गोबर हुआ गोल्ड, हम हुए क्लीन बोल्ड
गोबर हुआ गोल्ड, हम हुए क्लीन बोल्ड
हमारे बाप-दादा कहते थे — “बेटा, गाय पाल ले, किस्मत खुल जाएगी”।
हम समझते ‘दूध’ की बात हो रही है। आखिर निकले ‘गोबर’ के भाग्य!
*299 रुपए किलो गीला गोबर!*
भाई, जिस चीज़ को हम बचपन में ‘छी-छी’ कहकर लाँघ जाते थे, आज वो ‘सी-सी’ — यानी ‘क्लिक-एंड-कलेक्ट’ हो गई। फ्लिपकार्ट पर लीक-प्रूफ पैक में। लीजिए, गाय ने दिया गोबर, स्टार्टअप ने दिया ‘यूनिकॉर्न’।
5% डिस्काउंट मिलते ही ‘आउट ऑफ स्टॉक’! मतलब देश में धार्मिक भावना नहीं, ‘गोबर-भावना’ हाई है। गणेश-चतुर्थी पर मूर्ति भी शर्मा जाए — “मुझे मिट्टी से बनाओ, गोबर तो प्रीमियम हो गया!”
*9999 के 211 कंडे!*
अमेजन वाले भैया ने तो हद कर दी। 9999 रुपए में कंडे। वो भी ‘धूप में सुखाए हुए’। शुक्रिया जो बता दिया, वरना हम समझते माइक्रोवेव में सेके हैं। 65% डिस्काउंट के बाद 3499 — यानी ‘गरीब रथ’ वाला रेट। एक कंडा 16 रुपए का। मतलब हवन में आहुति डालो तो पहले पर्स की आहुति दे दो।
पूरी के साइज के 36 कंडे 249 रुपए। बटर-नान से महँगे! अब पंडित जी कहेंगे — “यजमान, दक्षिणा में पेटीएम कर दीजिए, कंडे तो हम ऑनलाइन मँगा लेंगे।”
*इंडियामार्ट का ‘थोक भाव’*
30 रुपए किलो। पर मिनिमम 25 किलो। 750 रुपए। अब इतने गोबर में आप क्या करेंगे? हवन? नहीं भाई, ‘हाउस-वार्मिंग’ पार्टी। पड़ोसी को बुलाइए — “आओ, हमारे नए फ्लैट के कंडे सूँघो। ऑर्गेनिक हैं!”
*एआई बाबा का ज्ञान*
एआई कहता है — “गोबर अब ‘ग्रीन गोल्ड’ है।” बिल्कुल सही। गोल्ड स्टैंडर्ड गया, गोबर स्टैंडर्ड आया। पहले बैंकों में लॉकर होते थे, अब बालकनी में ‘गोबर-रूम’ बनवाओ। एफडी कराओ — ‘फुल्ली ड्राइड’ कंडे की।
जिस देश में किसान टमाटर 2 रुपए किलो बेचकर रोता है, उसी देश में गोबर 299 रुपए किलो बिककर ‘सोल्ड आउट’ हो जाता है। मतलब समस्या ‘उपज’ की नहीं, ‘पैकेजिंग’ की है।
हुआ यूं -
एकल परिवार बढ़े, आँगन घटे, गाय गई, गोबर अमेजन पर आया। अब शहर का बच्चा पूछेगा — “मम्मी, कंडे की कहां मैन्यूफैक्चरिंग होती है?” और मम्मी बोलेगी — “बेटा, मेहता से पूछ ले!”
तब तक, गोबर को प्रणाम कीजिए। वही अब ‘डिजिटल इंडिया’ का असली ‘स्टार्ट-अप’ है।
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