प्रभु कृपा *🙏
*प्रभु कृपा का स्वरूप भौतिक उन्नति नहीं है। प्रायः लोग भौतिक सुख साधनों की प्राप्ति को ही प्रभु कृपा समझते हैं। किसी सुख-साधन सम्पन्न व्यक्ति के बारे में लोग यही कहते हैं कि भगवान की उसके ऊपर बड़ी कृपा है जो उसके लिए इतना सब कुछ दिया !*
*कृपा अर्थात बाहर की प्राप्ति नहीं अपितु भीतर की तृप्ति है। किसी को भौतिक सुखों की प्राप्ति हो जाना यह कृपा हो ना हो मगर किसी को वह सब कुछ प्राप्त ना होने पर भी भीतर एक तृप्ति बनी रहना यह अवश्य उस प्रभु की बहुत बड़ी कृपा है। जिस हृदय में प्रभु नहीं बसते उस हृदय में सदैव रिक्तता बनी रहेगी।=जिस हृदय में श्रीकृष्ण हों वहाँ भला रिक्तता कैसी ? वहाँ तो आनंद ही आंनद होता है।*
*आपके पुरुषार्थ से और प्रारब्ध से आपको प्राप्ति तो संभव है मगर तृप्ति नहीं। तृप्ति तो केवल और केवल प्रभु कृपा से ही संभव है। अतः भौतिक जगत में ज्यादा कुछ प्राप्त हो ना हो पर किसी के जीवन में भीतर की तृप्ति है तो उस प्रभु की सबसे बड़ी कृपा समझनी चाहिए*।
🌹🚩सनातन शिक्षा
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