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एक साधारण वस्तु से असाधारण संदेश ❤️

❤️ हमने उनसे पूछा  “क्या हुआ?” वे बोले “जूते ने काट लिया।” हम हैरान रह गए… अरे! क्या जूता भी काटता है? एक दिन उन्हें जूते में तेल लगाते देखा। हमने पूछा  “अब क्या हुआ?” वे बोले “जूता चूं-चूं करता है।” वाह! मतलब जूता बोलता भी है! 😄 फिर एक दिन किसी के बारे में कहते सुना , “वो तो बस जूतों का यार है।” तब समझ आया कि जूते दोस्ती भी निभाते हैं। कल चाचा जी बेटे को डांट रहे थे  “तू तो जूते खाए बिना मानेगा नहीं!” तब पता चला कि जूते खाए भी जाते हैं! 😄 होली पर देखा कि एक मूर्ख को गधे पर बैठाकर गले में जूतों की माला पहनाई गई। तब समझ आया कि जूते सम्मान देने के काम भी आते हैं! 😂 फुटबॉल में सबसे अधिक गोल करने वाले खिलाड़ी को “गोल्डन बूट” दिया जाता है। वाह! पुरस्कार में भी सोने का जूता! 👞 किसी ने बताया कि विदेशी फ़िल्म और टीवी जगत में भी श्रेष्ठ कलाकारों को “गोल्डन बूट अवॉर्ड” दिया जाता है। अब समझ नहीं आया कि सम्मान अभिनेता का हो रहा है या जूते का! 😄 जब किसी को मिर्गी का दौरा पड़ता है, तो लोग कहते हैं  “जूता सुंघाओ!” तब ज्ञान मिला कि जूता औषधि भी है! 😅 शादी में दूल्हे की सालियाँ...

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The Anti-Bucket List: The Freedom of Not Wanting Everything Author : Dr Prasad Rajhans 🦢  A few years ago, success was easier to define. Study well. Get a good job. Build a family. Live a respectable life. Today, success appears to have expanded in hundreds of directions. Your friends are running marathons. Someone has completed an Ironman. A colleague is posting photographs from the Himalayas. Another is skydiving. Someone else is visiting remote temples across the world. One friend has become a wildlife photographer. Another has learned guitar at 45. Yet another is practicing yoga in Bali. Open social media for ten minutes, and it can feel as if everyone is living extraordinary lives. And slowly, without realizing it, a thought enters the mind: Am I missing out? Maybe I should travel more. Maybe I should trek. Maybe I should run a marathon. Maybe I should learn music. Maybe I should visit more countries. Maybe I should do something remarkable. The list keeps growing. That is the...

राधे राधे! 🙏🌸

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🌸 श्री लाड़ली जू और निर्धन वृद्धा की मार्मिक कथा 🌸 बरसाना धाम में एक वृद्धा रहती थी। उसका कोई अपना नहीं था। न धन था, न परिवार। उसका जीवन केवल एक ही सहारे पर टिका था—श्री लाड़ली जू सरकार। प्रतिदिन वह प्रातःकाल उठकर मंदिर के बाहर बैठ जाती और दूर से ही हाथ जोड़कर कहती— "लाड़ली! मेरे पास तुम्हें चढ़ाने के लिए कुछ नहीं है, बस मेरा प्रेम स्वीकार कर लो।" वृद्धा इतनी गरीब थी कि कई बार उसे स्वयं भोजन नहीं मिलता था, परन्तु मंदिर जाते समय वह एक फूल अवश्य ले जाती। कभी रास्ते से तोड़ा हुआ जंगली फूल, कभी तुलसी का एक पत्ता। एक दिन वृद्धा बहुत बीमार पड़ गई। कई दिनों तक मंदिर नहीं जा सकी। बिस्तर पर लेटे-लेटे उसकी आँखों से आँसू बहते रहे। वह रोते हुए बोली— "हे बरसाने वाली! अब मेरे चरणों में इतनी शक्ति नहीं कि मैं तेरे दर्शन को आ सकूँ। लगता है इस बार बिना दर्शन किए ही प्राण निकल जाएंगे।" उस रात उसे स्वप्न आया। उसने देखा कि एक दिव्य किशोरी, गुलाबी वस्त्र धारण किए, मधुर मुस्कान के साथ उसके कक्ष में आई हैं। उनके मुख पर अद्भुत करुणा झलक रही थी। उन्होंने वृद्धा का हाथ पकड़कर क...

अमृत कथा*

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* अमृत कथा* रामायण के जिस 'ऋष्यमूक पर्वत' पर श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता हुई थी, क्या आप जानते हैं कि वह पर्वत असल में लाखों ऋषियों के शवों से बना था? 😳 ⛰️ क्या आप जानते हैं 'ऋष्यमूक पर्वत' का निर्माण कैसे हुआ था? 🛕 हम सभी ने रामायण में 'ऋष्यमूक पर्वत' के बारे में अवश्य सुना है। मान्यता है कि यह पर्वत आज के कर्नाटक राज्य के हम्पी में स्थित है, जो रामायण काल की 'किष्किंधा नगरी' हुआ करती थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस पर्वत के बनने के पीछे लाखों ऋषियों के बलिदान की एक अत्यंत मार्मिक कथा छिपी है? आइए जानते हैं... 👇 🩸 मूक ऋषियों का बलिदान और रावण का क्रोध कथाओं के अनुसार, जब रावण के अत्याचारों से त्रिलोक त्राहि-त्राहि कर रहा था, तब संसार भर के लाखों ऋषियों ने श्रीहरि विष्णु को अवतार लेने के लिए विवश करने हेतु एक घोर तपस्या आरंभ की। उन्होंने निश्चय किया कि वे एक ही स्थान पर मौन (मूक) खड़े रहकर तपस्या करेंगे। एक दिन रावण अपनी सेना के साथ वहाँ से गुज़रा। लाखों ऋषियों को मौन खड़ा देख उसने प्रश्न किए, किन्तु मौन व्रत के कारण किसी ने उत्तर नहीं द...

