कानों को ठंड से बचाना
* कानों को ठंड से बचाना जीवन रक्षा है* *कान हमारे शरीर की खिड़कियां हैं* सर्दियों की दस्तक होते ही हम भारी जैकेट और दस्ताने तो निकाल लेते हैं और कानों को खुला छोड़ देते हैं। हमारे कान केवल सुनने के अंग नहीं हैं, बल्कि वे शरीर के 'थर्मोस्टेट' (तापमान नियंत्रक) की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। चिकित्सा विज्ञान और आयुर्वेद दोनों ही मानते हैं कि कानों के जरिए घुसने वाली ठंड सीधे हमारे मस्तिष्क और हृदय प्रणाली को प्रभावित कर सकती है। कानों को ढकना हमारी सेहत के लिए 'सुरक्षा कवच' की तरह काम करता है। क्यों है कानों को बचाना इतना जरूरी इसलिए है कि कान की बनावट में मांसपेशियों या वसा (Fat) की कोई सुरक्षात्मक परत नहीं होती। यहाँ की त्वचा के ठीक नीचे तंत्रिकाओं (Nerves) का जाल होता है। जब ठंडी हवा सीधे कान के पर्दे और नलिका से टकराती है, तो यह शरीर के 'कोर टेम्परेचर' को तेजी से गिरा सकती है जिससे 'थर्मल शॉक' का खतरा बढ़ जाता है। कानों के पीछे 'वेगस नर्व' (Vagus Nerve) की शाखाएं होती हैं। यहाँ अत्यधिक ठंड लगने पर यह नस उत्तेजित हो जाती है, जिससे अचानक चक्क...