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वैभव सूर्यवंशी की दास्तान*

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* वैभव सूर्यवंशी की दास्तान*  यह कहानी बिहार के समस्तीपुर जिले के एक गुमनाम से गांव ताजपुर के मोतीपुर से शुरू होती है, जहां धूल और तंगहाली के बीच एक बाप अपनी अधूरी आंखों में बरसों पुराना जख्म छुपाए बैठा था ।  संजीव सूर्यवंशी कभी खुद क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन बिहार की बदहाल खेल व्यवस्था और खाली जेब ने उनके सपनों का गला घोंट दिया था, पर जब साल 2011 में उनके घर बेटे वैभव का जन्म हुआ, तो संजीव ने ठान लिया था कि जो गरीबी उनसे जीती थी, उसे वो अपने बेटे से हारने नहीं देंगे ।  वैभव जब महज चार साल का था, तो वो दूध की बोतल छोड़कर हाथ में लकड़ी का पट्टा लेकर दिनभर गेंद के पीछे भागता था और बेटे के इसी पागलपन को देखकर संजीव ने बिना देर किए अपने घर के पिछवाड़े की कच्ची मिट्टी को खोदकर एक कामचलाऊ पिच बना दी, जहां सुबह की पहली किरण फूटने से लेकर रात के अंधेरे तक सिर्फ एक ही आवाज गूंजती थी - गेंद और बल्ले की आपसी टक्कर । जब वैभव आठ साल का हुआ, तो उसने जिला स्तर के ट्रायल्स में खुद से दोगुनी उम्र के कड़क गेंदबाजों के घमंड को नेस्तनाबूद कर दिया, जिसे देखकर संजीव समझ गए थे कि...

ईश्वर का धन्यवाद🙏

* ईश्वर का धन्यवाद करने के लिए 10 नायाब कारण:* > 1. *टायर चलने पर घिसते हैं, लेकिन पैर के तलवे जीवनभर दौड़ने के बाद भी नए जैसे रहते हैं।*   > 2. *शरीर 75% पानी से बना है, फिर भी लाखों रोमकूपों के बावजूद एक बूंद भी लीक नहीं होती।*   > 3. *कोई भी वस्तु बिना सहारे नहीं खड़ी रह सकती, लेकिन यह शरीर खुद को संतुलित रखता है।*   > 4. *कोई बैटरी बिना चार्जिंग के नहीं चलती, लेकिन हृदय जन्म से लेकर मृत्यु तक बिना रुके धड़कता है।* > 5. *कोई पंप हमेशा नहीं चल सकता, लेकिन रक्त पूरे जीवनभर बिना रुके शरीर में बहता रहता है।*   > 6. *दुनिया के सबसे महंगे कैमरे भी सीमित हैं, लेकिन आंखें हजारों मेगापिक्सल की गुणवत्ता में हर दृश्य कैद कर सकती हैं।*   > 7. *कोई लैब हर स्वाद टेस्ट नहीं कर सकती, लेकिन जीभ बिना किसी उपकरण के हजारों स्वाद पहचान सकती है।*   > 8. *सबसे एडवांस्ड सेंसर भी सीमित होते हैं, लेकिन त्वचा हर हल्की-से-हल्की संवेदना को महसूस कर सकती है।*   > 9. *कोई भी यंत्र हर ध्वनि नहीं निकाल सकता, लेकिन कंठ से...

Sri Swami Sivananda...🌹🌹🌹

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Sri Swami Sivananda...🌹🌹🌹 Sivananda Gita by Swami Sivananda (Written by Swami Sivananda in 1946) I was born of P.S. Vengu Aiyar and Parvathiammal on 8th September 1887 at Pattamadai, Tirunelvely District, S. India, in the line of Appayya Dixit. My star is Bharani. I was extremely mischievous in my boyhood. I studied in the S.P.G. College, Trichy. I was a Doctor in Malaya States for 10 years. I took Sanyasa in 1924 in Rishikesh. I did tapas and meditation for 15 years. I went on lecturing tours for 10 years. I founded the Divine Life Society in 1936 and the AllWorld Religions Federation in 1945. I am childlike in my svabhava. So I mix with all. I become one with all. I am ever happy and joyful and make others also happy and joyful. I am full of educative humour. I radiate joy through humour. I respect all. I do salutations to all first. I always speak sweetly. I walk quickly. I do japa and meditation while walking and while at work also. I am ever hardworking. I have inte...

प्रिय वरिष्ठ नागरिकों🙏

प्रिय वरिष्ठ नागरिकों, आइए हम सब मिलकर खुद को 10 में से 10 अंक प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करें……..👇🏾 🌷 खुशहाल वरिष्ठ नागरिकों के लिए 10 सुझाव।❤️ 🌷 1.  अगर सुबह-सुबह  आपकी नींद अलार्म घड़ी, मोबाइल फोन, पक्षियों के चहचहाने या किसी अन्य आवाज से खुलती है,  तो खुश हो जाइए  और खुद को भाग्यशाली समझिए।  इसका मतलब है कि  आप अभी भी इस दुनिया का हिस्सा हैं। 🌷 2.  उठने के बाद,  थोड़ा पानी पीजिए,  अपने जानने वालों,  प्रियजनों और जिनकी आप परवाह करते हैं,  उन्हें संदेश भेजिए।  उन्हें "सुप्रभात" कहिए।  इसका मतलब है कि  आप स्पष्ट रूप से सोच सकते हैं  और स्वस्थ हैं।  आप एक नए और खूबसूरत दिन की शुरुआत कर सकते हैं। 🌷 3.  अगर आपको दोस्तों से भोजन करने  या उनके साथ समय बिताने के लिए  संदेश और कॉल आते हैं,  तो इसका मतलब है कि  आप मिलनसार हैं  और लोगों के साथ  आपके अच्छे संबंध हैं।  आपके दोस्त अभी भी आपके बारे में सोचते हैं। 🌷 4.  कभी-कभी,  कुछ लोग  आपके बारे में बु...