इसमें महंगाई कहाँ है*

*इसमें महंगाई कहाँ है* *यह बहुत चिंता की बात है, देश मुश्किल हालात से गुज़र रहा है..* *कार शोरूम में जाओ, वहाँ नए मॉडल के लिए वेटिंग लिस्ट लगी है। कस्टमर्स को नई कारों के लिए छह महीने इंतज़ार करना पड़ता है।* *अगर आप किसी रेस्टोरेंट में जाते हैं, तो आपको खाली टेबल नहीं मिलती। कई रेस्टोरेंट में लाइनें लगी हैं।* *शॉपिंग मॉल में इतनी भीड़ है कि पार्किंग की जगह नहीं है।* *कई मोबाइल कंपनियों के मॉडल आउट ऑफ़ स्टॉक हैं, एप्पल लॉन्च होते ही आउट ऑफ़ स्टॉक हो रहा है।* *ऑनलाइन शॉपिंग के समय और वर्किंग डेज़ में भी, बाज़ारों में पैर रखने की जगह नहीं होती। हर दिन जाम जैसी हालत हो जाती है।* *ऑनलाइन शॉपिंग इंडस्ट्री फल-फूल रही है....* *लेकिन लोग कहते हैं कि पेट्रोल के दाम बढ़ने से उनकी कमर टूट गई है।*  *जब मेरे घर में फालतू लाइट जलती हैं, पंखे चलते हैं, T.V चलता है, तो मुझे कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन जब बिजली का बिल बढ़ता है, तो मेरी आत्मा अंदर से रोती है।* *जब मेरे बच्चे 16 डिग्री सेल्सियस पर AC चलाकर और कंबल ओढ़कर सोते हैं तो मैं कुछ कह नहीं पाता लेकिन बिजली के दाम बढ़ने से मेरा पारा चढ़ जाता है...

जय सनातन 🚩🚩

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रूस के सबसे पुराने शहर में खुदाई के दौरान श्रीविष्णु एवं अन्य देवी देवताओं की मूर्तियाँ मिली......... रूस के #वोल्गा_क्षेत्र के एक पुराने गांव में खुदाई के दौरान श्री विष्णु जी की प्राचीन मूर्ति मिली है, जो प्राचीन रूस की उत्पत्ति पर प्रचलित इतिहास के बारे में सवाल उठाती है.... Staraya (Old) के Maina गाँव में मिली मूर्ति VII-X सदी ईस्वी पूर्व की है। Ulyanovsk क्षेत्र में Staraya Maina गांव 1700 साल पहले एक अत्यधिक आबादी वाला शहर था, जो कीव से बहुत पुराना था, अब तक यह सभी रूसी शहरों की मां माना जाता था। अर्थात सबसे पुराना शहर और वहां से भगवान विष्णु की मूर्ति मिलना, कम बड़ी बात नही है ।  इतना प्राचीन इतिहास अगर किसी अन्य धर्म का होता, तो वह हमें किताब टीवी सब में बताए जाते लेकिन हिन्दूओं को यह सुविधा तो मिलने से रही, लेकिन हिन्दू तो ऐसी खबरों को आम लोगो तक शेयर तक नही करते ।। प्राचीनता का जितना प्रचार होगा, लोग धर्म की ओर उतना ही खिंचे चले आएंगे ।। रूस में श्रीहरि की मूर्तियां मिलने की खबर गूगल पर सभी बड़े न्यूज एजेंसी की खबरों में मिल जाएगी, आप स्वयं भी चेक कर सकते है । ज...

जय सनातन🙏

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* खाना खाना बंद करके, भोजन लेना प्रारंभ करें*   *इस्लामिक शब्द "खान" से खाना बना है!*   *दोहा:* 'खाना' खाते खल सभी, संत करें 'आहार'!   सज्जन 'भोजन' को करे, भाषा क्रिया प्रकार!  *अर्थात:* खाना *दुष्ट* लोग खाते हैं, भोजन *सज्जन* लोग करते हैं और आहार *संत* लोग करते हैं। 1.*खाना - खाया जाता है...*  2.*भोजन - किया जाता है...* 3.*आहार - लिया जाता है..* खाना - काँटे चम्मच से खाया जाता है .. भोजन - एक दाहिने हाथ से किया जाता है .. आहार - दोनों हाथ से लिया जाता है. दूसरों का पेट काटकर अपना पेट भरना - खाना जीवन जीने के लिए पेट भरना - भोजन  त्याग, तपस्या, संयम और साधना के लिए पेट भरना - आहार *तो आज से हम सभी भोजन करेंगे और करवाएंगे*🚩 *जय श्री राम*🙏🙏🙏 🚩*जय सनातन वैदिक धर्म*🚩