सीनियर सिटिजन डे- २१ अगस्त

सीनियर सिटिजन डे- २१ अगस्त
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               मेरे एक मित्र अक्सर पूछते रहते थे कि बच्चों के भविष्य के लिये क्या करें। मैं कहता था कुछ मत करिये। बस आप अपने स्वास्थ्य को दुरुस्त रखिये। यही बच्चों पर सबसे बड़ा अहसान होगा। क्योंकि जब आपके बच्चे जवान होकर अपने खुद के बच्चों के लालन- पालन में व्यस्त होंगे तब वे अपना परिवार और उनका स्वास्थ्य और भविष्य देखेंगे या आपकी तीमारदारी करेंगे। यदि करेंगे भी तो आप अपराधी हैं क्योंकि आप अपने पोते- पोतियों का हिस्सा चुरा रहे हैं। आज जब मेरे मित्रों की किडनी- लिवर- घुटने और दिल दरिया हो रहा है तो मेरे इस कथन से वे सहमति जता रहे हैं। मगर- ‘का वर्षा जब कृषि सुखाने समय चूक पुनि का पछताने!’ तुलसी और गालिब ऐसे कवि हैं जिन्हें हर अवसर पर कोट किया जा सकता है।
* ४५ साल की उम्र के बाद यदि आपने पैसे और स्वास्थ्य में पैसे को महत्ता दी है तो बहुत “बढ़िया” किया है। वह पैसा साठ के बाद काम आयेगा। एफडी दो तरह की होती हैं - हेल्थ की और वेल्थ की। आपने हेल्थ की नहीं की है। अब वेल्थ की खर्च कीजिये।
* चालीस के बाद हर वर्ष मांसपेशियों की शक्ति दस प्रतिशत घट जाती है।यानि ६०-७० में आप जवानी की तुलना में ३०% कम ताकतवर होंगे।पैदल चलना, तैरना,साइकिल या योग कोई भी इसे नहीं बचा सकता। केवल रेजिस्टेंस ट्रेनिंग ही इसे बचा सकती है। मेरे एक फेसबुक मित्र ने एक वीडियो बाबा श्री श्री श्री•••••• का भेजा है।इस बाबा ने जमुना नदी की जैव विविधता को तो बर्बाद किया ही है इसके साथ ही लाखों करोड़ों मूर्खों को योग से बीमारियाँ दूर करने के झूठे शिविर लगाकर उनका स्वास्थ्य बर्बाद किया है। हालाँकि मैं भी उन मूर्खों में शामिल रहा हूँ पर जल्द मुक्त हो गया था।यदि इसके नाम में भगवान का नाम न जुड़ा होता तो इसे मातृगामी जैसी गलियों से नवाजा जाना चाहिये। पर्यावरण का नुक़सान करने पर इस अपराधी पर अदालत ने करोड़ों का जुर्माना लगाया था।लाखों का स्वास्थ्य बिगाड़ने का जुर्माना कौन लगाएगा?
* भारत में ७० से अधिक आयु वाले  ८% लोग ही जीवित रह पाते हैं। इनमें अधिकांश वे हैं जिनका आर्थिक आधार पेंशन या अन्य साधनों से सुरक्षित है। यदि आप इसमें शामिल हैं और दहाईं अंकों में अभी और जीना चाहते हैं तो बाबा जो कर रहा है उसे कल से शुरू करिये।

जितना कम सामान रहेगा
उतना सफर आसान रहेगा।
जितनी भारी होगी गठरी
इतना तू हैरान रहेगा ।
उससे मिलना नामुमकिन है
जब तक खुद का ध्यान रहेगा।।
-नीरज

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