हिंदी दिवस🙏

*हिंदी हमारी अस्मिता...हमारी पहचान...हमारी धड़कन हैं...*


*हिंदी भाषा के विषय में कहने के लिए शब्द नगण्य हैं...*
*हिंदी भाषा हमारी नजरो मे तो...*
*सभी भाषाओं की सरताज हैं...*

*इसकी पहचान एक सरल भाषा के रूप में किया जाता हैं...*

*लेकिन हिंदी के शब्दों में जटिलता भी इस कदर है की...*
*आप तनिक गलती से अर्थ का अनर्थ कर सकते हैं...*

*इसकी एक छोटी सी बिंदी भी शब्दों के भावार्थ बदलने का दम खम रखती हैं...*
*चिंता...चिता...*

*ऐसे ही...*
*लूटना...लुटना...*

*ऐसे ही...*
*राम रूक मत जा...*

*राम, रूक मत जा...*
*राम रूक, मत जा...*

*सच कहा जाये तो हिंदी बोलने में लिखने में हमको तो आत्मसंतुष्टि का आभास होता है...*

*हमारी आत्मा हिंदी सुनने लिखने से आत्मविभोर...हो उठती हैं...*

*बाकी भाषाओं को मैंने...*
*महज किताबों में रखा...*

*हिंदी को सब जगह...*
*अपने भावों में रखा...*

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