जैसा अन्न वैसा मन..
🌿🌿रसोई बनाने के कुछ नियम😊😊 गुस्से से अगर भोजन बनाया गया है तो उसे सात्विक अन्न नही कहेंगे, इसलिए भोजन बनाने वालों को कभी भी नाराज,परेशान स्थिति में भोजन नही बनाना चाहिए। और कभी भी माँ, पत्नी, बहनों को (या जो भोजन बनाते है उनको) डांटना नहीं, उनसे कभी लड़ना नहीं क्योंकि वो रसोईघर में जाके और आपके ही भोजन में गुस्से वाली Vibrations मिला के..... आपको ही एक घंटे में खिलाने वाले है... ये ध्यान में रखने वाली अत्यन्त ही महत्वपूर्ण बात है। किसी को डांट दो, गुस्सा कर दो और बोलो जाके खाना बनाओ.....अब....? खाना तो हाथ बना रहा है... मन क्या कर रहा है... अन्दर मन तो लगतार खिन्न है -......तो वो सारे प्रभाव खाने के अंदर जा रहे है.. भोजन तीन प्रकार का होता है- 1. जो हम होटल में खाते है 2. जो घर में माँ (कोई भी स्त्री)बनाती है और 3. जो हम मंदिर और गुरूद्वारे में खाते है तीनो के प्रभाव अलग अलग होते हैं । (1) जो Hotel में खाना बनाते है उनके Vibration कैसे होते है आप खाओ और हम कमायें जो ज्यादा बाहर खाता है ... असल मे उनका रोज़ रोज़ बाहर खान...