जय हो मोदी जी🙏


*बरसों बाद केंद्रीय स्तर पर नरेंद्र मोदीजी जैसे नेता को देखकर यह महसूस होता है कि जैसे सर पर किसी अभिभावक का हाथ है ।* 

👉🏽कुछ लोग चाहे कितनी ही आलोचना करें लेकिन पिछले ग्यारह बरसों का इतिहास बताता है कि ऐसा एक भी दिन नहीं गया जब यह लगा हो कि यह देश अनाथ है । 

👉🏽यही भारत था और वही मनमोहन मौनीज था और वही सोनिया गांधी थी कि यह देश नट बोल्ट उखड़ी हुई बैलगाड़ी जैसा लगता था ।

👉🏽आज तो नहीं लेकिन आज से कई दशकों बाद इस बात का संज्ञान आने वाली पीढ़ी लेगी और किसी मोदीजी जैसे प्रधानमंत्री को ही ढूंढेगी । 

संभव है कि तरस भी जाए ।

👉🏽इस एक व्यक्ति ने शिव शंकर की तरह सारा ज़हर अपने भीतर उतार लिया । और, अपना नीला कंठ लिए यह व्यक्ति फिर एक अभिभावक की तरह देश को संबोधित करने आ रहा है । 

👉🏽मुझे इस व्यक्ति की आलोचना से अपने विश्वास पर कोई चोट नहीं पहुंचती । क्योंकि आलोचना तो हेडगेवार जी की भी होती है, परम पूज्य गुरुजी की भी, वीर सावरकर की भी, लाल बहादुर शास्त्री जी की अटल जी की भी ।

यह लोग आलोचना से "इम्यून" हो चुके लोग हैं ।

इनका महान योगदान इस देश की नस नस में रक्त बनकर बहता है । 

👉🏽आपको क्या लगता है कि यह दस बीस लाख फेसबुकिया मोदीजी विरोधी इस देश की रीढ़ की हड्डी हैं ? - *नहीं ! यह लोग इस देश पर भार हैं चाहे कितने ही शिक्षित क्यो न हों ।* 

यह अपनी हज़ार पोस्टों से एक भी वोट / मत को प्रभावित नहीं कर सकते । 

यदि सैंकड़ों नेहा सिंह राठौर मिलकर एक पार्षद भी जितवा दें तो यहीं बैठा हूँ ।

👉🏽इसलिए आने वाले कुछ बरसों तक इस राष्ट्रीय अभिभावक को अपना सब कुछ समर्पित कर दीजिए । *आज सेना के चेहरे पर जो आत्मविश्वास था, उसका बहुत बड़ा कारण मोदीजी और मोदीजी की टीम भी है ।*

👉🏽मैं फिर कहता हूँ । इस पोस्ट पर भी वे लोग आएंगे । हंसेंगे । कोई मीम भी कमेंट बॉक्स में छोड़ जाएंगे । *लेकिन मोदीजी द्वारा इस देश के अवचेतन में बिठाए गए आत्मविश्वास को इससे रत्ती भर फ़र्क़ नहीं पड़ेगा ।*

👉🏽आप मुझे मोदीजी भक्त कह लीजिए । क्या अंतर पड़ता है । कम से कम मैं किसी विदेशी मूल की देसी पार्टी के तलवे नहीं चाटता । और न कभी चाटूंगा । *मैं उस घोंचू पप्पू को अपना नेता कैसे मान सकता हूँ जिसकी क्लिप पाकिस्तानी सेना भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाती है ?*

👉🏽यह मेरा देश यह मेरी मिट्टी यह मेरे मौसम - मैं इन पर दिल और जान और ईमान से कुर्बान हूँ *मुझे गंगा मैया में बहना और मिल जाना है ।* 

मैं आकाश में धुएं की तरह उठूंगा और बादलों से मिलकर इस मिट्टी पर बरस जाऊंगा । 

*मेरी एक एक कविता से केवल "राष्ट्र प्रथम" की आवाज़ आएगी । मेरी वसीयत "राष्ट्र प्रथम" का उद्घोष होगी । सरकारें आएंगी जाएंगी लेकिन यह देश किसी मोदीजी या किसी अटल की स्मृति में सांस लेता रहेगा ।* 

👉🏽यह कहने में कैसा संदेह कि मोदीजी हमारे संकल्प की मुहर है । और हम यह मुहर अपनी नंगी छाती पर तमगे की तरह लिए फिरते हैं । 

👉🏽आज पाकिस्तान का गिड़गिड़ाना इस बात का सबूत है । कल पाकिस्तान का नहीं रहना भी इसका सबूत होगा । देखते जाइए और देखते ही जाइए ।

*नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि!*
*वन्दे मातरम, जय श्रीराम🚩🚩*

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