चावल से डरना क्यों शुरू हो गया है -


 Rice Cooking Method - चावल से डरना क्यों शुरू हो गया है - आजकल बहुत से लोग चावल का नाम सुनते ही डरने लगते हैं। कई लोग मानते हैं कि चावल खाने से वजन बढ़ता है, डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है या फिर पेट में गैस और भारीपन होने लगता है। 

इसी वजह से कई लोगों ने अपनी थाली से चावल को पूरी तरह हटाना शुरू कर दिया है।

लेकिन अगर हम आयुर्वेद की बात करें तो वहां चावल को बहुत ही उत्तम और पवित्र भोजन माना गया है। आयुर्वेद के अनुसार चावल ऐसा आहार है जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है, पचने में हल्का होता है और मन को भी शांत रखने में मदद करता है।

अब सवाल यह है कि अगर चावल इतना अच्छा है तो आज के समय में इसे कई समस्याओं की वजह क्यों माना जा रहा है। इसका कारण चावल नहीं बल्कि चावल पकाने और खाने का हमारा तरीका है।

समय की कमी और आधुनिक जीवनशैली की वजह से हमने वह पारंपरिक तरीका छोड़ दिया है जिससे हमारे पूर्वज चावल पकाया करते थे। अगर उसी सही तरीके को फिर से अपनाया जाए तो चावल एक बहुत ही हल्का और संतुलित भोजन बन सकता है।

चावल का सही चुनाव कैसे करें
सबसे पहला कदम है चावल का सही चुनाव करना। आज बाजार में कई तरह के चावल मिलते हैं लेकिन आयुर्वेद के अनुसार हमेशा पुराना चावल खाना बेहतर माना जाता है।

पुराना चावल वह होता है जिसे कटे हुए कम से कम एक साल हो चुके हों। नया चावल पकने पर ज्यादा चिपचिपा हो जाता है और पचने में थोड़ा भारी माना जाता है। इससे शरीर में कफ बढ़ सकता है, जिससे भारीपन, सुस्ती और वजन बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

इसके विपरीत, पुराना चावल समय के साथ थोड़ा सूख जाता है और उसका स्वभाव हल्का हो जाता है। ऐसा चावल पचने में आसान होता है और शरीर को ज्यादा आराम देता है।

इसलिए जब भी चावल खरीदें तो कोशिश करें कि कम से कम एक साल पुराना चावल लें। इसके साथ ही बहुत ज्यादा पॉलिश किए हुए सफेद चावल की जगह अनपॉलिश्ड या सेमी पॉलिश्ड चावल जैसे सोना मसूरी या पारंपरिक बासमती चावल का चुनाव करना बेहतर रहता है क्योंकि इनमें प्राकृतिक पोषक तत्व ज्यादा सुरक्षित रहते हैं।

चावल को धोना और भिगोना क्यों जरूरी है
चावल पकाने से पहले उसे अच्छी तरह धोना और भिगोना बहुत जरूरी होता है। कई लोग चावल को बस एक बार पानी से धोकर सीधे पकाने रख देते हैं, लेकिन यह सही तरीका नहीं है।

चावल के ऊपर अतिरिक्त स्टार्च और कभी-कभी धूल या अन्य कण भी लगे होते हैं। इसलिए चावल को कम से कम तीन से चार बार साफ पानी से धोना चाहिए। धोते समय हल्के हाथों से दानों को रगड़ना चाहिए और तब तक धोना चाहिए जब तक पानी साफ न दिखने लगे।

इसके बाद धुले हुए चावल को लगभग आधे घंटे से एक घंटे तक पानी में भिगोकर रखना चाहिए। भिगोने से चावल के दाने पानी सोख लेते हैं और जल्दी पकते हैं। इससे चावल पचने में भी ज्यादा आसान हो जाता है और पेट में गैस या भारीपन की समस्या कम होती है।

चावल पकाने का सही तरीका
आजकल अधिकतर घरों में चावल प्रेशर कुकर में पकाया जाता है क्योंकि इससे समय की बचत होती है। लेकिन पारंपरिक तरीके में चावल खुले बर्तन में पकाया जाता था।

खुले बर्तन में चावल पकाने से भाप और अतिरिक्त गर्मी बाहर निकलती रहती है जिससे चावल हल्का और खिला-खिला बनता है।
इसके लिए आप मिट्टी की हांडी, पीतल के बर्तन या मोटे तले वाले स्टेनलेस स्टील के बर्तन का इस्तेमाल कर सकते हैं।

