बुजुर्ग अब बदलने लगे हैं।
[जीवन में बहुत सी बातें समझ से परे होती है..
जैसे पहाड़ कठोर है, इसलिए नदियाँ
उनको छोड़ गई, या नदियाँ छोड़ गई
इसलिए पहाड़ कठोर है..🙏
बुजुर्ग अब बदलने लगे हैं।
अब लोग बुढ़ापा एंजॉय करने लगे हैं।
खुल कर जीने और हंसने लगे हैं।
खुद को पोते पोतियों में नहीं उलझाते हैं।
अपने जैसे दोस्तों के संग ये वक्त बिताते हैं।
कोई लाचारी बेबसी अब नहीं दिखती हैं।
इनकी जिंदगी इनकी शर्तो पर गुजरती हैं ।
कभी ये गाने गाते,कभी ठुमके लगाते हैं।
कभी रामपुर कभी ब्लू लेबल भी लगाते हैं।
कभी क्रूज पर, कभी विदेश में छुट्टियां मनाते हैं।
अपनी कहानी सुनाते,खुल कर मुस्कुराते हैं।
इनकी किट्टियां होती हैं,जन्मदिन मनाते हैं ।
अपनी पेंशन खुद पर ही ये लुटाते हैं ।
ना ताना मारते ना बहुओं की सुनते हैं।
अपने अधूरे सपने इस उम्र में बुनते हैं।
फेस बुक यू ट्यूब के ये दीवाने होते हैं।
इनके भी किस्से फंसाने होते हैं।
इनको भी दोस्तों का इंतजार होता है।
पार्क में रोज जमघटे यार होता है।
अब के बुजुर्ग समझने लगे हैं।
जिंदगी के बचे लम्हें जीने लगे हैं।
समझ गए साथ कुछ नहीं जाने वाला
तो खुशनुमा लम्हें ये सहेजने लगे हैं।
Aaj ke Senior Gen Z😊😊
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