आज का सुभाषित।
आज का सुभाषित।
चलचित्तं काम वित्तं चलज्जीवान् यौवनम् |
क्लेचलमिदं सर्वं कीर्तिर्यस्य सजीवति ||
भावार्थ - मनुष्य का मन (मन की भावनाएँ) परिवर्तनशील
है और धन संपत्ति है, युवा अवस्था तथा जीवन भी चलायमान है |
ये सभी चलायमान (अस्थाई) हैं, परन्तु किसी व्यक्ति द्वारा
अपने शुभ कर्मों से अर्जित उसकी कीर्ति (प्रसिद्धि) सदा बनी
रहती है |
चलचित्तं चलो वित्तं चलज्जीवनां यौवनम्।
चलाचलमिदं सर्वं कीर्तिर्यस्य सजीवति।
चाला = परिवर्तनशील। चित्तम् = मन, विचार। चलाओ =
'चला' के समान। विट्टम = धन, चलजजीवन =
चल + जीवन। जीवन = जीवन. यौवनम् = युवा।
चलाचलमिदम् = चलाचलम् + इदम्। चलचलम् =
इधर-उधर घूमने वाला, परिवर्तनशील। इदम्=यह। सर्वम् = सर्वम्।
कीर्तिरयस्य = कीर्तिः + यस्य। कीर्तिः = यश। यस्य =
जिसका। स = वह। जीवति = जीवित रहता है।
अर्थात् मनुष्य का मन (विचार) परिवर्तनशील है, और
उसी प्रकार उसका धन और यौवन भी। ये सब परिवर्तनशील हैं
और स्थायी नहीं हैं, परन्तु व्यक्ति द्वारा
अपने नेक कर्मों से अर्जित यश सदा बना रहता हैl
Comments
Post a Comment