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संस्कृत वाक्य और उनका सीधा हिंदी अनुवाद :-*

* वरण करने योग्य हिंदी में, बिना अनुवाद या व्याख्या जोड़े, केवल संस्कृत वाक्य और उनका सीधा हिंदी अनुवाद :-* Gv 1. *अजीर्णे भोजनं विषम् ।* यदि पहले लिया गया भोजन नहीं पचा है तो अगला भोजन विष के समान है। 2. *अर्धरोगहरी निद्रा ।* अच्छी नींद आधे रोगों को हर लेती है। 3. *मुद्गदाली गदव्याली ।* सभी दालों में मूंग श्रेष्ठ है, यह रोगों को हरती है। 5. *अति सर्वत्र वर्जयेत्।* हर चीज़ की अति वर्जनीय है। 6. *नास्ति मूलमनौषधम् ।* कोई भी सब्ज़ी ऐसी नहीं है जो औषधि न हो। 7. *न वैद्यः प्रभुरायुषः ।* कोई वैद्य (डॉक्टर) आयु का स्वामी नहीं है। 8. *चिंता व्याधि प्रकाशाय ।* चिंता रोगों को बढ़ाती है। 9. *व्यायामश्च शनैः शनैः।* व्यायाम धीरे-धीरे करना चाहिए। 10. *अजवत् चर्वणं कुर्यात् ।* बकरी की तरह चबा-चबाकर खाना चाहिए। 11. *स्नानं नाम मनःप्रसाधनकरंदुः स्वप्न-विध्वंसनम् ।* स्नान मन को प्रसन्न करता है और बुरे स्वप्नों को मिटाता है। 12. *न स्नानमाचरेद् भुक्त्वा।* भोजन के तुरंत बाद स्नान नहीं करना चाहिए। 13. *नास्ति मेघसमं तोयम् ।* बारिश के समान शुद्ध जल कोई नहीं। 14. *अजीर्णे भेषजं वारि ।* अजीर्ण में जल औषधि के...

हर हर महादेव। जय श्री कृष्ण। 🙏🏻

कल्पना कीजिए एक ऐसे असुर की जिसके एक-दो नहीं बल्कि पूरे हजार हाथ थे। जिसकी शक्ति के सामने बड़े-बड़े देवता भी कांप उठते थे। जिसकी राजधानी के द्वार पर स्वयं भगवान शिव पहरा देते थे। और जिसकी पुत्री की एक प्रेम कहानी ने ऐसा तूफान खड़ा कर दिया कि भगवान श्री कृष्ण और महादेव को युद्धभूमि में आमने-सामने खड़ा होना पड़ा। यह कथा है महान असुरराज बाणासुर की, जो केवल अपनी शक्ति के लिए ही नहीं बल्कि अपनी भक्ति और अपने अहंकार दोनों के लिए प्रसिद्ध था। प्राचीन काल में असुरों के महान राजा महाबली का एक पराक्रमी पुत्र था—बाणासुर। वह भक्त प्रह्लाद के वंश का गौरव था। बचपन से ही उसका मन भगवान शिव की भक्ति में रमा रहता था। उसने वर्षों तक कठोर तपस्या की। बर्फीले पर्वतों में खड़े होकर, अग्नि के बीच बैठकर और भोजन त्यागकर उसने महादेव को प्रसन्न किया। अंततः उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव उसके सामने प्रकट हुए। बाणासुर ने हाथ जोड़कर कहा, "प्रभु, मुझे ऐसा वरदान दीजिए कि संसार की कोई शक्ति मेरे राज्य को पराजित न कर सके।" महादेव मुस्कुराए और बोले, "वत्स, मैं स्वयं तुम्हारे राज्य की रक्षा करूंगा। जब...