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! व्यर्थ का क्रोध !

2️⃣5️⃣❗0️⃣1️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣ * ♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*           *!! व्यर्थ का क्रोध !!* °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° एक साँप, एक बढ़ई की औजारों वाली बोरी में घुस गया। घुसते समय, बोरी में रखी हुई बढ़ई की आरी उसके शरीर में चुभ गई और उसमें घाव हो गया, जिससे उसे दर्द होने लगा और वह विचलित हो उठा। गुस्से में उसने, उस आरी को अपने दोनों जबड़ों में जोर से दबा दिया। अब उसके मुख में भी घाव हो गया और खून निकलने लगा। अब इस दर्द से परेशान हो कर, उस आरी को सबक सिखाने के लिए, अपने पूरे शरीर को उस साँप ने उस आरी के ऊपर लपेट लिया और पूरी ताकत के साथ उसको जकड़ लिया। इस से उस साँप का सारा शरीर जगह जगह से कट गया और वह मर गया। ठीक इसी प्रकार कई बार, हम तनिक सा आहत होने पर आवेश में आकर सामने वाले को सबक सिखाने के लिए, अपने आप को अत्यधिक नुकसान पहुंचा देते हैं। *शिक्षा:-* क्रोध से हानि और पछतावे के अतिरिक्त कुछ और प्राप्त नहीं होता।             *सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।* *जिसका मन मस्त है - उसके पास समस...

Navagunjara ,an avTar of Shree Krishna🙏

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The Navagunjara is a Puranic creature from the Odia version of the Mahabharata, composed of nine different animals. It appears before Arjuna during his penance, and is later revealed to be a manifestation of Lord Vishnu (or Lord Jagannath) according to Hindu mythology. The story emphasizes the concept of acceptance and the unity of diverse life forms. Navagunjara – A creature composed of nine different Animals: In the Holy book of  Mahabharata, there is mention of  Navagunjara as a creature composed of nine different animals. The animal is a common motif in the Patachitra painting. Pattachitra is one famous art form of Odisha. Navagunjara is considered as a form of Lord Vishnu or Lord Jagannath. It is considered a variant of the Virat-rupa (Omnipresent or vast) form of Lord Krishna, that he displays to Arjuna, as mentioned in the Bhagavad Gita a part of the epic Mahabharata. The version of the Mahabharata, written by the Odia poet Sarala Dasa narrates the legend of...

आशा*_

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_ * आशा*_ 21 मार्च 1980 निर्माता- जे ओम प्रकाश निर्देशक- जे ओम प्रकाश गीत- आनंद बक्शी संगीत- लक्ष्मीकांत, प्यारेलाल कलाकार- जितेंद्र, रीना रॉय, रामेश्वरी, गिरीश कर्नाड, सुलोचना लाटकर, दुलारी, सुधीर दलवी, मास्टर भगवान, सुंदर, यूनुस परवेज़, शक्ति कपूर                                     यह एक ब्लॉकबस्टर फ़िल्म थी.. रीना रॉय के अभिनय की बहोत तारीफ हुई जिसने उन्हें टॉप की नायिकाओं में स्थान दिलाया.. फ़िल्म रीना रॉय के करियर में एक मील का पत्थर साबित हुई ये फ़िल्म.. आलोचकों और प्रशंसकों से उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें शानदार समीक्षा मिली.. फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड में उन्हें बेस्ट अभिनेत्री के लिए नामांकन भी मिला.. ऋतिक रोशन इस फ़िल्म के एक गीत में डांस करते हुए नजर आते हैं.. उन्हें बिना खबर के इसको शूट किया गया.. ये उनका पहला ऑन स्क्रीन शॉट था.. जे ओम प्रकाश ने अपने कैमरा टिम से उनका चुपके से छायांकन करने के लिए कहा था.. उनका डांस देखकर सभी यूनिट ख़ुशी से ताली बजाने लगा.. जितेंद्र ने जे ओम प्रक...

!! नेत्रहीन संत !!*

*ॐ1️⃣8️⃣❗0️⃣1️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣ * ♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*              *!! नेत्रहीन संत !!* °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° एक बार एक राजा अपने सहचरों के साथ शिकार खेलने जंगल में गया था। वहाँ शिकार के चक्कर में एक दूसरे से बिछड़ गये और एक दूसरे को खोजते हुये राजा एक नेत्रहीन संत की कुटिया में पहुँच कर अपने बिछड़े हुये साथियों के बारे में पूछा। नेत्र हीन संत ने कहा महाराज सबसे पहले आपके सिपाही गये हैं, बाद में आपके मंत्री गये, अब आप स्वयं पधारे हैं। इसी रास्ते से आप आगे जायें तो मुलाकात हो जायगी। संत के बताये हुये रास्ते में राजा ने घोड़ा दौड़ाया और जल्दी ही अपने सहयोगियों से जा मिला और नेत्रहीन संत के कथनानुसार ही एक दूसरे से आगे पीछे पहुंचे थे।   यह बात राजा के दिमाग में घर कर गयी कि नेत्रहीन संत को कैसे पता चला कि कौन किस ओहदे वाला जा रहा है। लौटते समय राजा अपने अनुचरों को साथ लेकर संत की कुटिया में पहुंच कर संत से प्रश्न किया कि आप नेत्रविहीन होते हुये कैसे जान गये कि कौन जा रहा है, कौन आ रहा है ? राजा की बात सुन कर नेत्रहीन ...

