आशा*_

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*आशा*_

21 मार्च 1980
निर्माता- जे ओम प्रकाश
निर्देशक- जे ओम प्रकाश
गीत- आनंद बक्शी
संगीत- लक्ष्मीकांत, प्यारेलाल
कलाकार- जितेंद्र, रीना रॉय, रामेश्वरी, गिरीश कर्नाड, सुलोचना लाटकर, दुलारी, सुधीर दलवी, मास्टर भगवान, सुंदर, यूनुस परवेज़, शक्ति कपूर 

                                   यह एक ब्लॉकबस्टर फ़िल्म थी.. रीना रॉय के अभिनय की बहोत तारीफ हुई जिसने उन्हें टॉप की नायिकाओं में स्थान दिलाया.. फ़िल्म रीना रॉय के करियर में एक मील का पत्थर साबित हुई ये फ़िल्म.. आलोचकों और प्रशंसकों से उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें शानदार समीक्षा मिली.. फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड में उन्हें बेस्ट अभिनेत्री के लिए नामांकन भी मिला.. ऋतिक रोशन इस फ़िल्म के एक गीत में डांस करते हुए नजर आते हैं.. उन्हें बिना खबर के इसको शूट किया गया.. ये उनका पहला ऑन स्क्रीन शॉट था.. जे ओम प्रकाश ने अपने कैमरा टिम से उनका चुपके से छायांकन करने के लिए कहा था.. उनका डांस देखकर सभी यूनिट ख़ुशी से ताली बजाने लगा.. जितेंद्र ने जे ओम प्रकाश से कहा “भगवान के लिए इस फिल्म में इस लड़के के साथ एक भी शॉट शूट मत करना, वरना दर्शक मेरे प्रदर्शन पर हूटिंग करेंगे”.. यह बॉलीवुड के लीडिंग एक्टर और डांसर जितेंद्र द्वारा मिली टिप्पणी ऋतिक के लिए गौरव की बात थी.. यही 6 साल का छोटा लड़का आगे जाकर भारत के सबसे प्रशंसित सुपरस्टार अभिनेताओं में से एक बना.. जितेंद्र के लिए इस फिल्म का सक्सेस काफ़ी अच्छा रहा.. 1980 का साल भी उनके लिए बहोत अच्छा साबित हुआ.. संजीव कुमार ने सहायक भूमिका को इनकार कर दिया और वो गिरीश कर्नाड को मिली.. फ़िल्म में को-एक्ट्रेस के रोल के लिए एक ग्लैमरस अभिनेत्री की आवश्यकता थी.. जितेंद्र ने रंजीता और ज़रीना वहाब के साथ काम करने से इनकार किया.. फिर ये भूमिका रामेश्वरी को मिली.. “दुल्हन वही जो पिया मन भाये” के बाद रामेश्वरी बहोत लोकप्रिय हुई थी.. इस फ़िल्म के साथ-साथ वो “सुनयना” की भी शूटिंग कर रही थी.. लेकिन एक दुर्भाग्यपूर्ण क्षति की वजह से उनका लुक खराब हुआ.. तब इस फ़िल्म में उनके किरदार में बदलाव किया गया.. फ़िल्म को शुरुआत में अच्छी ओपनिंग नहीं मिली थी.. इसका कलेक्शन भी कम था.. इस बात से निराश निर्माता, निर्देशक जे ओम प्रकाश ने अपने दोस्तों के सुझाव के आधार पर इसके क्लाइमेक्स को बदलने का फ़ैसला किया.. लेकिन इस बदलाव को फ़िल्म में लाने से पहले फ़िल्म की लोकप्रियता बढ़ गई.. निर्देशक ने फ़िल्म को वैसे ही रखने का फ़ैसला किया और यह एक बड़ी हिट बन गई.. फ़िल्म का तेलुगु में “अनुरागा देवता” और तमिल में “सुमंगली” नाम से रीमेक बनाया गया.. फ़िल्म को 7 फ़िल्मफ़ेयर नामांकन मिले.. फ़िल्म का संगीत बहोत लोकप्रिय रहा.. जब 1978 में “दो वक्त की रोटी” को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया तो उसके निर्माता ने फ़िल्म “आशा” के निर्माता को "तूने मुझे बुलाया शेरावलीए" गीत बेच दिया.. तब उन्हें लगा था कि “दो वक्त की रोटी” फ़िल्म फिर कभी नहीं बनेगी.. लेकिन कुछ साल बाद, फ़िल्म की शूटिंग फिर हुई और फ़िल्म पूरी बन भी गई.. और गीत "तूने मुझे बुलाया शेरावलीए" को बनाए रखा गया और “दो वक्त की रोटी” के लिए फ़िल्माया गया.. यही कारण था कि फ़िल्म “आशा” और “दो वक्त की रोटी” दोनों फ़िल्मों में एक ही गीत था.. हालांकि गीत को “दो वक्त की रोटी” के लिए जारी किए गए एल पी रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया गया था.. गीत “आशा” के साउंडट्रैक में क़ायम रहा.. 


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