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श्रीकृष्ण गीता में जब कहते हैं कि "मैं वेदों में सामवेद हूं" तो वो ये भी कहते हैं कि हिंदू धर्म "गायन विधा" का धर्म है। श्रीकृष्ण गीता में जब कहते हैं कि "मैं धन का स्वामी कुबेर हूं" तो वो ये भी कहते हैं कि हिंदू धर्म "ऐश्वर्य और समृद्धि" का धर्म है। श्रीकृष्ण गीता में जब कहते हैं कि "कवियों में शुक्राचार्य कवि मैं ही हूं" तो वो ये भी कहते हैं कि हिंदू धर्म "काव्य" का धर्म है। श्रीकृष्ण गीता में जब कहते हैं कि "मैं स्त्रियों में कीर्ति, श्री, वाक, मेधा, धृति और क्षमा हूं" तो ये भी कहते हैं कि हिंदू धर्म "नारी" को सर्वोपरि मानने का धर्म है। श्रीकृष्ण गीता में जब कहते हैं कि "मैं ऋतुओं में वसंत हूं" तो ये भी कहते हैं कि हिंदू धर्म आनंद और उल्लास का धर्म है। श्रीकृष्ण गीता में जब कहते हैं कि "मैं जीतने वालों का विजय हूं" तो वो ये भी कहते हैं कि हिंदू धर्म केवल "विजय श्री" का वरण करने वालों का धर्म है पराजित होकर आंसू बहाने वालों का नहीं। श्रीकृष्ण गीता में जब कहते हैं कि "मै...