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आप की स्वस्त जीवन के लिए

🕉️🙏🧘‍♂️आयुर्वेद के अनुसार वर्ष के सबसे ठंडे 14 दिन: शरीर को बचाने और सशक्त बनाने का स्वर्णकाल! इन दिनों क्या करें, क्या न करें  🧘‍♂️🧘‍♂️🧘‍♂️🧘‍♂️🧘‍♂️🧘‍♂️ जब शीत ऋतु अपने चरम पर होती है, तब आयुर्वेद इसे केवल ठंड का मौसम नहीं, बल्कि शरीर की अग्नि, बल और रोग-प्रतिरोधक क्षमता की परीक्षा का समय मानता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्ष के सबसे ठंडे 14 दिन को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया गया है। यह समय प्रायः पौष–माघ संधि (जनवरी के आसपास) आता है, जब सूर्य की उष्णता न्यूनतम और वातावरण में शीत अधिकतम होता है। 8 जनवरी से 21 जनवरी तक -️ यह तिथियाँ हर वर्ष 1–2 दिन आगे-पीछे हो सकती हैं, लेकिन यही काल सबसे अधिक ठंड वाला माना जाता है। ❄️ आयुर्वेद क्या कहता है इन 14 दिनों के बारे में? आयुर्वेद के अनुसार, जब बाहरी ठंड बढ़ती है, तब शरीर की जठराग्नि (Digestive Fire) स्वाभाविक रूप से प्रबल हो जाती है, क्योंकि शरीर अंदर की गर्मी को बचाने का प्रयास करता है। यही कारण है कि इन दिनों भारी, स्निग्ध और पौष्टिक आहार पचाने की क्षमता बढ़ जाती है। 📜 आयुर्वेदिक श्लोक “शिशिरे वर्धते वह्निः पवनश्च प्रकोप्यते...

में सच बोल रही हूं 🙏

मात्र 8-10 वर्ष पहले मैं भी एक सामान्य व्यक्ति था,  मुझे भी औरों की तरह नेहरू, गांधी, गांधी परिवार तथा हिन्दू मुस्लिम भाई भाई जैसे नारे अच्छे लगते थे। 🙌👋 मगर ..... मगर ... इन 8-10 वर्षों में विभिन्न माध्यमों से मुझे कुछ ऐसे सत्य पता चले जो हैरान करने वाले थे। 1. सोशल मीडिया से मुझे यह पता चला कि "पत्रकार" निष्पक्ष नहीं होते। वे भी किसी मकसद/व्यक्तिगत स्वार्थ से जुड़े होते हैं। 2. लेखक, साहित्यकार भी निष्पक्ष नहीं होते। वे भी किसी खास विचारधारा से जुड़े होते हैं। 3. साहित्य अकादमी, बुकर, मैग्ससे पुरस्कार प्राप्त बुद्धिजीवी भी निष्पक्ष नहीं होते। 4. फिल्मों के नाम पर एक खास विचारधारा को बढ़ावा दिया जाता है। बालीबुड का सच पता चला। 5. हिन्दू धर्म को सनातन धर्म कहते हैं और देश का नाम हिंदुस्तान है, क्योंकि यह हिंदुओं का इकलौता देश है। 6. हिन्दू शब्द सिंधु से नहीं (ईरानियों द्वारा स को ह बोलने से) नहीं आया बल्कि "हिन्दू" शब्द "ऋग्वेद" में लाखों वर्ष पूर्व से ही वर्णित था। 7. जातिवाद, बाल विवाह, पर्दा प्रथा हजारों वर्ष पूर्व सनातनी नहीं बल्कि मुगलों के आगमन से उप...

कुछ बातचीत

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मैंने  भगवान  से  कहा-  मेरे सब दोस्तों को आनेवाले वर्ष 2026 में खुश  रखना l …😋 …😋 …😋   …😋 …😋 भगवान  बोले-  ठीक  है,  पर  सिर्फ  4  दिन  के  लिए…… वो  चार  दिन  तू  बता…… …😋 …😋 …😋 …😋 …😋 मैंने  कहा  ठीक  है…… 1)  Summer  Day 2)  Winter  Day 3)  Rainy  Day 4)  Spring  Day …😋 …😋 …😋 …😋 ...😋 भगवान  confused  हो  गए  और  बोले-  नहीं  सिर्फ  3  दिन…… …😋 …😋 …😋 …😋 …😋 मैंने  कहा  ठीक  है…… 1)  Yesterday 2)  Today 3)  Tomorrow …😋 …😋 …😋 …😋 …😋 भगवान  फिर  confused  होकर  बोले-  सिर्फ  दो  दिन…… …😋 …😋 …😋 …😋 …😋 मैंने  कहा  ठीक  है…… 1)  Current Day            और 2)  Next  Day …😋 …😋 …😋 …😋 …😋 भगवान्  फिर  confused  होकर...

