उस पार साजन इस पार धारे...

*🌿 श्री कृष्ण कहते हैं 🌿*  
✨ "यदि कोई तुम्हें *अच्छा* लगता है..!!  
तो अच्छा वो नहीं,  
अच्छे *तुम* हो..!!  
क्योंकि उसमें *अच्छाई* देखने वाली *नज़र*  
तुम्हारे पास है..!!" 🌸  
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🙏💞जय श्रीकृष्णा💞🙏*
     *🙏💞राधे राधे💞🙏*
बात जब सुकून की छेड़ी जाती है,
हमें बस चाय ही चाय याद आती है।
#सुप्रभात☕


उस पार साजन इस पार धारे...
ले चल ओ माझी किनारे किनारे....
ले चल ओ माझी किनारे.....
आज गीतकार हसरत जयपुरी की 27 वीं पुण्यतिथि पर
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बचपन में अपने गृह नगर छतरपुर की गोवर्धन टाकीज में एक फिल्म देखी थी -  "चोरी चोरी" । राज कपूर , नरगिस , गोप, प्राण, जॉनीवाकर , भगवान दादा और राजा सुलोचना जैसे बड़े कलाकारों , शंकर जयकिशन के संगीत , शैलेंद्र और हसरत जयपुरी के एक से बढ़कर खूबसूरत गीतों से सजी एवीएम प्रोडक्शन मद्रास की यह फिल्म अपने दौर की जबरदस्त हिट फिल्म थी । इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात  से लगाया जा सकता है कि दर्शकों की बेहद मांग पर हमारे छोटे से नगर छतरपुर की इकलौती "गोवर्धन टाकीज" में यह फिल्म  10 साल के बाद दोबारा लगी थी । मुझे आज भी याद है तब इस फिल्म के कई गीत जैसे "पंछी बनूं उड़ती फिरूं मस्त गगन में ",  "आ जा सनम मधुर चांदनी हम", "ये रात भीगी भीगी ये मस्त फिजाएं ", "जहां मैं जाती हूं वहीं चले आते हो " ,रसिक बलमा दिल क्यों लगाया तोसे" आदि हर किसी की जुबान पर तैर रहे थे । लेकिन इतने सारे अच्छे गीतों के बीच इस फिल्म के एक अन्य गीत ने मेरे बाल मन में खास जगह बनाई  जो दरअसल  गोवा  के मछुहारों की एक लोक धुन / गीत पर आधारित था और जिसके बोल थे ...

उस पार साजन इस पार धारे
ले चल ओ माझी किनारे किनारे
ले चल ओ माझी किनारे

 इस लोक गीत की आत्मा को बनाए रखने  के लिए उसके  कुछ शब्दों को शंकर जयकिशन ने ज्यों का त्यों  रखते हुए हसरत जयपुरी से  गीत लिखने को कहा । कोरस में गाए उन शब्दों का मतलब भी समझ में नहीं आता तब भी ये गीत अपनी प्यारी धुन और लता जी की मोहक आवाज  हमारे दिलों में अलग ही रागात्मक असर घोलती है I इस गीत की  चमक आज लगभग  70 वर्ष का लंबा अरसा गुजर जाने के बाद भी ज्यों की त्यों  बरकरार है  । जब भी मौका मिलता है इसे जरूर सुनता हूं । इस गीत को अगर हम ध्यान से सुने तो इस गीत की आत्मा के साथ शंकर जयकिशन के अनन्य सहयोगी दत्ताराम का ठेका रचा बसा हुआ है । उनके ठेके की ताल पर न जाने ऐसे कितने गीत शैलेंद्र और हसरत जयपुरी ने तब लिख डाले थे । संगीतकार शंकर जयकिशन जी के आभा मंडल में हिंदी फिल्म संगीत में उनके योगदान को बिसरा दिया गया ।  

यहां उल्लेखनीय है कि इस  गीत दृश्य में घर से भागी फिल्म की नायिका  नरगिस एक सिद्धहस्त तैराक की तरह  किश्ती के पीछे तैरती दिखाई दे रहीं हैं । दूसरी तरफ इस बात से बेखबर  तमिल और तेलुगु फिल्म की लोकप्रिय और चित्ताकर्षक अभिनेत्री "साईं"  सभी संगी साथी मछुवारों के साथ गा  रही है .....

नोट: नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके इस गीत के रंगीन वर्सन का आनंद लिया जा सकता है ....

https://youtu.be/kIBYxK0iKSU?si=EwY2UgC39FOdZast

ओ टिमका टिमा टिमभा
काहे करे अचम्भा
ओ टिमका टिमा टिमभा
ओ टिम का टिमा टिमभा
काहे करे अचम्भा
ओ टिमका टिमा टिमभा 
उस पार साजन इस पार धारे
ले चल ओ माझी किनारे किनारे
ले चल ओ माझी किनारे
उस पार साजन इस पार धारे
ले चल ओ माझी किनारे किनारे
ले चल ओ माझी किनारे
ओ कोडिया कोडिया
कवलानी कवलानी
ओ कोडिया कोडिया
कवलानी कवलानी……….

दूर यहाँ से गाँव पिया का (2)
हाल ना पूछे कोई जिया का (2)
गहरा सागर और मैं अकेली
सूझे ना कोई सहारे सहारे
ले चल ओह माझी किनारे
ओ टिमका टिमा टिमभा
गेंजी गेंजी गंज गांजादा
टिमभा टिमभा………..

लहरें देखूं दिल लहराए (2)
जल दरपन में पी मुस्काये (2)
प्यासी अँखियाँ दोनों ये सखियाँ
हरदम करे है इशारे इशारे
ले चल ओ माझी किनारे
उस पार साजन इस पार धारे
ले चल ओ माझी किनारे किनारे
ले चल ओ माझी किनारे…………

ओ टिमका टिमा टिमभा
काहे करे अचम्भा
ओ टिमका टिमा टिमभा
ओ टिमका टिमा टिमभा
काहे करे अचम्भा
ओ टिमका टिमा टिमभा
ओ टिमका टिमा टिमभा
काहे करे अचम्भा
ओ टिमका टिमा टिमभा
ओ टिमका टिमा टिमभा
काहे करें अचम्भा
ओ टिमका टिमा टिमभा…………

फिल्म: चोरी चोरी (1956)
गायक: लता मंगेशकर
संगीतकार: शंकर-जयकिशन
गीतकार:  हसरत जयपुरी

------ कृष्ण कुमार शर्मा: 17 सितंबर 2026 ------

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