आज कि कहानी*

*आज कि कहानी*



*पिता की चिट्ठी*💌

🌷✍️..एक शहर में प्रतिवर्ष माता पिता अपने पुत्र को गर्मी की छुट्टियों में उसके दादा -  दादी के घर ले जाते थे। 10 - 20 दिन सब वहीं रहते और फिर लौट आते ।

ऐसा प्रतिवर्ष चलता रहा । बालक थोड़ा बड़ा हो गया।

एक दिन उसने अपने माता पिता से कहा कि अब मैं अकेला भी दादी के घर जा सकता हूंँ। आप मुझे अकेले दादी के घर जाने दो। 

माता पिता पहले तो राजी नहीं हुये ।  परंतु बालक ने जब जोर दिया तो उसको सारी सावधानी समझाते हुये माता-पिता ने उसे दादा - दादी के घर जाने की अनुमति दे दी। 

जब जाने का दिन आया तो पिता बालक को छोड़ने स्टेशन पर गये। ट्रेन में उसको उसकी सीट पर बिठाया । फिर बाहर आकर खिड़की से उससे बात की। उसको सारी सावधानियांँ फिर से समझाईं। 

बालक ने कहा कि मुझे सब याद है।आप चिंता मत करो। 

ट्रेन को सिग्नल मिला। व्हीसिल लगी । तब पिता ने एक लिफाफा पुत्र को दिया और कहा कि *बेटा अगर रास्ते में तुझे डर लगे , तो यह लिफाफा खोलकर इसे पढ़ लेना।*

बालक ने पत्र जेब में रख लिया। पिता ने हाथ हिलाकर उसे विदा किया। ट्रेन चलती रही। हर स्टेशन पर नये लोग आते रहे और पुराने उतरते रहे।
लेकिन सबके साथ कोई न कोई था। 

अब बालक को अकेलापन लगने लगा    

अगले स्टेशन पर ट्रेन में एक ऐसा व्यक्ति चढ़ा , जिसका चेहरा बहुत भयानक था।

बालक पहली बार बिना माता - पिता के , बिना किसी सहयोगी के यात्रा कर रहा था। 

रात्रि हो चुकी थी। उसने अपनी आंँखें बंद कर सोने का प्रयास किया , परंतु बार - बार वह भयानक चेहरा उसकी आंँखों के सामने घूमने लगा। बालक भयभीत हो गया। रुआँसा हो गया। 

तभी उसको पिता की चिट्ठी की याद आई। उसने जेब में हाथ डाला। उसका हाथ कांँप रहा था। उसने पत्र निकाला। लिफाफा खोला और पढ़ना शुरू किया। 

*चिट्ठी में पिता ने लिखा था तू डरना मत , मैं पास वाले कंपार्टमेंट में ही हूँ ,  इसी गाड़ी में बैठा हूंँ। बालक का चेहरा खिल उठा। उसका सारा डर काफूर हो गया।*


*सीख* : हमारा जीवन भी ऐसा ही है। जब भगवान ने हमको इस दुनिया में भेजा , उसी समय उन्होंने हमको भी एक पत्र दिया है , जिसमें लिखा है 
*"उदास मत होना , मैं हर पल तुम्हारे साथ हूंँ ।"*

"पूरी यात्रा तुम्हारे साथ ही करता हूंँ । केवल तुम मुझे स्मरण रखते रहो ।  जब भी तुम मुझे सच्चे मन से याद करोगे , मैं एक पल में आ जाऊंँगा ।"

इसलिये चिंता नहीं करना , घबराना नहीं , हताश मत होना। 

चिंता करने से मानसिक और शारीरिक दोनों स्वास्थ्य प्रभावित होते हैं। *अपने परमात्मा पर , प्रभु पर , अपने इष्ट पर हर क्षण विश्वास रखें , जीवन में सब अच्छा होगा।*

प्रभु हमेशा हमारे साथ हैं , हमारी पूरी यात्रा के दौरान ,अन्तिम श्वास तक।


आप सभी का दिन शुभ हो, साथ में मेरा भी शुभ हो..✨🤗🌺 *ओम शांति* 🙏🙏

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