आवारा*_फिल्म रिव्यू

_*आवारा*_फिल्म review

14 दिसंबर 1951
निर्माता- राज कपूर
निर्देशक- राज कपूर
गीत- शैलेंद्र (S), हसरत जयपुरी (HJ)
संगीत- शंकर, जयकिशन
कलाकार- राज कपूर, नरगिस, पृथ्वीराज कपूर, लीला चिटनीस, के एन सिंह, कुक्कू, लीला मिश्रा, शशि कपूर, बेबी जुबेदा, बी एम व्यास, दीवान बसवेश्वरनाथ कपूर

                     यह फ़िल्म हिन्दी सिनेमा की एक माइल स्टोन समझी जाती है.. बहोत बड़ी ब्लॉकबस्टर.. विदेशों में भी धूम मचायी इस फ़िल्म ने..फिल्म दक्षिण एशिया में रातों-रात सनसनी बन गई..और विदेशों में सोवियत संघ, पूर्वी एशिया, अफ्रीका, कैरेबियन, मध्य पूर्व और पूर्वी यूरोप में और भी बड़ी सफलता मिली इसे..चीन में भी इस फिल्म ने 100 मिलियन से अधिक टिकट बेचे..फिल्म में राज कपूर के घर से कुछ कलाकार भी थे जैसे की उनके छोटे भाई शशि कपूर, उनके पिता पृथ्वीराज कपूर और पृथ्वीराज कपूर के पिता दीवान बसवेश्वरनाथ कपूर..पहले तो ये फिल्म राज कपूर और के ए अब्बास मिलकर बना रहे थे..के ए अब्बास ये फिल्म दिलीप कुमार और अशोक कुमार को लेकर बनाना चाहते थे और महबूब खान से निर्देशित करना चाहते थे..लेकिन बात न बनने पर राज कपूर ने इसे निर्देशित करने के लिए कदम बढ़ाया..इसे 1953 के कान्स फिल्म फेस्टिवल में शामिल किया गया था जहां इसे फेस्टिवल के ग्रैंड प्राइज के लिए नामांकित किया गया था..फिल्म में सभी कलाकारों की अदाकारी सराहनीय रही..टाइम पत्रिका ने "आवारा" में राज कपूर के अभिनय को अब तक के शीर्ष 10 महान प्रदर्शनों में से एक के रूप में चुना..राज कपूर तो मुख्य भूमिका में थे ही लेकिन नरगिस द्वारा निभाई गयी अदाकारी भी बहोत प्रशंसनीय रही..."आवारा" ने हिंदुस्तान के साथ साथ तुर्की, सोवियत यूनियन, चाइना में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया..अलग अलग देशों में और भाषाओं में इस फिल्म का रीमेक बनाया गया..जब फिल्म की कहानी लेकर के ए अब्बास और साठे, पृथ्वीराज कपूर के पास गए तब उन्होंने इस फिल्म में काम करने की हामी भरी..जब उन्हें पता चला कि इसे उनका बेटा राज कपूर इस फिल्म को निर्देशित करनेवाला है तो उन्होंने इनकार कर दिया.. बहोत समझाने पर वे मान गए..आर के स्टूडियो में शूट होने वाली ये पहली फिल्म थी..महबूब खान के इनकार के बाद के ए अब्बास अपनी स्क्रिप्ट लेकर राज कपूर के पास गए थे..इस फिल्म से इनकी गठजोड़ वाला सफर "हीना" तक रहा..फिल्म के पोस्टर पर नरगिस के कंधे को राज कपूर चूमते हुए दिखाई देते हैं जो बहोत लोकप्रिय हुआ..राज कपूर की फिल्मों में हमेशा बेहतरीन संगीत मिलता है.. इस फिल्म का संगीत भी बहोत शानदार रहा..बॉलीवुड प्लेनेट द्वारा जारी 100 सबसे बेहतरीन हिन्दी फिल्म संगीत में इस फिल्म के संगीत को 3 री पायदान पर रखा गया था..फिल्म का टाइटल गीत बहोत ज्यादा लोकप्रिय हुआ खासकर सोवियत यूनियन और तुर्की में..


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