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कृष्णा द्रौपदी संवाद🙏

18 दिन के युद्ध ने,  द्रोपदी की उम्र को 80 वर्ष जैसा कर दिया था ... शारीरिक रूप से भी और मानसिक रूप से भी शहर में चारों तरफ़ विधवाओं का बाहुल्य था..  पुरुष इक्का-दुक्का ही दिखाई पड़ता था  अनाथ बच्चे घूमते दिखाई पड़ते थे और उन सबकी वह महारानी द्रौपदी हस्तिनापुर के महल में निश्चेष्ट बैठी हुई शून्य को निहार रही थी ।  तभी, श्रीकृष्ण कक्ष में दाखिल होते हैं द्रौपदी  कृष्ण को देखते ही  दौड़कर उनसे लिपट जाती है ...  कृष्ण उसके सिर को सहलाते रहते हैं और रोने देते हैं  थोड़ी देर में,  उसे खुद से अलग करके समीप के पलंग पर बैठा देते हैं ।  द्रोपदी : यह क्या हो गया सखा ?? ऐसा तो मैंने नहीं सोचा था । कृष्ण : नियति बहुत क्रूर होती है पांचाली.. वह हमारे सोचने के अनुरूप नहीं चलती ! वह हमारे कर्मों को  परिणामों में बदल देती है.. तुम प्रतिशोध लेना चाहती थी और, तुम सफल हुई, द्रौपदी !  तुम्हारा प्रतिशोध पूरा हुआ... सिर्फ दुर्योधन और दुशासन ही नहीं,  सारे कौरव समाप्त हो गए  तुम्हें तो प्रसन्न होना चाहिए !  द्रोपदी: सखा,  तुम मेरे...

यह रचना दिल को छू गई।*

*यह रचना दिल को छू गई।*            तीन   पहर   तो   बीत   गये,            बस  एक  पहर ही बाकी है।            जीवन हाथों से फिसल गया,            बस  खाली  मुट्ठी  बाकी  है। सब  कुछ पाया इस जीवन में, फिर   भी   इच्छाएं  बाकी  हैं दुनिया  से  हमने   क्या  पाया, यह लेखा - जोखा बहुत हुआ,  इस  जग  ने हमसे क्या पाया, *बस   ये   गणनाएं   बाकी  हैं।*             इस भाग-दौड़  की  दुनिया में           हमको इक पल का होश नहीं,           वैसे तो  जीवन  सुखमय  है,           पर फिर भी क्यों संतोष नहीं ! क्या   यूं   ही  जीवन  बीतेगा, क्या  य...

प्रेम क्या है????

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प्रेम कोई भावना नहीं है, यह तुम्हारा स्वभाव है। जब तुम प्रेम में होते हो, तब तुम मांगते नहीं…  तुम स्वयं प्रसाद बन जाते हो। मंदिरों में जो प्रसाद मिलता है, वह बाहर से आता है। लेकिन प्रेम का प्रसाद भीतर से फूटता है— और जो भीतर से आता है, वही सत्य है, वही दिव्य है। लोग भगवान को ढूंढते हैं  पत्थरों में, शब्दों में, विधियों में… पर जिसने प्रेम को जान लिया, उसने पाया— भगवान कोई व्यक्ति नहीं, एक अनुभव है…  और वह अनुभव प्रेम है। इसलिए — प्रेम से बड़ा कोई प्रसाद नहीं, क्योंकि इसमें देने वाला भी मिट जाता है,  पाने वाला भी… और जो शेष बचता है, वही प्रेम है। 💞

Story behind ..A Long Way Home.

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1986 में भारत में एक पाँच साल का छोटा लड़का अपने बड़े भाई का इंतज़ार करते हुए रेलवे स्टेशन की बेंच पर सो गया। उसका भाई वापस ही नहीं आया। वो लड़का उसे ढूंढने के लिए एक खाली ट्रेन के डिब्बे में चढ़ गया, यह सोचकर कि शायद उसका भाई अंदर हो। वहाँ भी वो सो गया। जब उसकी आँख खुली, दरवाज़े बंद थे और ट्रेन चल रही थी। ट्रेन करीब दो दिन तक नहीं रुकी। जब रुकी, तो वो कोलकाता पहुँच चुका था — अपने घर से लगभग 1500 किलोमीटर दूर। वो इतना छोटा था कि अपना पूरा नाम नहीं जानता था, पढ़ नहीं सकता था और अपने गाँव का नाम भी नहीं बता सकता था। वो कई हफ्तों तक अकेला सड़कों पर भटकता रहा। रेलवे स्टेशन की बेंचों के नीचे सोता और जो थोड़ा-बहुत खाना मिलता, उससे गुज़ारा करता। बाद में उसे एक अनाथालय ले जाया गया और “लापता बच्चा” घोषित कर दिया गया। कोई भी यह पता नहीं लगा पाया कि वो कहाँ से आया था। कुछ समय बाद ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया से एक दंपत्ति ने उसे गोद ले लिया। उन्होंने उसे प्यार भरा घर दिया और उसकी नई ज़िंदगी शुरू हुई। उसका नाम बन गया Saroo Brierley। वो दुनिया के दूसरे छोर पर बड़ा हुआ। लेकिन उसने अपना अतीत ...