*!! व्यक्ति और नर्तकी !!*

0️⃣9️⃣❗0️⃣1️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣ *♨️ 0️⃣9️⃣❗0️⃣1️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣ *♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*             *!! व्यक्ति और नर्तकी !!* °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° किसी गाँव में एक धार्मिक व्यक्ति रहता था जो दिन भर लोगों को धर्म का उपदेश दिया करता था। उसी गाँव में एक नर्तकी थी, जो लोगों के सामने नाचकर उनका मन बहलाया करती थी। एक दिन गाँव में बाढ़ आ गयी और दोनों एक साथ ही मर गये। मरने के बाद जब ये दोनों यमलोक पहूँचे तो इनके कर्मों और उनके पीछे छिपी भावनाओं के आधार पर इन्हें स्वर्ग या नरक दिये जाने की बात कही गई। व्यक्ति खुद को स्वर्ग मिलने को लेकर पुरा आश्वस्त था। वहीं नर्तकी अपने मन में ऐसा कुछ भी विचार नहीं कर रही थी। नर्तकी को सिर्फ फैसले का इंतजार था। तभी घोषणा हुई कि व्यक्ति को नरक और नर्तकी को स्वर्ग दिया जाता है। इस फैसले को सुनकर व्यक्ति गुस्से से यमराज पर चिल्लाया और क्रोधित होकर पूछा, “यह कैसा न्याय है महाराज?, मैं जीवन भर लोगों को उपदेश देता रहा और मुझे नरक नसीब हुआ! जबकि यह स्त्री जीवन भर लोगों को रिझाने के लिये नाचती रही और इसे स...

जीवन की अंतिम परीक्षा:

जीवन की अंतिम परीक्षा: आपका अगला जन्म कहाँ होगा? क्या आपने कभी सोचा है कि मृत्यु के बाद हमारी चेतना, हमारा 'मैं' कहाँ जाता है? क्या अगला जन्म एक संयोग है, या इसके पीछे कोई गणित है? शास्त्र और संत मत कहते हैं कि जीवन एक लंबी यात्रा है, और मृत्यु उस यात्रा का 'अंतिम पड़ाव' नहीं, बल्कि अगली यात्रा का 'टिकट' है। मनुष्य अगली योनि में कैसे प्रवेश करता है, यह कोई ईश्वरीय दंड या पुरस्कार नहीं, बल्कि हमारे ही मन की अंतिम दशा का परिणाम है। यह नियम बिल्कुल सरल है: "जीवन भर जिसका ध्यान किया, अंत में वही गति प्राप्त हुई।" संत त्रिलोचन जी, अपनी दिव्य दृष्टि से हमें सावधान करते हैं कि मृत्यु के क्षण में हमारे मन में जो चित्र सबसे गहरा होता है, हमारी आत्मा उसी ढांचे (शरीर) में ढल जाती है। आइए, इस रहस्य को उन उदाहरणों के माध्यम से समझते हैं जो उन्होंने दिए हैं: १. धन का प्रहरी: सर्प योनि > अंति कालि जो लछमी सिमरै ऐसी चिंता महि जे मरै ॥ > सरप जोनि वलि वलि अउतरै ॥१॥   कल्पना कीजिए उस व्यक्ति की जिसने पूरा जीवन केवल धन जोड़ने, उसे गिनने और उसे छिपाकर रखने में बिता द...

कानों को ठंड से बचाना

* कानों को ठंड से बचाना जीवन रक्षा है* *कान हमारे शरीर की खिड़कियां हैं* सर्दियों की दस्तक होते ही हम भारी जैकेट और दस्ताने तो निकाल लेते हैं और कानों को खुला छोड़ देते हैं।   हमारे कान केवल सुनने के अंग नहीं हैं, बल्कि वे शरीर के 'थर्मोस्टेट' (तापमान नियंत्रक) की सबसे महत्वपूर्ण  कड़ी हैं।  चिकित्सा विज्ञान और आयुर्वेद दोनों ही मानते हैं कि कानों के जरिए घुसने वाली ठंड सीधे हमारे मस्तिष्क और हृदय प्रणाली को प्रभावित कर सकती है। कानों को ढकना हमारी सेहत के लिए 'सुरक्षा कवच' की तरह काम करता है। क्यों है कानों को बचाना इतना जरूरी इसलिए है कि कान की बनावट में मांसपेशियों या वसा (Fat) की कोई सुरक्षात्मक परत नहीं होती।  यहाँ की त्वचा के ठीक नीचे तंत्रिकाओं (Nerves) का जाल होता है।  जब ठंडी हवा सीधे कान के पर्दे और नलिका से टकराती है, तो यह शरीर के 'कोर टेम्परेचर' को तेजी से गिरा सकती है जिससे 'थर्मल शॉक' का खतरा बढ़ जाता है।  कानों के पीछे 'वेगस नर्व' (Vagus Nerve) की शाखाएं होती हैं। यहाँ अत्यधिक ठंड लगने पर यह नस उत्तेजित हो जाती है, जिससे अचानक चक्क...

विश्व के देशों की जनसंख्या देखें* 🙏

🌻🌹🌹🌻 *विश्व के देशों की जनसंख्या देखें*  अमेरिका    33.1 करोड़ रूस           14.6 करोड़ जर्मनी         8.5 करोड़ टर्की            8.4 करोड़ यू के            6.8 करोड़ फ्रांस           6.5 करोड़ इटली          6.1 करोड़ स्पेन            4.7 करोड़ पोलैंड          3.8 करोड़ रोमानिया     1.9 करोड़ नीदरलैंड      1.7 करोड़ ग्रीस            1.7 करोड़  बेल्जियम     1.2 करोड़ चैक रिपब्    1.1 करोड़ पुर्तगाल       1.1 करोड़ स्वीडन        1.0 करोड़ हंगरी           1.0 करोड़ स्विट्ज़रलैंड 0.9 करोड़ बलगेरिया    0.7 करोड़ डेन्मार्क       0.6 करोड़ यूरोप          6.0 करोड...