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🕉️🙏🧘♂️आयुर्वेद के अनुसार वर्ष के सबसे ठंडे 14 दिन: शरीर को बचाने और सशक्त बनाने का स्वर्णकाल! इन दिनों क्या करें, क्या न करें 🧘♂️🧘♂️🧘♂️🧘♂️🧘♂️🧘♂️ जब शीत ऋतु अपने चरम पर होती है, तब आयुर्वेद इसे केवल ठंड का मौसम नहीं, बल्कि शरीर की अग्नि, बल और रोग-प्रतिरोधक क्षमता की परीक्षा का समय मानता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्ष के सबसे ठंडे 14 दिन को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया गया है। यह समय प्रायः पौष–माघ संधि (जनवरी के आसपास) आता है, जब सूर्य की उष्णता न्यूनतम और वातावरण में शीत अधिकतम होता है। 8 जनवरी से 21 जनवरी तक -️ यह तिथियाँ हर वर्ष 1–2 दिन आगे-पीछे हो सकती हैं, लेकिन यही काल सबसे अधिक ठंड वाला माना जाता है। ❄️ आयुर्वेद क्या कहता है इन 14 दिनों के बारे में? आयुर्वेद के अनुसार, जब बाहरी ठंड बढ़ती है, तब शरीर की जठराग्नि (Digestive Fire) स्वाभाविक रूप से प्रबल हो जाती है, क्योंकि शरीर अंदर की गर्मी को बचाने का प्रयास करता है। यही कारण है कि इन दिनों भारी, स्निग्ध और पौष्टिक आहार पचाने की क्षमता बढ़ जाती है। 📜 आयुर्वेदिक श्लोक “शिशिरे वर्धते वह्निः पवनश्च प्रकोप्यते...