हम भगवान के प्रिय कैसे बने?
*सांवरे..-*
*किन शब्दों में लिखूं,*
*तेरी कमी को..!-*
*तेरे बिना हर पल,*
*अथूरा सा लगता है..!!*
*सांस सांस हो कृष्णमय,*
*रोम रोम में राधा..!*
*हरि हरि हर नस कहै,*
*कृष्ण बिन मैं आधा..!!*
*स्नेह वंदन*
🙏🙏🌹🙏🙏
*(राधे राधे जी)*
*(आपका दिन शुभ हो!)*
*।।हरि बोल।।*
*सांवरे..-*
*किन शब्दों में लिखूं,*
*तेरी कमी को..!-*
*तेरे बिना हर पल,*
*अथूरा सा लगता है..!!*
*सांस सांस हो कृष्णमय,*
*रोम रोम में राधा..!*
*हरि हरि हर नस कहै,*
*कृष्ण बिन मैं आधा..!!*
*स्नेह वंदन*
🙏🙏🌹🙏🙏
*(राधे राधे जी)*
*(आपका दिन शुभ हो!)*हम भगवान के प्रिय कैसे बने ? जब तक हमारे जीवन
में दोष है , तब तक हम ईश्वर के प्रिय कैसे बनेगें ? भगवान की कृपा के साथ हम इन विकारों से अपनी रक्षा करते हुए , इनसे प्रभावित न हो , बुरे कर्म से निकल कर आगे बढ़ते जाए । अतः जब भी कोई प्रतिकूलता और बुराई आए तो उसमें और अधिक प्रभु स्मरण करते हुए आगे बढ़ते रहे , उनमें अपने को उलझाएं नहीं । सर्वज्ञ ईश्वर हमारी कई जन्मों के कर्म व अच्छाइयों को देखकर हमारे दोषों को दूरकर , हमारे पुण्य और सद्भावनाओं की वृद्धि कर देते हैं , हमें निर्मल ज्ञान और अखण्ड भक्ति प्रदान कर देते हैं । तन से संसार की सेवा करते हुए हमें मन से भगवान् का स्मरण करते रहना चाहिए। प्रभु स्मरण करने से हमारा जीवन आनन्दमय और सार्थक हो जाता है ।"*
🙏🌹 *"सप्रेम हरिस्मरण"* 🌹🙏
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