"उपवास"🙏
*🌴२३ अगस्त २०२६ रविवार 🌴* *श्रावण शुक्लपक्षएकादशी २०८३* ➖➖➖➖‼️➖➖➖➖ *‼️ऋषि चिंतन ‼️* ➖➖➖➖‼️➖➖➖➖ *❗➖धार्मिक उपवास➖❗* *➖और➖* *➖ ‼️आत्मा की पवित्रता ‼️➖* ➖➖➖➖‼️ ➖➖➖³ 👉 *"उपवास" द्वारा मनुष्य की "नैतिक" और "आध्यात्मिक" उन्नति होती है, उसकी बुद्धि और विवेक जाग्रत होता है, यह देखकर ही हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने धर्म के अंतर्गत उपवास को विशेष स्थान प्रदान किया है।* इससे मनुष्य के मानसिक और 1¹आ प्रकार के उपवासों का ही विधान नहीं, प्रत्युत बहुकाल व्यापी उपवासों का विधान है।* जैनियों के उपवास सप्ताहों और महीनों तक चलते हैं। *मिश्र में प्राचीन काल में कई धार्मिक पर्वों पर "उपवास" किया जाता था, किंतु वह जन-साधारण के लिए अनिवार्य नहीं था। "यहूदी" अपने सातवें महीने के दसवें दिन "उपवास" रखते हैं।* उनके धर्म में जो इस उपवास का उल्लंघन करता है, वह दंडनीय है। इसके अंतर्गत प्रातः से सायंकाल तक निराहार रहना पड़ता है। ईसाई धर्म में तथा ईसा की पाँचवीं शताब्दी से पूर्व महात्मा सुकरात न...