खुले बर्तन में चावल पकाने की विधि
सबसे पहले, जितना चावल लेना है, उसके लगभग चार से पांच गुना पानी बर्तन में डालकर उबालने रख दें।
जब पानी में अच्छा उबाल आ जाए तो उसमें भीगा हुआ चावल डाल दें। आंच मध्यम रखें और चावल को धीरे-धीरे पकने दें।
जैसे-जैसे चावल उबलता है, वैसे-वैसे ऊपर सफेद झाग जैसा पानी दिखाई देने लगता है। यह अतिरिक्त स्टार्च होता है जिसे मांड कहा जाता है।
जब चावल लगभग पक जाए और दाने नरम होने लगें तब गैस बंद कर दें और बर्तन को थोड़ा ढककर मांड को सावधानी से बाहर निकाल दें।

मांड निकालने के बाद जो चावल बचता है, वह हल्का, खिला-खिला और पचने में आसान हो जाता है।

चावल को और संतुलित बनाने का तरीका
पके हुए चावल को और संतुलित बनाने के लिए उसमें थोड़ा सा शुद्ध देसी गाय का घी मिलाया जा सकता है।
घी चावल के रूखेपन को कम करता है और इसे पचाने में आसान बनाता है। इससे शरीर में गैस बनने की संभावना भी कम होती है।
अगर किसी को कफ या सर्दी की समस्या ज्यादा रहती है तो चावल पकाते समय पानी में एक या दो लौंग, थोड़ा हल्दी या थोड़ी काली मिर्च भी डाली जा सकती है।
अगर पेट में गैस की समस्या रहती है तो पके हुए चावल में थोड़ा भुना हुआ जीरा मिलाना भी फायदेमंद माना जाता है।

इस तरीके से बने चावल के फायदे
इस तरह से पकाए गए चावल हल्के होते हैं और खाने के बाद भारीपन या सुस्ती महसूस नहीं होती।

जब चावल खुले बर्तन में पकाकर उसका मांड निकाल दिया जाता है तो उसका ग्लाइसेमिक प्रभाव भी कम हो सकता है। इसलिए सीमित मात्रा में इस तरह का चावल डायबिटीज वाले लोग भी अपने भोजन में शामिल कर सकते हैं।

चावल हमेशा ताजा ही खाएं
एक महत्वपूर्ण बात यह है कि चावल हमेशा ताजा और गर्म ही खाना चाहिए। पके हुए चावल को लंबे समय तक रखकर बाद में दोबारा गर्म करके खाना सही नहीं माना जाता।

बार-बार गर्म करने से चावल पचने में भारी हो सकता है और पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए उतना ही चावल पकाएं जितना एक समय के भोजन के लिए जरूरी हो।

ताजा चावल को मूंग की दाल, सब्जियों या कढ़ी के साथ खाने से यह एक संतुलित और पोषक भोजन बन जाता है।

Conclusion
चावल अपने आप में कोई खराब भोजन नहीं है। असली फर्क इस बात से पड़ता है कि हम उसे किस तरह चुनते हैं, कैसे धोते हैं और किस तरीके से पकाते हैं।

अगर चावल को सही तरीके से पकाया जाए और संतुलित मात्रा में खाया जाए तो यह शरीर को ऊर्जा देने वाला, हल्का और संतुलित भोजन बन सकता है।

इसलिए चावल से डरने की बजाय उसके सही पारंपरिक तरीके को अपनाना ज्यादा समझदारी भरा कदम हो सकता है।

क्या आप भी चावल खाने के बाद भारीपन या नींद महसूस करते हैं?

#gharelunuskhe #healthtips

अनमोल मोती🫧*
*हमें पता है कि "रंगोली" दूसरे ही दिन मिटने वाली है, फिर भी वो अधिक से अधिक आकर्षक हो/मनमोहक हो ये कोशिश रहती है, जीवन भी कुछ रंगोली जैसा ही है। हमें पता है कि जीवन एक दिन समाप्त हो जायेगा, फिर भी उसे खूबसूरत बनाने की कोशिश करते रहना चाहिए; पल-पल-हर पल।*
👏🏻👏🏻शुभ प्रभात👏🏻👏🏻

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