मकर संक्रांति 2026:
आज यानी 14 जनवरी को पूरे भारत में मकर संक्रांति का उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे का वास्तविक महत्व क्या है? यह केवल पतंग उड़ाने या खिचड़ी खाने का दिन नहीं है, इसके पीछे गहरे वैज्ञानिक और आध्यात्मिक रहस्य छिपे हैं:
1️⃣ सूर्य का मकर राशि में प्रवेश (ज्योतिषीय महत्व)
'संक्रांति' का अर्थ है संक्रमण या प्रवेश। इस दिन सूर्य देव धनु राशि को छोड़कर अपने पुत्र शनि की राशि 'मकर' में प्रवेश करते हैं। ज्योतिष शास्त्र में इसे बहुत शुभ माना जाता है क्योंकि यह सौर वर्ष के एक नए अध्याय की शुरुआत है।
2️⃣ उत्तरायण का प्रारंभ: अंधकार से प्रकाश की ओर
इस दिन से सूर्य 'उत्तरायण' होते हैं। वैज्ञानिक रूप से देखें तो अब से दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। इसे अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है। इसी दिन से 'खरमास' समाप्त होता है और सभी शुभ व मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं।
3️⃣ पिता-पुत्र का पावन मिलन (पौराणिक कथा)
कहा जाता है कि भगवान सूर्य और उनके पुत्र शनिदेव के बीच संबंध मधुर नहीं थे। लेकिन इस दिन सूर्य देव स्वयं अपने पुत्र शनि के घर (मकर राशि) उनसे मिलने जाते हैं। यह दिन हमें संदेश देता है कि पुराने गिले-शिकवे भुलाकर रिश्तों में मिठास घोलने का समय आ गया है।
4️⃣ भीष्म पितामह और मोक्ष की प्राप्ति
महाभारत के युद्ध में इच्छा मृत्यु का वरदान पाने वाले भीष्म पितामह ने बाणों की शय्या पर रहते हुए भी अपने प्राण त्यागने के लिए 'उत्तरायण' (मकर संक्रांति) के दिन की प्रतीक्षा की थी। मान्यता है कि इस दिन शरीर त्यागने वाले को मोक्ष मिलता है।
5️⃣ फसल और आभार का उत्सव (सांस्कृतिक महत्व)
यह किसानों के लिए अपनी मेहनत (नई फसल) का उत्सव मनाने का समय है। इसे पंजाब में लोहड़ी, दक्षिण भारत में पोंगल और असम में बिहू के रूप में मनाया जाता है। हम ईश्वर को नई फसल अर्पित कर उनका आभार व्यक्त करते हैं।
खिचड़ी और तिल-गुड़ का महत्व क्यों?
खिचड़ी: यह सुपाच्य होती है और ऋतु परिवर्तन के समय स्वास्थ्य के लिए उत्तम है।
तिल-गुड़: "तिल-गुड़ खाया, गोड-गोड बोला" – यानी तिल की तरह साथ रहें और गुड़ की तरह मीठा बोलें।
मकर संक्रांति पर दान का फल:
इस दिन तिल, गुड़, कंबल और अनाज का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
आप सभी को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ!
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