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आज का चिंतन❤️

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सुदामा के साथ बातें करते हुए कब कृष्ण उनके पाँव दबाने लगे य सुदामा को पता ही नही चला। सुदामा सो चुके थे किंतु कृष्ण अपनी ही सोंचों में मगन उनके पाँव दबाते हुए बचपन की बातें करते चले जा रहे थे, कि तभी रुक्मिणी ने उनके कंधे पर हाथ रखा। कृष्ण ने चौंक कर पहले उन्हे देखा और फिर सुदामा को, फिर उनका आशय समझ कर वहाँ से उठ कर अपने कक्ष में चले आये। कृष्ण की ऐसी मगन अवस्था देखकर रुक्मिणी ने पूछा, "स्वामी आज आपका व्यवहार बहुत ही विचित्र प्रतीत हो रहा है। आप, जो इस संसार के बड़े से बड़े सम्राट के द्वारका आने पर उनसे तनिक भी प्रभावित नही होते हैं, वो अपने मित्र के आगमन की सूचना पर इतने भावविव्हल हो गए कि भोजन छोड़कर नंगे पाँव उन्हे लेने के लिए भागते चले गए। आप, जिनको कोई भी दुख, कष्ट या चुनौती कभी रुला नही पाई, यहाँ तक कि जो गोकुल छोड़ते समय मैया यशोदा के अश्रु देखकर भी नही रोये, वे अपने मित्र के जीर्ण शीर्ण, घावों से भरे पाँवों को देखकर इतने भावुक हो गए कि अपने अश्रुओं से ही उनके पाँवों को धो दिया। कूटनीति, राजनीति और ज्ञान के शिखर पुरुष आप, अपने मित्र को देखकर इतने मगन हो गए कि ब...

आज का चिंतन❤️

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सुदामा के साथ बातें करते हुए कब कृष्ण उनके पाँव दबाने लगे य सुदामा को पता ही नही चला। सुदामा सो चुके थे किंतु कृष्ण अपनी ही सोंचों में मगन उनके पाँव दबाते हुए बचपन की बातें करते चले जा रहे थे, कि तभी रुक्मिणी ने उनके कंधे पर हाथ रखा। कृष्ण ने चौंक कर पहले उन्हे देखा और फिर सुदामा को, फिर उनका आशय समझ कर वहाँ से उठ कर अपने कक्ष में चले आये। कृष्ण की ऐसी मगन अवस्था देखकर रुक्मिणी ने पूछा, "स्वामी आज आपका व्यवहार बहुत ही विचित्र प्रतीत हो रहा है। आप, जो इस संसार के बड़े से बड़े सम्राट के द्वारका आने पर उनसे तनिक भी प्रभावित नही होते हैं, वो अपने मित्र के आगमन की सूचना पर इतने भावविव्हल हो गए कि भोजन छोड़कर नंगे पाँव उन्हे लेने के लिए भागते चले गए। आप, जिनको कोई भी दुख, कष्ट या चुनौती कभी रुला नही पाई, यहाँ तक कि जो गोकुल छोड़ते समय मैया यशोदा के अश्रु देखकर भी नही रोये, वे अपने मित्र के जीर्ण शीर्ण, घावों से भरे पाँवों को देखकर इतने भावुक हो गए कि अपने अश्रुओं से ही उनके पाँवों को धो दिया। कूटनीति, राजनीति और ज्ञान के शिखर पुरुष आप, अपने मित्र को देखकर इतने मगन हो गए कि ब...

जय हो प्रभु श्री राम जी🙏

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👌👌👌👌 * एक बार तुलसीदास अपने ईष्ट श्री राम के दर्शन की इच्छा लिए जगन्नाथ पुरी की ओर चल पड़े। वहां पहुंचने के बाद लोगों की भीड़ को देखकर वह बहुत खुश हुए और मंदिर के अंदर दर्शन करने के लिए चले गए। लेकिन जैसे ही उन्होंने श्री जगन्नाथ जी को देखा और अचानक ही उनके चेहरे पर निराशा छा गई और वह बाहर आकर मन में सोचने लगे कि इतनी दूर आना भी मेरा बेकार हुआ,  क्योंकि यह बिना हाथों के मेरे ईष्ट नहीं हो सकते हैं। रात काफी हो गई थी तो वह थके-हारे,  भूखे-प्यासे एक जगह पर आराम करने के लिए बैठ गए।* *कुछ समय के बाद वहां आहट होने लगी और तुलसीदास को एक बालक की आवाज़ सुनाई दी जो उनका ही नाम पुकार रहा था। उन्होंने उसे अपने पास बुलाया और कहा कि मैं ही तुलसीदास हूं।  उस बच्चे के हाथ में एक थाली थी जो उसने तुलसीदास की ओर करके कहा कि ‘लीजिए, जगन्नाथ जी ने आपके लिए प्रसाद भेजा है।’* *तुलसीदास बोले ‘कृपा करके इसे वापस ले जाएं।’* *बालक ने कहा, ‘जगन्नाथ का भात-जगत पसारे हाथ’ और वह भी स्वयं महाप्रभु ने भेजा और आप स्वीकार नहीं कर रहे हैं। कारण क्या है?’* *तुलसीदास ने कहा कि, ‘मैं अपने ईष्ट ...

