Posts

,ये दृढ़विश्वास है मेरा..

जब स्काई रूट के विक्रम1 को लांच किया जा रहा था ..तब  इसरो के सम्मानित वैज्ञानिक के बीच शुभांशू शुक्ला जी नजर आएं...हमारे अंतरिक्ष यात्री... इस तस्वीर की पता है खास बात क्या है,विज्ञान की जीत के लिए कोई ट्रेंड पायलट जो जीवन पर्यन्त भौतिकी और गणित के नियमों से चला है,वो हाथ जोड़े इस प्रोजेक्ट की सफल होने की प्रार्थना कर रहा था... हजार स्वार्थी देश को तोड़ने वाली तस्वीरों के बीच अपने देश के लिए प्रार्थना करता हुआ ये दृश्य विशाल  हिमालय सा दिखता है....इस देश को तोड़ने का सपना लिए अगर हजार हाथ हैं तो इस देश को बचाने के लिए ऐसे जाने कितने अनगिनत हाथ देश के कोने कोने में है,ये दृढ़विश्वास है मेरा..

ईश्वर का शुक्रिया करने के लिए 10 नायाब कारण:*

Image
* ईश्वर का शुक्रिया करने के लिए 10 नायाब कारण:* 1. *टायर चलने पर घिसते हैं, लेकिन पैर के तलवे जीवनभर दौड़ने के बाद भी नए जैसे रहते हैं।*   2. *शरीर 75% पानी से बना है, फिर भी लाखों रोमकूपों के बावजूद एक बूंद भी लीक नहीं होती।*   3. *कोई भी वस्तु बिना सहारे नहीं खड़ी रह सकती, लेकिन यह शरीर खुद को संतुलित रखता है।*   4. *कोई बैटरी बिना चार्जिंग के नहीं चलती, लेकिन हृदय जन्म से लेकर मृत्यु तक बिना रुके धड़कता है।* 5. *कोई पंप हमेशा नहीं चल सकता, लेकिन रक्त पूरे जीवनभर बिना रुके शरीर में बहता रहता है।*   6. *दुनिया के सबसे महंगे कैमरे भी सीमित हैं, लेकिन आंखें हजारों मेगापिक्सल की गुणवत्ता में हर दृश्य कैद कर सकती हैं।*   7. *कोई लैब हर स्वाद टेस्ट नहीं कर सकती, लेकिन जीभ बिना किसी उपकरण के हजारों स्वाद पहचान सकती है।*   8. *सबसे एडवांस्ड सेंसर भी सीमित होते हैं, लेकिन त्वचा हर हल्की-से-हल्की संवेदना को महसूस कर सकती है।*   9. *कोई भी यंत्र हर ध्वनि नहीं निकाल सकता, लेकिन कंठ से हजारों फ्रीक्वेंसी की आवाजें पैदा हो सकती ह...

भगवान और भक्त के अटूट प्रेम और विश्वास🙏

Image
* यह कथा भगवान और भक्त के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। जब महाराज पुरुषोत्तम देव कांची अभियान पर थे, तब स्वयं भगवान जगन्नाथ और बलभद्र गुप्त रूप से उनकी सहायता के लिए जा रहे थे। रास्ते में माणिकी नाम की एक निर्धन ग्वालन से उन्होंने दही पिया*। *अपनी दैवीय लीला के कारण उनके पास धन नहीं था, इसलिए उन्होंने मूल्यवान रत्नजड़ित मुद्रिका (अंगूठी) माणिकी को दी और कहा कि पीछे आ रहे राजा से इसका मूल्य ले लेना। जब राजा ने वह अंगूठी देखी, तो वे भाव-विभोर हो गए क्योंकि वह साक्षात भगवान की मुद्रिका थी*। मुख्य संदेश: *ईश्वर भाव के भूखे हैं: भगवान धन या वैभव नहीं, बल्कि भक्त का शुद्ध प्रेम और निस्वार्थ सेवा देखते हैं*। *भक्त का ऋण: भगवान अपने भक्त के प्रेम का कर्ज कभी शेष नहीं रखते; वे स्वयं को भक्त का 'ऋणी' मानकर उसे मान और मोक्ष प्रदान करते हैं*। *अमरता: माणिकी के इसी निस्वार्थ प्रेम के कारण आज भी उस स्थान को 'माणिकापाटना' कहा जाता है और जगन्नाथ जी के भोग में वहाँ के दही का विशेष स्थान है*।