मकर संक्रांति 2026:

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मकर संक्रांति 2026: आखिर क्यों मनाया जाता है यह महापर्व? जानिये इसके पीछे के 5 बड़े कारण!     आज यानी 14 जनवरी को पूरे भारत में मकर संक्रांति का उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे का वास्तविक महत्व क्या है? यह केवल पतंग उड़ाने या खिचड़ी खाने का दिन नहीं है, इसके पीछे गहरे वैज्ञानिक और आध्यात्मिक रहस्य छिपे हैं: 1️⃣ सूर्य का मकर राशि में प्रवेश (ज्योतिषीय महत्व)  'संक्रांति' का अर्थ है संक्रमण या प्रवेश। इस दिन सूर्य देव धनु राशि को छोड़कर अपने पुत्र शनि की राशि 'मकर' में प्रवेश करते हैं। ज्योतिष शास्त्र में इसे बहुत शुभ माना जाता है क्योंकि यह सौर वर्ष के एक नए अध्याय की शुरुआत है। 2️⃣ उत्तरायण का प्रारंभ: अंधकार से प्रकाश की ओर  इस दिन से सूर्य 'उत्तरायण' होते हैं। वैज्ञानिक रूप से देखें तो अब से दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। इसे अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है। इसी दिन से 'खरमास' समाप्त होता है और सभी शुभ व मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। 3️⃣ पिता-पुत्र का पावन मिलन (पौराणिक कथा)  कहा जा...

मौनी अमावस्या व त्रिवेणी अमावस आज 🙏

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मौनी अमावस्या व त्रिवेणी अमावस आज  ************************************ सनातन धर्म में प्रत्येक तिथि का अपना आध्यात्मिक महत्व है, परंतु अमावस्या को विशेष रूप से स्नान, दान, तर्पण और पितृ शांति के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। इन्हीं अमावस्या तिथियों में मौनी अमावस्या को अन्य अमावस्या तिथियों की तरह ही पुण्यदायी अमावस्या कहा गया है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाई जाने वाली यह तिथि आत्मशुद्धि, मौन साधना और पितरों के कल्याण का अनुपम अवसर प्रदान करती है।  मौनी अमावस्या को माघी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन मौन रहकर किए गए जप-तप और सेवा कार्य साधक को विशेष पुण्य प्रदान करते हैं। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि इस दिन किया गया स्नान और दान मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करता है। मौनी अमावस्या 2026 कब है? ================================ वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि का शुभारंभ 18 जनवरी की रात 12 बजकर 03 मिनट से होगा और इसका समापन 19 जनवरी की रात 1 बजकर 21 मिनट पर होगा। उदयातिथि की मान्यत...

*!! किसान और लोमड़ी !!*

1️⃣5️⃣❗0️⃣1️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣ *♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*         *!! किसान और लोमड़ी !!* °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° एक बार एक किसान जंगल में लकड़ी बिनने गया तो उसने एक अद्भुत बात देखी। एक लोमड़ी के दो पैर नहीं थे, फिर भी वह खुशी खुशी घसीट कर चल रही थी। यह कैसे ज़िंदा रहती है जबकि किसी शिकार को भी नहीं पकड़ सकती, किसान ने सोचा। तभी उसने देखा कि एक शेर अपने दांतो में एक शिकार दबाए उसी तरफ आ रहा है। सभी जानवर भागने लगे, वह किसान भी पेड़़ पर चढ़ गया। उसने देखा कि शेर, उस लोमड़ी के पास आया। उसे खाने की जगह, प्यार से शिकार का थोड़ा हिस्सा डालकर चला गया। दूसरे दिन भी उसने देखा कि शेर बड़े प्यार से लोमड़ी को खाना देकर चला गया। किसान ने इस अद्भुत लीला के लिए भगवान का मन में नमन किया। उसे अहसास हो गया कि भगवान जिसे पैदा करते हैं उसकी रोटी का भी इंतजाम कर देते हैं। यह जानकर वह भी एक निर्जन स्थान में चला गया और वहां पर चुपचाप बैठ कर भोजन का रास्ता देखता। कई दिन गुज़र गए, कोई नहीं आया। वह मरणासन्न होकर वापस लौटने लगा। तभी उसे एक विद्वान महात्मा मिले। उन्होंने उसे भोजन ...