तो काळ असा होता"*की *हिंदी अनुवाद* ये रहा 👇
हां जी, ये वीडियो में जो मराठी कविता *"तो काळ असा होता"* सुनाई गई है, उसका *हिंदी अनुवाद* ये रहा 👇
### *"वो समय ऐसा था"*
_कवि - अज्ञात_
वो समय ऐसा था,
हमारे पैरों में दम था।
किसी के पीछे कहीं भटकने में भी
मज़ा आता था।
अब तो हो नहीं पाता,
हो भी जाए तो निभ नहीं पाता,
निभ भी जाए तो शोभा नहीं देता।
क्योंकि हम बूढ़े हो गए...
क्योंकि हम बूढ़े हो गए।
वो समय ऐसा था,
हमारे बाल काले थे,
जवानी के चोचले थे,
बड़ी-बड़ी आंखें थीं,
देखने में भी मज़ा आता था।
अब तो हो नहीं पाता,
चश्मे के बिना दिखता नहीं,
दिखे भी तो भाता नहीं।
क्योंकि हम बूढ़े हो गए...
क्योंकि हम बूढ़े हो गए।
वो समय ऐसा था,
सीना चौड़ा था,
बांहों में ताकत थी,
मुंह में आवाज़ थी,
बोलने में भी मज़ा आता था।
अब तो हो नहीं पाता,
दांतों के बिना बोला नहीं जाता,
बोले भी तो कोई सुनता नहीं।
क्योंकि हम बूढ़े हो गए...
क्योंकि हम बूढ़े हो गए।
वो समय ऐसा था,
हम बिल्कुल फिट थे,
खांसने में भी मज़ा आता था।
हम खांसते थे, लोग डर कर भागते थे।
अब तो हो नहीं पाता,
खांस-खांस कर जान निकल जाती है,
फिर भी कोई नहीं पूछता,
खांसी भी नहीं रुकती।
क्योंकि हम बूढ़े हो गए...
क्योंकि हम बूढ़े हो गए।
वो समय ऐसा था,
समय से पहले हम थे,
हमारे पीछे समय था।
पीछा करने में मज़ा आता था।
अब तो हो नहीं पाता,
समय हमें छोड़ कर आगे निकल गया,
वो भी हमें छोड़ कर चली गई।
अब मुलाकात भी नहीं होती,
यादें फिर भी नहीं जातीं।
बोले बिना रहा नहीं जाता।
क्योंकि हम बूढ़े हो गए...
क्योंकि हम बूढ़े हो गए।
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वीडियो में दीदी ने अंत में बहुत सही बात कही - *ये कविता कटु सत्य है।* ये हमें अपने घर के बुजुर्गों की कदर करने और ये याद दिलाती है कि एक दिन हम भी इस उम्र तक पहुंचेंगे।
इस कविता ने आपको छुआ क्या? 🥹
और कोई कविता का अनुवाद चाहिए तो भेज दीजिए।
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