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रिटायर्ड लोगों के लिए*

यह रिटायरमेंट के बाद खुशहाल और हेल्दी ज़िंदगी के लिए 36 सुझावों की लिस्ट है। यह एक जानी-मानी कंपनी के HR डिपार्टमेंट का सर्कुलेशन है। 1. अकेले ट्रैवल करने से बचें। 2. अपने जीवनसाथी के साथ ट्रैवल करें। 3. पीक आवर्स में बाहर जाने से बचें। 4. बहुत ज़्यादा एक्सरसाइज़ या वॉकिंग से बचें। 5. बहुत ज़्यादा पढ़ने, मोबाइल इस्तेमाल करने या TV देखने से बचें। 6. ज़्यादा दवाएँ लेने से बचें। 7. समय पर डॉक्टर के पास जाएँ और रेगुलर दवाएँ लें। 8. रिटायरमेंट के बाद प्रॉपर्टी डीलिंग से बचें। 9. हमेशा अपनी ID और ज़रूरी फ़ोन नंबर साथ रखें। 10. बीती बातों को भूल जाएँ और भविष्य की ज़्यादा चिंता न करें। 11. वही खाएँ जो आपको ठीक लगे, और धीरे-धीरे चबाएँ। 12. बाथरूम और टॉयलेट में सावधान रहें। 13. स्मोकिंग और शराब पीने से बचें, ये नुकसानदायक हैं। 14. अपनी अचीवमेंट्स के बारे में शेखी न बघारें।  15. रिटायरमेंट के बाद कुछ सालों तक खूब घूमें, फिर भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचें। 16. अपनी प्रॉपर्टी और एसेट्स के बारे में दूसरों से बात न करें। 17. अपनी कैपेसिटी और हेल्थ के हिसाब से एक्सरसाइज करें। 18. अगर आपको हाई BP या ...

राजस्थानी गणेश जी🙏

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राजस्थान की राजधानी जयपुर में अरावली की नाहरगढ़ पहाड़ी पर स्थित गढ़ गणेश मंदिर अपनी अनूठी परंपरा और इतिहास के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। इस मंदिर की स्थापना और बिना सूंड वाले गणेश जी का इतिहास जयपुर शहर की स्थापना से सीधे जुड़ा हुआ है: 18वीं शताब्दी (वर्ष 1730 के आसपास) में जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने 'अश्वमेध यज्ञ' का आयोजन कराया था। यज्ञ के पूरा होने के बाद, जयपुर (जैनगर) की स्थापना से पूर्व उन्होंने इस मंदिर की नींव रखी। शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म माता पार्वती के उबटन से हुआ था और शुरुआत में वह एक सामान्य मानव शिशु (बाल स्वरूप) के रूप में थे, जिनकी सूंड नहीं थी। महाराजा सवाई जयसिंह ने मंदिर में गणेश जी के इसी 'बाल गणेश' (विनायक) रूप को प्रतिष्ठित करवाया। बालक रूप होने के कारण इस प्रतिमा में सूंड नहीं है।  मंदिर को अरावली की सबसे ऊंची पहाड़ियों में से एक पर इस प्रकार बनाया गया कि बालक गणेश पूरे जयपुर शहर पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें। सिटी पैलेस (राजमहल) की ऊपरी मंजिलों और चंद्र महल से दूरबीन या नंगी आंखों ...

PIN कोड को अलविदा, 🙏

* PIN कोड को अलविदा, डाक विभाग लाया DigiPIN; अपना डिजिटल पता कैसे पता करें?* दिल्ली: पिन कोड का दौर, जो डाक पतों की पहचान हुआ करता था, अब खत्म हो गया है। इसकी जगह भारतीय डाक विभाग ने 'DigiPIN' नाम का एक डिजिटल पता सिस्टम शुरू किया है। अब देश में DigiPIN ही नया पता सिस्टम होगा। जहाँ पारंपरिक पिन कोड एक बड़े इलाके को कवर करते थे, वहीं 10 अंकों वाला DigiPIN सिस्टम आपके घर या बिज़नेस की सटीक लोकेशन बताता है। आइए जानते हैं कि पिन कोड और DigiPIN में क्या अंतर है। भारतीय डाक विभाग ने सटीक लोकेशन जानने के लिए DIGIPIN सिस्टम शुरू किया है। DigiPIN एक 10 अंकों का डिजिटल कोड है। पारंपरिक पिन कोड के उलट, जो एक बड़े इलाके को कवर करता था, DigiPIN सटीक लोकेशन की जानकारी देगा। यानी, इस DigiPIN के ज़रिए आपके घर या बिज़नेस की सही लोकेशन का पता लगाया जा सकता है। आप DigiPIN बनाने और कोड खोजने के लिए बनाई गई सरकारी वेबसाइट पर जाकर अपने घर का कोड पता कर सकते हैं। DigiPIN का फ़ायदा यह है कि यह चिट्ठी-पत्री को सही जगह पहुँचाएगा और एम्बुलेंस व फायर ब्रिगेड जैसी इमरजेंसी सेवाओं को लोकेशन समझकर सही जगह पहुँचन...

