जियो दिल से
यह मैंने नहीं लिखा है लेकिन मुझे पसंद आया इसलिए आगे बढ़ा रहा हूं। मैं, जितने साल जी चुका हूँ, उससे अब कम साल मुझे जीना है। यह समझ आने के बाद मुझमें ये परिवर्तन आये है : १. किसी प्रियजन की विदाई से अब मैं निराश होकर रोना छोड़ चुका हूँ ।रोता हूं लेकिन बस रोना ही रोना इसे नियंत्रित कर चुका हूं क्योंकि आज नहीं तो कल मेरी बारी है। २. इसी प्रकार,अगर मेरी विदाई अचानक हो जाती है, तो मेरे बाद लोगों का क्या होगा, मेरी संपत्ति का क्या होगा ।इन बातों की चिंता अब मुझे नहीं होती। ३. सामने वाले व्यक्ति के पैसे, पावर और पोजीशन से अब मैं डरता नहीं हूँ। ४. खुद के लिए सबसे अधिक समय निकालता हूँ। दुनिया मेरे कंधों पर नहीं टिकी है यह मैं जान व मान चुका हूं । मेरे बिना कुछ भी नहीं रुकने वाला है। ५. छोटे व्यापारियों और फेरी वालों के साथ मोल-भाव करना बंद कर दिया है। कभी-कभी जान कर भी अनजान बन जाता हूं व थोड़ा ठगे जाने का ग़म नहीं होता । ६. कबाड़ उठाने वालों को फटी या खाली तेल की डिब्बी ,कबाड़ फ्री में दे देता हूँ, जब उनके चेहरे पर लाखों मिलने की खुशी देखता हूँ तो खुश हो जाता हूँ। ...