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*!! किसान और लोमड़ी !!*

1️⃣5️⃣❗0️⃣1️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣ *♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*         *!! किसान और लोमड़ी !!* °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° एक बार एक किसान जंगल में लकड़ी बिनने गया तो उसने एक अद्भुत बात देखी। एक लोमड़ी के दो पैर नहीं थे, फिर भी वह खुशी खुशी घसीट कर चल रही थी। यह कैसे ज़िंदा रहती है जबकि किसी शिकार को भी नहीं पकड़ सकती, किसान ने सोचा। तभी उसने देखा कि एक शेर अपने दांतो में एक शिकार दबाए उसी तरफ आ रहा है। सभी जानवर भागने लगे, वह किसान भी पेड़़ पर चढ़ गया। उसने देखा कि शेर, उस लोमड़ी के पास आया। उसे खाने की जगह, प्यार से शिकार का थोड़ा हिस्सा डालकर चला गया। दूसरे दिन भी उसने देखा कि शेर बड़े प्यार से लोमड़ी को खाना देकर चला गया। किसान ने इस अद्भुत लीला के लिए भगवान का मन में नमन किया। उसे अहसास हो गया कि भगवान जिसे पैदा करते हैं उसकी रोटी का भी इंतजाम कर देते हैं। यह जानकर वह भी एक निर्जन स्थान में चला गया और वहां पर चुपचाप बैठ कर भोजन का रास्ता देखता। कई दिन गुज़र गए, कोई नहीं आया। वह मरणासन्न होकर वापस लौटने लगा। तभी उसे एक विद्वान महात्मा मिले। उन्होंने उसे भोजन ...

Birth Anniversary of Swami Vivekananda.🙏

Today is the Birth Anniversary of Narendranath Datta,  whom the World recognizes and Adores as Swami Vivekananda. He was a Great Scholar, Hindu Spiritual Leader, Philosopher, Teacher, Orator par excellence. He was responsible for propagating Vedanta philosophy to The Western World, establishing Hinduism as a Major World Religion and spreading Inter Faith Awareness. He has established Ramakrishna Mission and Ramakrishna Mutt in honour of his Guru Ramakrishna Paramahamsa. Swami Vivekananda became well known after he  addressed the World Congress of Religions held at Chicago in the year 1893 where he started his Address with " *Sisters and Brothers of America",* for which he got a Standing Ovation of over 2 minutes. Some of his famous quotes are Awake, Arise and stop not till the goal is reached. All power is within. You can do anything and everything. We are what our thoughts have made us so take care of what you think. Have faith in yourself. In a conflict between the heart an...

स्वामी विवेकानंद जी 🙏

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*_ ꧁!! ॐ सुरभित नवप्रभात् में हरि कृपा 🌺!!* *स्वामी विवेकानंद ने युवाओं के लिए कहा था ''उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाए''। वे युवाओं में आशा और उम्मीद देखते थे। उनके लिए युवा पीढ़ी परिवर्तन की अग्रदूत है। उन्होंने कहा था- “युवाओं में लोहे जैसी मांसपेशियां और फौलादी नसें हैं, जिनका हृदय वज्र तुल्य संकल्पित है।* *भारत में हम 12 जनवरी स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाते हैं। यह दिन समाज में युवाओं के योगदान को याद करने का दिन है। यह दिन युवाओं को दृढ़ रहने और जीवन में महान लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करने का भी दिन है।*🍁         *_꧁ ॥ सदैव प्रसन्न और आशावान रहिए,_* *_जिसका मन मस्त है उसके पास समस्त है_*  *_जो प्राप्त है पर्याप्त है॥꧂_*🍁

Katti and Batti*

* Katti and Batti*  Two small words. Big emotional history.  Almost every Indian childhood has these two phases built into it.  Katti was our first experience of emotional withdrawal.  No shouting. No explanations. Just silence with intent.  “I am not talking to you.” Translation: I am hurt, but I don’t know how to say it.  And batti? That was repair.  Awkward. Unspoken. Immediate. No apology speeches. No postmortems. One shared chocolate. One stolen smile. One “chal na, jaane de na” and the world was okay again.  As children, we mastered emotional regulation without knowing the word.  But somewhere along the way, we grew up and complicated it.  As adults, katti becomes emotional distancing.  Ghosting. Passive aggression. Unread messages. Cold politeness.  And batti?  That becomes hard. Egos grow where innocence once lived. Silence stretches longer. We don’t say, “You hurt me.”  We say, “It is fine,” and mean the oppo...