भगवान् जगन्नाथ के रथो का संक्षिप्त वर्णन*

Image
*भगवान् जगन्नाथ के रथो का संक्षिप्त वर्णन*   भगवान जगन्नाथ जी का रथ    1.रथ का नाम 👉 नंदीघो  2. कुल काष्ठ की संख्या 👉 832 3. कुल चक्के 👉 16    4.रथ की ऊंचाई 👉45 फीट  5. रथ की लम्बाई चौड़ाई 👉 34 फीट 6 इंच    6.सारथि 👉 दारुक 7. रथ का रक्षक 👉 गरुड़    8.रस्से का नाम 👉 शंखचूड    नागुनी 9. पताका का रंग 👉 त्रै लोक्य मोहिनी 10. रथ के  घोड़ों का नाम 👉 वराह, गोवर्धन, कृष्णा, गोपीकृष्ण, न्रसिंह, राम, नारायण, त्रिविक्रम, हनुमान,रूद्र। बलदेव जी का रथ 〰️〰️〰️〰️〰️〰️    1.रथ का नाम 👉 ताल ध्वज    2.कुलकाष्ठ संख्या 👉 763    3.कुल चक्के 👉 14 4. रथ की ऊंचाई 👉 44 फीट 5. रथ की लम्बाई चौड़ाई 👉 33 फीट 6. सारथि 👉 मातली    7.रथ के रक्षक 👉 वासुदेव 8. रस्से का नाम 👉  बासुकी नाग    9.पताका का रंग 👉 उन्नानी 10.रथ के घोड़ों के नाम👉  तीव्र ,घोर, दीर्घाश्रम, स्वर्ण नाभ ।। सुभद्रा जी का रथ 〰️〰️〰️〰️〰️〰️ 1. रथ का नाम 👉 देव दलन 2. कुल काष्ठ 👉 593 3. कुल चक्के 👉 16 ...

कुछ अलग बातें

Image
👈 * मुझे यह इतना दिलचस्प लगा कि अगर आपने इसे नहीं पढ़ा तो यह सच में शर्म की बात होगी:* कई बीमारियाँ असल में बीमारियाँ नहीं होतीं, बल्कि उम्र बढ़ने का एक नैचुरल प्रोसेस होता है। एक हॉस्पिटल डायरेक्टर ने बुज़ुर्गों को यह सलाह दी: आप बीमार नहीं हैं, आप बूढ़े हो रहे हैं। कई ऐसी स्थितियाँ जिन्हें आप बीमारी समझते हैं, असल में बीमारी नहीं होतीं, बल्कि आपके शरीर की उम्र बढ़ने के लक्षण होती हैं। 1. कमज़ोर याददाश्त ज़रूरी नहीं कि अल्ज़ाइमर हो; यह बूढ़े होते दिमाग का एक प्रोटेक्टिव मैकेनिज़्म है। यह दिमाग की उम्र बढ़ने की निशानी है, कोई बीमारी नहीं। अगर आप अपनी चाबियाँ खो देते हैं और बाद में पाते हैं, तो यह डिमेंशिया नहीं है। 2. धीरे चलना और पैरों या तलवों का डगमगाना पैरालिसिस नहीं, बल्कि मसल्स की कमज़ोरी है। इसका सॉल्यूशन दवा नहीं, बल्कि लगातार हिलना-डुलना है। 3. इंसोम्निया कोई बीमारी नहीं है, बल्कि दिमाग के रूटीन में बदलाव है। यह नींद के पैटर्न को बदल देता है। नींद की गोलियाँ न लें। लंबे समय तक उन पर डिपेंड रहने से गिरने और दिमागी तौर पर कमज़ोर होने का खतरा बढ़ जाता है। बुज़ुर्गों ...

कासा वाटी

कासा वाटी पैरों के तलवों पर कांसे धातु की टूल, या कासा कटोरी भी ले सकते हैं,  से मालिश करना एक प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति है, जिसे कांसा वाटी मसाज कहा जाता है।  यह मालिश सिर्फ आराम ही नहीं देती, बल्कि इसके कई गहरे शारीरिक और मानसिक फायदे भी हैंl कांसे की धातु, जो तांबे और टिन का मिश्रण होती है, आयुर्वेद में इसके औषधीय गुणों के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह मालिश शरीर के ऊर्जा बिंदुओं (मर्म) को उत्तेजित करती है, जिससे कई लाभ होते हैं। कांसे की कटोरी से मालिश के फायदे  शरीर की गंदगी (टॉक्सिन) बाहर निकालना कांसे की धातु में शरीर की गर्मी और विषाक्त पदार्थों (toxins) को खींचने का गुण होता है। जब तलवों पर तेल या घी लगाकर कांसे की कटोरी से मालिश की जाती है, तो कटोरी का निचला हिस्सा धीरे-धीरे काला या भूरा हो जाता है। यह इस बात का संकेत माना जाता है कि कटोरी शरीर से जमी हुई गंदगी को बाहर निकाल रही है।   तनाव और थकान दूर करना  पैरों के तलवों में हजारों तंत्रिकाएं (nerves) होती हैं। मालिश करने से ये तंत्रिकाएं शांत होती हैं, जिससे पूरे शरीर को गहरा आराम मिल...