Story behind ..A Long Way Home.

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1986 में भारत में एक पाँच साल का छोटा लड़का अपने बड़े भाई का इंतज़ार करते हुए रेलवे स्टेशन की बेंच पर सो गया। उसका भाई वापस ही नहीं आया। वो लड़का उसे ढूंढने के लिए एक खाली ट्रेन के डिब्बे में चढ़ गया, यह सोचकर कि शायद उसका भाई अंदर हो। वहाँ भी वो सो गया। जब उसकी आँख खुली, दरवाज़े बंद थे और ट्रेन चल रही थी। ट्रेन करीब दो दिन तक नहीं रुकी। जब रुकी, तो वो कोलकाता पहुँच चुका था — अपने घर से लगभग 1500 किलोमीटर दूर। वो इतना छोटा था कि अपना पूरा नाम नहीं जानता था, पढ़ नहीं सकता था और अपने गाँव का नाम भी नहीं बता सकता था। वो कई हफ्तों तक अकेला सड़कों पर भटकता रहा। रेलवे स्टेशन की बेंचों के नीचे सोता और जो थोड़ा-बहुत खाना मिलता, उससे गुज़ारा करता। बाद में उसे एक अनाथालय ले जाया गया और “लापता बच्चा” घोषित कर दिया गया। कोई भी यह पता नहीं लगा पाया कि वो कहाँ से आया था। कुछ समय बाद ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया से एक दंपत्ति ने उसे गोद ले लिया। उन्होंने उसे प्यार भरा घर दिया और उसकी नई ज़िंदगी शुरू हुई। उसका नाम बन गया Saroo Brierley। वो दुनिया के दूसरे छोर पर बड़ा हुआ। लेकिन उसने अपना अतीत ...

प्रभात वंदन,,।*🙏

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*सप्रेंम श्री हरि स्मरण,!*   *प्रभात वंदन,,।* *जिंदगी का दूसरा नाम परिवर्तन है,अब चाहे परिवर्तन हम में हो, हमारे रिश्तों में हो, हमारे काम में हो, या संसार में हो, उसे अपनाना सीखना होगा.!*  *वैचारिक मतभेद भले ही कितने हो जायें, लेकिन उम्र का लिहाज और शब्दों की मर्यादा हमेशा रखनी चाहिए,*  *मुक्ति के तीन मार्ग..*  *1. सत्संग:- यदि हम नियमित रूप से सत्संग में जाते हैं तो हम अनुभव करते हैं  कि हमारे अन्दर बैठे "विकार" धीरे-धीरे कम हो रहे हैं और हमें एक दिन बुरे कामों से  स्वतः ही घृणा होने लगेगी..!* *2. सेवा:- यदि हम सेवा/परोपकार कर रहे हैं, तो हमारे पास किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं रहेगी, जो भी आवश्यकताऐं है, यथा समय पूरी होती जायेगी.!* *3. सुमिरण:- यदि हम अपने सतगुरु से प्राप्त "नाम" का सुमिरण निरंतर व बताये अनुसार कर रहें हैं, तो हम अनुभव करेंगे कि हमारे साथकोइ एक अलौकिक एक शक्ति सदा हमारी रक्षा के लिए तत्पर रहती है..!*   *ॐश्री परमात्मनै नंमः.!*   *नव भोर वंदन..*🙏💐

Two great Celebrities 🙏

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Two men. Two very different stages. Same quiet impact. Mohammed Rafi gave India a voice that could feel everything. Love, loss, devotion, joy. No noise, no ego. Just sur. And Sarvepalli Radhakrishnan gave India a mind that could think beyond the obvious. Teacher, philosopher, President. Grace without spectacle. No PR. No hype. No urgency to be seen. Just work that stayed. Somewhere between music and thought, they built a kind of legacy that doesn’t chase relevance. It quietly becomes it. #MohdRafi