चौंकाने वाला सर्वे रिपोर्ट*

*खतरनाक चिंताजनक चौंकाने वाला सर्वे रिपोर्ट*
* कुंवारेपन का विस्फोट, समाज अंधी दौड़ में कहाँ पहुँच रहा है ? सोचिए ज़रा ।
अब वक्त आ गया है कि चीज़ों को मीठे शब्दों में कहना बंद किया जाए।
* दुनिया जिस महिला आज़ादी की जय-जयकार कर रही है, वही आज़ादी धीरे-धीरे *परिवार, रिश्तों, और सामाजिक संतुलन, सब कुछ निगलने लगी है।*
 *अंतरराष्ट्रीय सर्वे कहता है कि आने वाले कुछ वर्षों में युवतियों में 45% तक विवाह से दूरी बना सकती हैं। पहली नज़र में यह प्रगति लगती है, पर असल में यह भविष्य के लिए एक टाइम-बम है।*
1. कैरियर, पैसे और अकेलापन यह कैसी प्रगति ? आज की बेटी कलेक्टर डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, टीचर उद्यमी, सब बन रही है। बहुत अच्छा। शानदार। पर क्या कैरियर पूरा जीवन है ?
2. जरा सोचे. पैसा साथी नहीं बनता। पद वृद्धावस्था में हाथ नहीं पकड़ता। मोबाइल और लैपटॉप बुढ़ापे में बात नहीं करते। लेकिन समाज को इस सच्चाई से फर्क नहीं पड़ता, सबको दौड़ लगानी है।
3. परिवार ढह रहे हैं कोई देख भी रहा है ?
4. कुँवारे लड़के बढ़ रहे हैं, अविवाहित युवतियाँ बढ़ रही हैं, जनसंख्या गिर रही है, और अकेलेपन उद्योग (counsellor, therapy, depressionहै, और अकेलेपन उद्योग (counsellor, therapy, depression pills) फल-फूल रहा है। पर हम फिर भी कहते हैं, सब ठीक है, यह आधुनिकता है। यह आधुनिकता नहीं, धीमी मौत है, परिवार, समाज और मानवीय संबंधों की।
5. सर्वाधिक खतरनाक स्थिति आज माता-पिता रिश्ता ढूंढते हैं, पर लड़की कहती है, अभी नहीं। फिर अभी नहीं धीरे-धीरे कभी नहीं में बदल जाता है और जब एहसास होता है तो मेडिकल रिपोर्ट सामने होती है, हार्मोनल इश्यू, कंसिव न होना, मानसिक तनाव, अकेलापन। पर तब कौन जिम्मेदार ? कोई नहीं, क्योंकि फैसला स्वतंत्रता का था।
6. समाज के सफेदपोश लोग चुप क्यों हैं ? क्योंकि सच्चाई बोलने से उन्हें आधुनिकता-विरोधी कहलाने का डर है। पर सच्चाई यह है कि अगर 21-25 की उपयुक्त उम्र में विवाह नहीं हुए तो समाज जल्द ही दिसंबर की ठंडी रात जैसा सूना हो जाएगा।
7. एक अनुमान के अनुसार 2047 तक भारत के विकसित राष्ट्र बनने तक भारत बूढ़ों का दैश हो जायेगा। मोदी जी जिस भारत को युवाओं का देश बताते हैं, आगामी 20 वर्षों में अप्रत्याशित रूप से युवाओं की संख्या कम हो जायेगी।कम हो जायेगी
8. अंतिम बात प्रगति वो नहीं जो हमें अकेला कर दे। *अगर हमारा भविष्य कुंवारा, अकेला और भावहीन होने वाला है, तो समाज के लिए यह गर्व की नहीं, खतरे की घंटी है। विचार अवश्य किजिए।*
         
 *जयहिंद  - वंदेमातरम्*

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