बहुत दुख की बात😢

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* बेटियों ने 5100 रुपये गूगल पे  किया फिर वीडियो कॉल पर किया पिता का अंतिम संस्कार, कहा टाइम नहीं है* *टाइम का फेर देखिए - मुंबई के मशहूर कपड़ा व्यापारी शिवचरण रामरत्न गुप्ता की सोनीपत के वृद्धाश्रम में हुई मौत - 3 बेटियों ने 5100 रुपये गूगल पे किए और बोली संस्कार की सारी वीडियो भेज देना*  महाराष्ट्र के मुंबई के रहने वाले मशहूर कपड़ा व्यापारी शिवचरण रामरत्न गुप्ता (74) की हरियाणा के सोनीपत में वृद्ध आश्रम में मौत हो गई। तीन साल से वे इस आश्रम में रह रहे थे। दो साल पहले इसी आश्रम में उनकी पत्नी ने अंतिम सांसें ली थीं। मंगलवार आश्रम स्टाफ ने उनकी मौत की जानकारी उनकी तीन टीचर बेटियों को दी। मगर, तीनों ने दूरी और समय का बहाना बनाकर अंतिम संस्कार में आने से मना कर दिया।* यही नहीं, 5100 रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कर अंतिम संस्कार सोनीपत में ही करने के लिए कहा। मुगाग्नि की बात आई तो तीनों ने कहा कि वीडियो कॉल पर दिखा देना। आश्रम संचालक आनंद कुमार के मुताबिक, एक पिता के प्रति उसकी संतानों की इस तरह की बेरुखी हमने आज तक नहीं देखी। बताया कि ​मोबाइल की स्क्रीन पर जब बेजान पिता का चे...

आप स्वयं चिंतनकरें 🙏

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🌼 जय श्रीकृष्ण🌼* ____________________   _*सब कुछ सीखना ही*_    *ज्ञान नहीं होता है,*_    *कुछ चीजों और बातों को*_    *नजरअंदाज करना भी*_       *ज्ञान ही है...*  *जीवन की किताबों पर,* *बेशक नया कवर चढ़ाइये;* *पर...बिखरे पन्नों को,* *पहले प्यार से चिपकाइये !!*____________________ *🔶♦️सुप्रभात♦️🔶*  🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 जीवन की सफलता क्या है? हमारे हृदय में सद्गुण आ जायँ, हमारे आचरण में सदाचार आ जाय, हमारा मुख भगवान की ओर मुड़ जाय! हमारे जीवन में दैवी गुण हो जाय और वह भगवदभजन की मूर्ती बन जाऐ 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 *कैसे होगा यह सब ?* *जैसे धरती में बोया गया बीज अपने समय पर ही अंकुरित होता है, और उसमें समय से ही फूल खिलते है, और फल भी समय से ही लगते हैं। वैसे ही हमारा शरीर भी एक क्षेत्र (खेत) हैं। जिसमें हम कर्मों के बीज बोते है। और कर्म बीज बन जाते है,, और समय आने पर ही सुख- और दुख रूपी फल के रूप में हमें मिलते है। बीज बोना ही केवल हमारे अधिकार में लेकिन फल कब, कहाँ, कैसे और किस रूप में मिलेगा यह किसी और के हाँथ में है। पहले ...

Old age is not a Disease

Many *illnesses* are not illnesses, but *normal aging*. A hospital director gave these tips to older people: You are not sick, you are aging. Many conditions you consider *illnesses* are not. They are signs that your *body* is aging. 1. *Poor memory* is not Alzheimer's; it is a self-protective mechanism of the aging brain. It is brain aging, not a disease. If you forget where you put your keys, but you can find them yourself, it is NOT dementia. 2. *Walking slowly* and having unsteady legs and feet is not paralysis, but muscle degeneration. The solution is NOT to take medication, but to *move constantly*. 3. *Insomnia* is not an illness; it is the brain adjusting its rhythm. It is a change in the sleep pattern. Do not take sleeping pills. Long-term dependence on sleeping pills and other sleep aids increases the risk of falls and cognitive decline. The best medicine for older adults to get restful sleep is to get more sun during the day and maintain a regular sleep schedule. 4. Body...

मित्रता दिवस की सुंदर लेख❤️

* मैं कभी इस बात से इत्तेफ़ाक नहीं रख पाया कि दोस्त हमेशा हम-उम्र ही होने चाहिए । ऐसा करना अपने आप को एक दायरे में कैद कर लेना है।* *अपनी विचारो को संकीर्ण कर लेना है !* *यह सही है कि हम-उम्रों के विचार, आदतें, शौक, फैशन* *सेंस , चुनैतियाँ, सुख दुख लगभग एक जैसे होते हैं क्योंकि हम सब जीवन के एक ही पड़ाव पर हैं।*  *मेरे कुछ अच्छे दोस्त मुझसे 7-8 साल साल छोटे हैं और कुछ दोस्त 10-15 या उससे भी ज्यादा बड़े। और मुझे इन सबके साथ जीवन को एक अलग नज़रिए से देखने का अवसर मिलता है। जो विज़न उनके पास है वो हमारे पास नहीं ,जो हमारे पास है वो उनके पास नहीं। अलग उम्र वालों की दोस्ती दोनों को समृद्ध करती है।*  *छोटे दोस्त टेक्निकली ज्यादा साउंड हैं ! प्रॉब्लम्स को एकदम अलहदा तरह से देखते हैं और सॉल्व करते हैं। जिन बातों पर हम बहुत स्ट्रेस लेते हैं! उनके लिए वो कोई मायने नहीं रखतीं। या फिर यू कहू कि हमारी उदासियों, बेचैनियों का सुकून हैं वो बच्चे* ❣️😘 *उनके साथ हम दुनिया को अपने अंदर के  टीन ऐज  व्यक्तित्व की आंख से देख पाते हैं। उनसे बातें करना उत्साह से भर देता है। और हम कभी अपनी कॉलेज...