सुमन कल्याणपुर जी 🙏

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सुमन जी के पिता एक सारस्वत ब्राह्मण थे और मूलरूप से कर्नाटक के मंगलौर के चित्रापुर के रहने वाले थे। वो सभ्रान्त घराने से थे। और बैंक ऑफ़ इंडिया में ऊंचे पद पर काम करते थे। अपनी नौकरी के चलते उनका काफ़ी समय ढाका में बीता था। बाद में वो कोलकाता में भी रहे। वहीं पर 28 जनवरी 1937 को सुमन जी का जन्म हुआ था। सुमन जी की मां का नाम सीता हेमाडी था। छह भाई बहनों में सुमन सबसे बड़ी थी। इनकी चार बहनें व एक भाई थे।  वो साल 1942 था जब सुमन जी के पिता सपरिवार मुंबई आ गए थे। संगीत और चित्रकारी में सुमन हेमाडी जी को बचपन से ही बहुत दिलचस्पी थी। सेंट कोलंबिया हाईस्कूल से अपनी स्कूलिंग पूरी करने के बाद सुमन जी ने जे.जे. कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स में दाखिला ले लिया। इसी दौरान ही केशवराव भोले से उन्होंने संगीत भी सीखना शुरू कर दिया। केशवराव भोले उनके पारिवारिक मित्र थे और प्रभात फ़िल्म कंपनी में बहैसियत संगीतकार भी काम करते थे।  एक इंटरव्यू में सुमन जी ने बताया था कि उन्होंने बस यूं ही, शौकिया तौर पर केशवराव भोले जी से संगीत सीखना शुरू किया था। मगर बाद में उन्हें संगीत से लगाव हो गया। वो संगीत ...

अनूठी है जूते की महिमा 👞👞

अनूठी है जूते की            महिमा              👞👞 किसी ने उनसे पूछा भाई जी, *“क्या हुआ ?”* वे बोले “जूते ने काट लिया।” हम हैरान रह गए… अरे! *क्या जूता भी काटता है ?* 😳 एक दिन उन्हें जूते में तेल लगाते देखा,तो पूछा... *“अब क्या हुआ?”* वे बोले “जूता चूं-चूं करता है।” *वाह! मतलब जूता बोलता भी है!*  😄 फिर एक दिन किसी के बारे में कहते सुना , “वो तो बस जूतों का यार है।” *तब समझ आया कि जूते दोस्ती भी निभाते हैं।* 😆 कल चाचा जी बेटे को डांट रहे थे  “तू तो जूते खाए बिना मानेगा नहीं!” *तब पता चला कि जूते खाए भी जाते हैं!*  😄 होली पर देखा कि एक मूर्ख को गधे पर बैठाकर गले में जूतों की माला पहनाई गई। *तब समझ आया कि जूते "सम्मान" देने के काम भी आते हैं!*  😂 फुटबॉल में सबसे अधिक गोल करने वाले खिलाड़ी को “गोल्डन बूट” दिया जाता है। *वाह! पुरस्कार में भी सोने का जूता!*  🧐 किसी ने बताया कि विदेशी फ़िल्म और टीवी जगत में भी श्रेष्ठ कलाकारों को “गोल्डन बूट अवॉर्ड” दिया जाता है। *अब समझ नहीं आया कि सम्मा...

श्रीराधा कौन हैं?

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.                   *श्रीराधा-महिमा*           ‘श्रीराधा कौन हैं? श्रीराधा का अस्तित्व सत्य है या कविकल्पना मात्र? राधा का स्वरूप नित्य अनादि अनन्त एकरस है या साधन-जगत् अथवा कल्पना जगत् में उसका उत्तरोत्तर विकास हुआ है? श्रीराधा हैं तो उनका भगवान् श्रीकृष्ण के साथ क्या सम्बन्ध है, राधा उनकी परिणीता पत्नी हैं या परकीया? श्रीराधा विलासप्रिय— (जैसा कि बहुत-से कवियों ने उनका वर्णन किया है—) स्वच्छन्द रमणी हैं या साधन-जगत् की आदर्श परम त्यागमयी देवी हैं? ‘उनमें क्या-क्या गुण हैं और उनकी कैसी क्या-क्या लीलाएँ हैं?’ ये तथा ऐसे ही अनेक प्रश्नों का उत्तर देने की न मुझमें योग्यता है, न शक्ति है, न बुद्धि है, न अधिकार है और न आवश्यकता ही है। श्रीराधाजी के अनन्त रूप हैं, उनमें अनन्त गुण हैं, उनके स्वरूपभूत भाव-समुद्र में अनन्त विचित्र तरंगें उठती रहती हैं और उनको विभिन्न दृष्टियों से विभिन्न लोगों ने देखा है, अतएव उनके सम्बन्ध में इतना ही कहा जा सकता है कि जो उन्हें जिस भाव से जानना चाहते हैं, वे उसी भाव से जान ...