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सनातन संस्कार

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जब भी कोई पैर छुए तो आपको क्या करना चाहिए 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ पुराने समय से ही परंपरा चली आ रही है कि जब भी हम किसी विद्वान व्यक्ति या उम्र में बड़े व्यक्ति से मिलते हैं तो उनके पैर छूते हैं। इस परंपरा को मान-सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। ये बात तो सभी जानते हैं कि बड़ों के पैर छूना चाहिए, लेकिन जब कोई हमारे पैर छुए तो हमें क्या-क्या करना चाहिए? इस परंपरा का पालन आज भी काफी लोग करते हैं। चरण स्पर्श करने से धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों तरह के लाभ प्राप्त होते हैं। जब भी कोई व्यक्ति चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, हमारे पैर छुए तो उन्हें आशीर्वाद तो देना ही चाहिए, साथ ही भगवान या अपने इष्टदेव को भी याद करना चाहिए। आमतौर पर हम यही प्रयास करते है कि हमारा पैर किसी को न लगे, क्योंकि ये अशुभ कर्म माना गया है। जब कोई हमारे पैर छूता है तो हमें इससे भी दोष लगता है। इस दोष से बचने के लिए मन ही मन भगवान से क्षमा मांगनी चाहिए। शास्त्रों में लिखा है कि- अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविन:। चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्।। इस श्लोक का अर्थ यह है कि जो व्यक्ति रोज बड़े-बुजुर्गों के सम्मान...

कुछ मशहूर डायलाग---

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पुरानी हिन्दी फिल्मों के कुछ मशहूर डायलाग--- 1. बेटा, हाथ मुंह धो ले , तब तक मैं खाना लगाती हूं। 2:मैंने इंजेक्शन दे दिया है , कल सुबह तक इन्हें होश आ जाएगा । 3. अगले 24घंटे नाजुक हैं , भगवान से प्रार्थना करिए । 4. ये तो खुशी के आंसू हैं बेटा । 5.ये लो ब्लैंक चेक , अपनी कीमत लिख लो और मेरी बेटी को भूल जाओ । 6. मीट माई सन विक्की, आज ही विलायत से पढ़ाई पूरी करके लौटा है । 7.एहसान कैसा मांजी , यह तो मेरा फर्ज था । 8.मैं उस लड़की का गरूर तोड़ कर रहूंगा । 9. यह अदालत जज्बातों से नहीं सबूतों से चलती है । 10.मेरे फाजिल दोस्त अदालत का कीमती वक्त जाया कर रहे हैं मी लार्ड। 11..ड्राईवर , उस गाड़ी का पीछा करो । 12.मैं इधर से गुजर रहा था सोचा आपसे मिलता चलूं । 13. इनसे मिलिए शहर के जाने माने बिजनेसमैन । .14.सारे सबूतों और गवाहों के बयानों के मद्देनजर अदालत इस नतीजे पर पहुंची है कि.... 15. मैं तुम्हारे बच्चे की मां बनने वाली हूं । 16. पता नहीं यह किसका पाप है.... 17आप इन्हें सही समय पर ले आए हैं अगर थोड़ी देर और हो जाती तो इनका बचना मुश्किल था। 18. हमने तुम्हें चारों तरफ से घेर लिया है ख...

कौन सी धातु के बर्तन

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कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है? ★ सोना :- सोना एक गर्म धातु है। सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है। ★ चाँदी :- चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है। शरीर को शांत रखती है इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है। ★ कांसा :- काँसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है। लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है। कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल ३ प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं। ★ तांबा :- तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होत...

प्रभु कृपा *🙏

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🌹🚩* प्रभु कृपा *   *प्रभु कृपा का स्वरूप भौतिक उन्नति नहीं है। प्रायः लोग भौतिक सुख साधनों की प्राप्ति को ही प्रभु कृपा समझते हैं। किसी सुख-साधन सम्पन्न व्यक्ति के बारे में लोग यही कहते हैं कि भगवान की उसके ऊपर बड़ी कृपा है जो उसके लिए इतना सब कुछ दिया !* *कृपा अर्थात बाहर की प्राप्ति नहीं अपितु भीतर की तृप्ति है। किसी को भौतिक सुखों की प्राप्ति हो जाना यह कृपा हो ना हो मगर किसी को वह सब कुछ प्राप्त ना होने पर भी भीतर एक तृप्ति बनी रहना यह अवश्य उस प्रभु की बहुत बड़ी कृपा है। जिस हृदय में प्रभु नहीं बसते उस हृदय में सदैव रिक्तता बनी रहेगी।=जिस हृदय में श्रीकृष्ण हों वहाँ भला रिक्तता कैसी ? वहाँ तो आनंद ही आंनद होता है।*  *आपके पुरुषार्थ से और प्रारब्ध से आपको प्राप्ति तो संभव है मगर तृप्ति नहीं। तृप्ति तो केवल और केवल प्रभु कृपा से ही संभव है। अतः भौतिक जगत में ज्यादा कुछ प्राप्त हो ना हो पर किसी के जीवन में भीतर की तृप्ति है तो उस प्रभु की सबसे बड़ी कृपा समझनी चाहिए*।     🌹🚩सनातन शिक्षा

Animals Vs Humans

We tend to think animals are lower than us, but all the scientists in the world couldn’t design and operate a bumblebee’s wing. We can’t jump or run very fast, and we can’t carry vast weights like an ant can. We can’t see in the dark and we can’t fly except crammed in a noisy tube like sardines, which doesn’t count. Humans compared to animals are almost totally deaf, and we can’t smell a fart in an elevator by their standards. We are finite and separate, and neurotic, while the consciousness of an animal is at peace and eternal. We strive and go crazy to become more important. Animals rest and sleep and enjoy the company of each other. We think we have evolved upwards from animals but we have lost almost all of their qualities and abilities. The idea that animals don’t have consciousness or that they don’t have a soul is rather crass. It shows a lack of consciousness. They talk, they have families, they feel things, they act individually or together to solve problems, they often care o...