे, जिनकी सूंड नहीं थी। महाराजा सवाई जयसिंह ने मंदिर में गणेश जी के इसी 'बाल गणेश' (विनायक) रूप को प्रतिष्ठित करवाया। बालक रूप होने के कारण इस प्रतिमा में सूंड नहीं है।  मंदिर को अरावली की सबसे ऊंची पहाड़ियों में से एक पर इस प्रकार बनाया गया कि बालक गणेश पूरे जयपुर शहर पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें। सिटी पैलेस (राजमहल) की ऊपरी मंजिलों और चंद्र महल से दूरबीन या नंगी आंखों ...

PIN कोड को अलविदा, 🙏

* PIN कोड को अलविदा, डाक विभाग लाया DigiPIN; अपना डिजिटल पता कैसे पता करें?* दिल्ली: पिन कोड का दौर, जो डाक पतों की पहचान हुआ करता था, अब खत्म हो गया है। इसकी जगह भारतीय डाक विभाग ने 'DigiPIN' नाम का एक डिजिटल पता सिस्टम शुरू किया है। अब देश में DigiPIN ही नया पता सिस्टम होगा। जहाँ पारंपरिक पिन कोड एक बड़े इलाके को कवर करते थे, वहीं 10 अंकों वाला DigiPIN सिस्टम आपके घर या बिज़नेस की सटीक लोकेशन बताता है। आइए जानते हैं कि पिन कोड और DigiPIN में क्या अंतर है। भारतीय डाक विभाग ने सटीक लोकेशन जानने के लिए DIGIPIN सिस्टम शुरू किया है। DigiPIN एक 10 अंकों का डिजिटल कोड है। पारंपरिक पिन कोड के उलट, जो एक बड़े इलाके को कवर करता था, DigiPIN सटीक लोकेशन की जानकारी देगा। यानी, इस DigiPIN के ज़रिए आपके घर या बिज़नेस की सही लोकेशन का पता लगाया जा सकता है। आप DigiPIN बनाने और कोड खोजने के लिए बनाई गई सरकारी वेबसाइट पर जाकर अपने घर का कोड पता कर सकते हैं। DigiPIN का फ़ायदा यह है कि यह चिट्ठी-पत्री को सही जगह पहुँचाएगा और एम्बुलेंस व फायर ब्रिगेड जैसी इमरजेंसी सेवाओं को लोकेशन समझकर सही जगह पहुँचन...

बहुत दुख की बात😢

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* बेटियों ने 5100 रुपये गूगल पे  किया फिर वीडियो कॉल पर किया पिता का अंतिम संस्कार, कहा टाइम नहीं है* *टाइम का फेर देखिए - मुंबई के मशहूर कपड़ा व्यापारी शिवचरण रामरत्न गुप्ता की सोनीपत के वृद्धाश्रम में हुई मौत - 3 बेटियों ने 5100 रुपये गूगल पे किए और बोली संस्कार की सारी वीडियो भेज देना*  महाराष्ट्र के मुंबई के रहने वाले मशहूर कपड़ा व्यापारी शिवचरण रामरत्न गुप्ता (74) की हरियाणा के सोनीपत में वृद्ध आश्रम में मौत हो गई। तीन साल से वे इस आश्रम में रह रहे थे। दो साल पहले इसी आश्रम में उनकी पत्नी ने अंतिम सांसें ली थीं। मंगलवार आश्रम स्टाफ ने उनकी मौत की जानकारी उनकी तीन टीचर बेटियों को दी। मगर, तीनों ने दूरी और समय का बहाना बनाकर अंतिम संस्कार में आने से मना कर दिया।* यही नहीं, 5100 रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कर अंतिम संस्कार सोनीपत में ही करने के लिए कहा। मुगाग्नि की बात आई तो तीनों ने कहा कि वीडियो कॉल पर दिखा देना। आश्रम संचालक आनंद कुमार के मुताबिक, एक पिता के प्रति उसकी संतानों की इस तरह की बेरुखी हमने आज तक नहीं देखी। बताया कि ​मोबाइल की स्क्रीन पर जब बेजान पिता का चे...

आप स्वयं चिंतनकरें 🙏

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🌼 जय श्रीकृष्ण🌼* ____________________   _*सब कुछ सीखना ही*_    *ज्ञान नहीं होता है,*_    *कुछ चीजों और बातों को*_    *नजरअंदाज करना भी*_       *ज्ञान ही है...*  *जीवन की किताबों पर,* *बेशक नया कवर चढ़ाइये;* *पर...बिखरे पन्नों को,* *पहले प्यार से चिपकाइये !!*____________________ *🔶♦️सुप्रभात♦️🔶*  🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 जीवन की सफलता क्या है? हमारे हृदय में सद्गुण आ जायँ, हमारे आचरण में सदाचार आ जाय, हमारा मुख भगवान की ओर मुड़ जाय! हमारे जीवन में दैवी गुण हो जाय और वह भगवदभजन की मूर्ती बन जाऐ 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 *कैसे होगा यह सब ?* *जैसे धरती में बोया गया बीज अपने समय पर ही अंकुरित होता है, और उसमें समय से ही फूल खिलते है, और फल भी समय से ही लगते हैं। वैसे ही हमारा शरीर भी एक क्षेत्र (खेत) हैं। जिसमें हम कर्मों के बीज बोते है। और कर्म बीज बन जाते है,, और समय आने पर ही सुख- और दुख रूपी फल के रूप में हमें मिलते है। बीज बोना ही केवल हमारे अधिकार में लेकिन फल कब, कहाँ, कैसे और किस रूप में मिलेगा यह किसी और के हाँथ में है। पहले ...