कुछ संदेश🙏
एक पक्षी ने एक ही प्रश्न तीन बार पूछा, और उत्तर में आयुर्वेद का पूरा सार छिपा था।
आयुर्वेद परंपरा के अनुसार, आचार्य वाग्भट के आश्रम में एक प्रातः एक तेजस्वी पक्षी आकर बैठा और पूछने लगा, "कोऽरुक्?" अर्थात रोग से मुक्त कौन है? शिष्यों ने औषधियाँ और रसायन गिनाए, परंतु पक्षी वही प्रश्न दोहराता रहा। तब आचार्य ने तीन शब्दों में उत्तर दिया: हितभुक्, मितभुक्, ऋतभुक्।
जो हितकारी भोजन करे, जो सीमित मात्रा में करे, और जो सत्य से अर्जित अन्न खाए। यही वाग्भट अष्टांग हृदय के रचयिता हैं।
: *दांत चाहे कितनी भी बार जीभ को काटे फिर भी वे दोनों साथ रहते हैं, और साथ काम करते हैं,*
*यही क्षमा व संबंध की भावना है.!!*
*नेकियाँ करते रहिये क्योंकि ये हमारी जीवन की सुरक्षा निधि है।*
*हमारे जीवन में जब भी कभी तूफान आएगा, तो यही नेकियाँ हमारे लिए कश्ती का काम करेंगी....!*
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*मुस्कराना जिन्दगी का वो खुबसूरत लम्हा है ...*
*जिसका अंदाज सब रिश्तो से अलबेला है ...*
*जिसे मिल जाये वो तन्हाई में भी खुश...*
*और जिसे न मिले वो भीड़ में भी अकेला है,,,*
::::: *मुस्काते रहें ::::😀*
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*🌹सुप्रभात🌹*
*🙏🏼 आपका दिन शुभ और मंगलमय हो 🙏🏼*
🙏🏻राधे राधे🙏🏻*
*देने वाला हमेशा सर्वश्रेष्ठ होता है...*
*चाहे वो समर्थन हो या विपरीत समय में मदद का हाथ...!!*
*🌹सुप्रभात🌹*
*🌺🌺लाला🌺🌺*
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