Posts

*!! चार आने का हिसाब !!

2️⃣7️⃣❗0️⃣6️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣5️⃣ *♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*         *!! चार आने का हिसाब !!* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ बहुत समय पहले की बात है, चंदनपुर का राजा बड़ा प्रतापी था। दूर-दूर तक उसकी समृद्धि की चर्चाएं होती थी, उसके महल में हर एक सुख-सुविधा की वस्तु उपलब्ध थी पर फिर भी अंदर से उसका मन अशांत रहता था। बहुत से विद्वानों से मिला, किसी से कोई हल प्राप्त नहीं हुआ.. उसे शांति नहीं मिली। एक दिन भेष बदल कर राजा अपने राज्य की सैर पर निकला। घूमते- घूमते वह एक खेत के निकट से गुजरा, तभी उसकी नज़र एक किसान पर पड़ी, किसान ने फटे-पुराने वस्त्र धारण कर रखे थे और वह पेड़ की छाँव में बैठ कर भोजन कर रहा था। किसान के वस्त्र देख राजा के मन में आया कि वह किसान को कुछ स्वर्ण मुद्राएं दे दे ताकि उसके जीवन में कुछ खुशियां आ पाये। राजा किसान के सम्मुख जा कर बोला- मैं एक राहगीर हूँ, मुझे तुम्हारे खेत पर ये चार स्वर्ण मुद्राएँ गिरी मिलीं, चूँकि यह खेत तुम्हारा है इसलिए ये मुद्राएं तुम ही रख लो। किसान ना - ना सेठ जी, ये मुद्राएं मेरी नहीं हैं, इसे आप ही रखें या किसी और को दान कर दें, मुझे इनकी कोई...

अगेठा है!

ये अगेठा है!  कुछ अगेठे दीवार खोदकर बनाये जाते हैं। पहले के समय में मिट्टी से दीवार बनाई जाती थी जो काफी मोटी होóती थी उन दीवारों को खोदकर अगेठा बना दिया जाता था।  कुछ लोग चिकनी मिट्टी से बनाया करते थे।    अंगेठा के नीचे की सतह में राख और आग रहती थी और उपर बरतन रखा जाता था। अंगेठा के उपरी भाग में छोटे छोटे छेद किए जाते थे ताकि धुआं निकल सके और अंगेठा में रखे दूध या भोजन में धुएँ की सुगंध न बस सके।    इस अंगेठा को ढंकने के लिए मिट्टी का ही ढक्कन बनाया जाता था जिसे पिहाना कहा जाता था।    इस अंगेठा में सुबह ही उपले रखकर आग बना दी जाती थी ताकि अच्छी तरह से आग बन सके और धुआं निकल जाए उसके बाद गाय भैंसों से दूध निकाल कर छानकर दूध रखने के मिट्टी के बरतन में जिसे दूधहांडी कहते थे रखकर दूध गर्म होने के लिए रख दिया जाता था।    ये दूध पूरा दिन इस अगेठे में गर्म होता रहता था। अगेठे में आग कम होने लगती थी तो फिर से कुछ उपले के टुकड़े डाल दिए जाते थे।  धीमी धीमी आँच में सारा दिन गर्म हुआ दूध एकदम लाल हो जाता था और उसमे से एक अद्भुत सी सुगंध आने ल...