भारत की असली स्थिति
महानगरों में रह रहे जॉब वाले दम्पतियों के बच्चे कोई लेफ्टिस्ट बन रहे, कोई समलैंगिक बन रहे, कोई LGBT एक्टिविस्ट बन रहे यह वो बच्चे हैं जो कॉलेज लाइफ़ में वोदका और चरस का सेवन सीख चुके हैं..। स्कूल बैग के अंदर वेप (ई सिगरेट) मिल रही है इनके इन बच्चों का परिवार या घर में कोई विश्वास नहीं है ना ही ये शादी करके परिवार बढ़ाएंगे ना ही यह अपने बूढ़े मां बाप के पास रहेंगे कॉलेज में ब्रेनवॉशड इन बच्चों की ही जिद्द और बदतमीजियो के कारण इनके मां बाप दूसरे रिश्तेदारों से भी कट चुके हैं जब इनके बूढ़े मां बाप मरेंगे यह लेफ्टिस्ट संतानें उनका विधिवत संस्कार तक नहीं करेगी श्राद्ध तो दूर की बात है बड़े शहरों में पैसा कमाने में व्यस्त दंपति ने ये बच्चे पैदा अवश्य किए हैं, पर यह काम आएंगे कम्युनिस्ट लॉबी के यह ताउम्र सिंगल रह जाएंगे और आंदोलनजीवियों द्वारा जंतर मंतर या दिल्ली में रखे धरने प्रदर्शनों में जाने के काम आयेंगे बीमार पड़े मां बाप के नहीं आज जो 55-60 के हो चले हैं उन्हें कोई पानी पिलाने वाला नहीं होगा ये जितने भी कम्युनिस्ट आज 60-70 वर्ष की उम्र वाले हैं, इनके पारिवारिक बै...