Story behind ..A Long Way Home.
1986 में भारत में एक पाँच साल का छोटा लड़का अपने बड़े भाई का इंतज़ार करते हुए रेलवे स्टेशन की बेंच पर सो गया। उसका भाई वापस ही नहीं आया। वो लड़का उसे ढूंढने के लिए एक खाली ट्रेन के डिब्बे में चढ़ गया, यह सोचकर कि शायद उसका भाई अंदर हो। वहाँ भी वो सो गया। जब उसकी आँख खुली, दरवाज़े बंद थे और ट्रेन चल रही थी। ट्रेन करीब दो दिन तक नहीं रुकी। जब रुकी, तो वो कोलकाता पहुँच चुका था — अपने घर से लगभग 1500 किलोमीटर दूर। वो इतना छोटा था कि अपना पूरा नाम नहीं जानता था, पढ़ नहीं सकता था और अपने गाँव का नाम भी नहीं बता सकता था। वो कई हफ्तों तक अकेला सड़कों पर भटकता रहा। रेलवे स्टेशन की बेंचों के नीचे सोता और जो थोड़ा-बहुत खाना मिलता, उससे गुज़ारा करता। बाद में उसे एक अनाथालय ले जाया गया और “लापता बच्चा” घोषित कर दिया गया। कोई भी यह पता नहीं लगा पाया कि वो कहाँ से आया था। कुछ समय बाद ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया से एक दंपत्ति ने उसे गोद ले लिया। उन्होंने उसे प्यार भरा घर दिया और उसकी नई ज़िंदगी शुरू हुई। उसका नाम बन गया Saroo Brierley। वो दुनिया के दूसरे छोर पर बड़ा हुआ। लेकिन उसने अपना अतीत ...