लोग कब बेहोश होते हैं ?* 🙄

*लोग कब बेहोश होते हैं ?* 🙄




नोटबंदी हो तो लोग बेहोश हो जाते हैं।

SIR लागू हो तो लोग बेहोश हो जाते हैं।

सिलेंडर लेने की लाइन लगे तो लोग बेहोश हो जाते हैं।

*परंतु कुछ लाइन ऐसी भी हैं जहाँ खड़े लोग कभी बेहोश नहीं होते।*

वह लाइने हैं —


*जहाँ हर महीने Free का राशन मिलता है,*

*जहाँ Free का इलाज मिलता है,*

*जहाँ Free का गैस कनेक्शन मिलता है,*

*जहाँ Free का घर मिलता है,*
*जहाँ Free का SIM मिलता है,*
*जहाँ Free की छात्रवृत्ति और शिक्षा मिलती है,*
*और कई जगह तो Free का खाना भी मिलता है।*

अजीब बात है…

*देश में जो चीजें मुफ्त FREE मिलती हैं, वहाँ भीड़ हमेशा मजबूत और स्वस्थ रहती है।*
👇🏻
*लेकिन जहाँ जिम्मेदारी, नियम या भुगतान की बात आती है, वहीं अचानक लोगों को चक्कर आने लगते हैं.....*
👆🏻
शायद यही हमारे समय का सबसे बड़ा सामाजिक-राजनीतिक व्यंग्य है —
*“अधिकार” की लाइन में भीड़ बढ़ती जा रही है,..*

*और “कर्तव्य” की लाइन में लोग बेहोश होते जा रहे हैं ...*
🤔

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