एक औरत की ज़िन्दगी 🥲
छोड़ने की सूची बन जाती है —
कभी प्रेम
कभी पहचान
कभी सपने,,,
बाप की इज़्ज़त के लिए
दिल का रिश्ता छोड़ती है
पति के नाम पर
अपना घर
भाई के हिस्से में
ज़मीन जाती है
और उसके हिस्से में
ख़ामोशी
बच्चों के लिए
वह नौकरी छोड़ती है
और अगर बाहर कोई उसे छेड़ दे —
तो बाहर जाना भी
उसकी गलती ठहरा दी जाती है
हर मोड़ पर
उससे कहा जाता है —
' अच्छी औरत बनो '
और अच्छी औरत वही मानी जाती है
जो हर बार
ख़ुद को छोड़ दे
आख़िर में
कुछ लोगों की दुनिया में
वह तभी पवित्र होती है
जब उसके भीतर की औरत
मर जाए
और वह ज़िन्दा लाश बन कर
सब कुछ सह ले
कड़वा है ये सब
पर औरत की कहानी
अक्सर ऐसे ही
लिखी जाती है
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