कभी सोचा है…

कभी सोचा है…
हम सब किसी न किसी की कहानी में किरदार हैं।
किसी की दुआ,
किसी की आदत,
किसी की वजह,
किसी की तकलीफ़,
किसी की याद।

हम सब अपनी-अपनी लड़ाइयों में
मुस्कान ओढ़े घूमते हैं,
क्योंकि दुनिया को
चेहरे की मुस्कान चाहिए,
दिल के जख़्म नहीं।

कभी लगता है
रिश्ते कितने आसान होते,
अगर लोग सुन लेते
जो हम बोल नहीं पाते…

पर शायद,
इसी कमी का नाम ज़िंदगी है।
हर अधूरी ख्वाहिश,
हर बिखरी उम्मीद,
हमें थोड़ा और इंसान बना जाती है।

और किसी दिन
जब सारे जवाब मिल जाएंगे
हम मुस्कुराकर कहेंगे,
“शुक्र है…
सब कुछ मेरी मर्ज़ी से नहीं हुआ,
वरना मैं खुद को आज
इतना ख़ूबसूरत नहीं बना पाता।”

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