आज का चिंतन

🌳💓🪴🌸🦚🌸🪴💓🌳       *🌲💐जय सियाराम💐🌲*         *🍃🏵जय मातादी🏵🍃* *मन को शांत रखना ही सबसे बड़ी साधना है, क्योंकि अशांत मन में ना तो खुशी टिकती है और ना ही भक्ति का भाव स्थिर रह पाता है। जब मन व्यर्थ के विचारों, चिंता और* *अपेक्षाओं में उलझा रहता है, तब जीवन की सच्ची शांति हमसे दूर हो जाती है।* *जो व्यक्ति अपने भीतर संतोष का दीप जला लेता है, वही वास्तव में सच्चा धनवान होता है। बाहरी सुख और साधन क्षणिक होते हैं, लेकिन भीतर की संतुष्टि ही वह खजाना है, जो हर परिस्थिति में हमें स्थिर और प्रसन्न बनाए रखता है।* *इसलिए हर परिस्थिति में अपने मन को प्रभु के चरणों में लगाकर शांत और स्थिर रखने का प्रयास करें, क्योंकि यही सच्ची भक्ति और सुखी जीवन का आधार है।*       *🌾🌸जयश्री राधेकृष्ण🌸🌾*           *🌺🌴शुभ-प्रभात🌴🌺*

“𝗟𝗲𝘁 𝗶𝘁 𝗯𝗲 𝘀𝗼 𝗻𝗼𝘄…” 🌿

“ 𝗟𝗲𝘁 𝗶𝘁 𝗯𝗲 𝘀𝗼 𝗻𝗼𝘄…” 🌿 🌼 There is a beautiful ancient Chinese story about a wise old farmer who lived in a small village. He had a beautiful horse—his only wealth and companion. One day, the horse ran away. The villagers gathered around him with sympathy and said, “Oh, what a misfortune… you have lost your only horse.” The man smiled and replied, “Wait… something deeper is being fulfilled.” ✨ A few days later, the horse returned… and with it came several wild horses. The villagers were amazed and said, “How fortunate you are! This is great luck!” The man simply said, “Wait… something deeper is being fulfilled.” 🌿 Soon after, the man’s son tried to ride one of the wild horses. He fell and broke his leg. Again, the villagers came with concern, “Oh, how unfortunate… such a young, strong boy… now severely injured.” The old man calmly said: “Wait… something deeper is being fulfilled.” 💫 Not long after, the king announced war and ordered all young men to join the army. But th...

ALL THE DESTRUCTIVE WORDS BEGIN WITH THE* *LETTER "D"???*

* ऐसा क्यों है कि सभी नुकसान पहुंचाने वाले शब्द "D" अक्षर से शुरू होते हैं???*   *HOW COME ALL THE DESTRUCTIVE WORDS BEGIN WITH  THE* *LETTER "D"???*   *Check this out:*  Disease Destroy Delete Divorce Disappoint Death Disaster Debt Disrupt Demise Dementia Depression Demons Devil Dubious Diarrhea Demolish Doubt Dangerous Defeat Desperate Deform Dispute Detention Drunkard Dracula Distress Disable Devour Diabolic Distrust Distract Diabetes Disagree Deficit Defecate Dismember Dislocate Disorganize One more …….. *DONALD TRUMP* 😳😳😜🤣🤣🤣

आज का सुभाषित।

 आज का सुभाषित। चलचित्तं काम वित्तं चलज्जीवान् यौवनम् | क्लेचलमिदं सर्वं कीर्तिर्यस्य सजीवति || भावार्थ - मनुष्य का मन (मन की भावनाएँ) परिवर्तनशील है और धन संपत्ति है, युवा अवस्था तथा जीवन भी चलायमान है | ये सभी चलायमान (अस्थाई) हैं, परन्तु किसी व्यक्ति द्वारा अपने शुभ कर्मों से अर्जित उसकी कीर्ति (प्रसिद्धि) सदा बनी रहती है | चलचित्तं चलो वित्तं चलज्जीवनां यौवनम्। चलाचलमिदं सर्वं कीर्तिर्यस्य सजीवति। चाला = परिवर्तनशील। चित्तम् = मन, विचार। चलाओ = 'चला' के समान। विट्टम ​​= धन, चलजजीवन = चल + जीवन। जीवन = जीवन. यौवनम् = युवा। चलाचलमिदम् = चलाचलम् + इदम्। चलचलम् = इधर-उधर घूमने वाला, परिवर्तनशील। इदम्=यह। सर्वम् = सर्वम्। कीर्तिरयस्य = कीर्तिः + यस्य। कीर्तिः = यश। यस्य = जिसका। स = वह। जीवति = जीवित रहता है। अर्थात् मनुष्य का मन (विचार) परिवर्तनशील है, और उसी प्रकार उसका धन और यौवन भी। ये सब परिवर्तनशील हैं और स्थायी नहीं हैं, परन्तु व्यक्ति द्वारा अपने नेक कर्मों से अर्जित यश सदा बना रहता हैl