एक पंक्ति में गीता का सार 🙏

डॉ. (श्रीमती) शशि तिवारी, अध्यक्ष (सेवानिवृत्त), संस्कृत विभाग,
आगरा कॉलेज, आगरा ने भगवद गीता के सभी 18 अध्यायों का सार केवल 18 वाक्यों में प्रस्तुत किया है।

🕉 एक पंक्ति में गीता का सार 🕉

कृपया इसे सभी को अग्रेषित करें और फैलाएं।
प्रत्येक व्यक्ति से निवेदन है कि वे इसे अगले 4 दिनों में यथासंभव अधिक लोगों तक पहुँचाएँ।
केवल अपने राज्य में ही नहीं, बल्कि पूरे भारतवर्ष में।


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एक पंक्ति में गीता सारांश – अध्यायवार:

1️⃣ अध्याय 1 – जीवन में एकमात्र समस्या गलत सोच है।
2️⃣ अध्याय 2 – सही ज्ञान सभी समस्याओं का अंतिम समाधान है।
3️⃣ अध्याय 3 – निःस्वार्थता ही प्रगति और समृद्धि का एकमात्र मार्ग है।
4️⃣ अध्याय 4 – हर कर्म को पूजा का रूप दिया जा सकता है।
5️⃣ अध्याय 5 – व्यक्तिगत अहंकार का त्याग करें और अनंत में आनंद पाएं।
6️⃣ अध्याय 6 – प्रतिदिन उच्च चेतना से जुड़ें।
7️⃣ अध्याय 7 – जो कुछ भी सीखा है, उसे जीवन में उतारें।
8️⃣ अध्याय 8 – स्वयं से हार कभी न मानें।
9️⃣ अध्याय 9 – अपने आशीर्वादों का मूल्य समझें।
🔟 अध्याय 10 – चारों ओर ईश्वर की उपस्थिति को अनुभव करें।
1️⃣1️⃣ अध्याय 11 – सत्य को उसी रूप में देखने के लिए पर्याप्त समर्पण रखें।
1️⃣2️⃣ अध्याय 12 – अपने मन को परमात्मा में लगाएं।
1️⃣3️⃣ अध्याय 13 – माया से दूर होकर दिव्यता से जुड़ें।
1️⃣4️⃣ अध्याय 14 – अपने दृष्टिकोण के अनुरूप जीवनशैली अपनाएं।
1️⃣5️⃣ अध्याय 15 – ईश्वर को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
1️⃣6️⃣ अध्याय 16 – अच्छा होना अपने आप में एक पुरस्कार है।
1️⃣7️⃣ अध्याय 17 – प्रिय के बजाय उचित को चुनना शक्ति का प्रतीक है।
1️⃣8️⃣ अध्याय 18 – सब कुछ छोड़ कर ईश्वर से एकता की ओर बढ़ें।

🕉 ॐ तत्सत् 🕉
(हर एक सिद्धांत पर मनन करें।)


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नोट: बार-बार निवेदन है कि कृपया इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों को भेजें और गीता के महत्व को समझाएँ।🙏🙏

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