आज का प्रेरक प्रसंग 🙏

*🌞🌞 शुभ प्रभात 🌞🌞* *"स्वभाव" वो स्नान है...* *जिससे रिश्ते महकते हैं...* *"सम्मान" वो दान है...* *जिससे रिश्ते प्रगाढ़ होते हैं...* *"कर्म" वो पूजा है...* *जिससे भाग्य बदलते हैं...* *और...* *"धीरज" वो मंदिर है...,* *जिसमें भगवान प्रार्थना सुनते हैं...!* *🙏🏻जय श्री राधे कृष्ण 🙏🏻* 1️⃣1️⃣❗0️⃣1️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣ *♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*         *!! अंधा व्यक्ति और लालटेन !!* °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° दुनिया में तरह-तरह के लोग होते हैं. कुछ तो ऐसे होते हैं, जो स्वयं की कमजोरियों को तो नज़रंदाज़ कर जाते हैं किंतु दूसरों की कमजोरियों पर उपहास करने सदा तत्पर रहते हैं. वास्तविकता का अनुमान लगाये बिना वे दूसरों की कमजोरियों पर हँसते हैं और अपने तीखे शब्दों के बाणों से उन्हें ठेस पहुँचाते हैं. किंतु जब उन्हें यथार्थ का तमाचा पड़ता है, तो सिवाय ग्लानि के उनके पास कुछ शेष नहीं बचता. आज हम आपको एक अंधे व्यक्ति की कहानी बता रहे हैं, जिसे ऐसे ही लोगों के उपहास का पात्र बनना पड़ा. एक गाँव में एक अंधा व्यक्ति रहता था. वह रात में जब भी बा...

आप की स्वस्त जीवन के लिए

🕉️🙏🧘‍♂️आयुर्वेद के अनुसार वर्ष के सबसे ठंडे 14 दिन: शरीर को बचाने और सशक्त बनाने का स्वर्णकाल! इन दिनों क्या करें, क्या न करें  🧘‍♂️🧘‍♂️🧘‍♂️🧘‍♂️🧘‍♂️🧘‍♂️ जब शीत ऋतु अपने चरम पर होती है, तब आयुर्वेद इसे केवल ठंड का मौसम नहीं, बल्कि शरीर की अग्नि, बल और रोग-प्रतिरोधक क्षमता की परीक्षा का समय मानता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्ष के सबसे ठंडे 14 दिन को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया गया है। यह समय प्रायः पौष–माघ संधि (जनवरी के आसपास) आता है, जब सूर्य की उष्णता न्यूनतम और वातावरण में शीत अधिकतम होता है। 8 जनवरी से 21 जनवरी तक -️ यह तिथियाँ हर वर्ष 1–2 दिन आगे-पीछे हो सकती हैं, लेकिन यही काल सबसे अधिक ठंड वाला माना जाता है। ❄️ आयुर्वेद क्या कहता है इन 14 दिनों के बारे में? आयुर्वेद के अनुसार, जब बाहरी ठंड बढ़ती है, तब शरीर की जठराग्नि (Digestive Fire) स्वाभाविक रूप से प्रबल हो जाती है, क्योंकि शरीर अंदर की गर्मी को बचाने का प्रयास करता है। यही कारण है कि इन दिनों भारी, स्निग्ध और पौष्टिक आहार पचाने की क्षमता बढ़ जाती है। 📜 आयुर्वेदिक श्लोक “शिशिरे वर्धते वह्निः पवनश्च प्रकोप्यते...

में सच बोल रही हूं 🙏

मात्र 8-10 वर्ष पहले मैं भी एक सामान्य व्यक्ति था,  मुझे भी औरों की तरह नेहरू, गांधी, गांधी परिवार तथा हिन्दू मुस्लिम भाई भाई जैसे नारे अच्छे लगते थे। 🙌👋 मगर ..... मगर ... इन 8-10 वर्षों में विभिन्न माध्यमों से मुझे कुछ ऐसे सत्य पता चले जो हैरान करने वाले थे। 1. सोशल मीडिया से मुझे यह पता चला कि "पत्रकार" निष्पक्ष नहीं होते। वे भी किसी मकसद/व्यक्तिगत स्वार्थ से जुड़े होते हैं। 2. लेखक, साहित्यकार भी निष्पक्ष नहीं होते। वे भी किसी खास विचारधारा से जुड़े होते हैं। 3. साहित्य अकादमी, बुकर, मैग्ससे पुरस्कार प्राप्त बुद्धिजीवी भी निष्पक्ष नहीं होते। 4. फिल्मों के नाम पर एक खास विचारधारा को बढ़ावा दिया जाता है। बालीबुड का सच पता चला। 5. हिन्दू धर्म को सनातन धर्म कहते हैं और देश का नाम हिंदुस्तान है, क्योंकि यह हिंदुओं का इकलौता देश है। 6. हिन्दू शब्द सिंधु से नहीं (ईरानियों द्वारा स को ह बोलने से) नहीं आया बल्कि "हिन्दू" शब्द "ऋग्वेद" में लाखों वर्ष पूर्व से ही वर्णित था। 7. जातिवाद, बाल विवाह, पर्दा प्रथा हजारों वर्ष पूर्व सनातनी नहीं बल्कि मुगलों के आगमन से उप...