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Showing posts from February, 2026

Heart touching..

तलाक के सालों बाद DM बनी पत्नी पहुंची बैद्यनाथ धाम, सामने भीख मांग रहा था अपाहिज पति; फिर जो हुआ...!! महादेव के दरबार में न्याय: जब DM पत्नी को सालों बाद मिला अपना अपाहिज पति प्रस्तावना: नियति का लेखा-जोखा कहते हैं कि बैद्यनाथ धाम में महादेव के दर्शन के लिए वही आता है जिसे बाबा बुलाते हैं। लेकिन कभी-कभी बाबा सिर्फ दर्शन देने के लिए नहीं, बल्कि कर्मों का हिसाब चुकता करने के लिए बुलाते हैं। यह कहानी है “शालिनी” और “राघव” की। 10 साल पहले एक गलतफहमी और गरीबी ने इन्हें अलग कर दिया था। आज शालिनी उस जिले की DM (District Magistrate) है, और राघव उसी मंदिर की चौखट पर एक ऐसी हालत में है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती...!! 10 साल पहले राघव और शालिनी एक छोटे से कस्बे में रहते थे। राघव एक फैक्ट्री में काम करता था और शालिनी का सपना प्रशासनिक अधिकारी बनने का था। राघव ने अपनी पूरी जमा-पूंजी और रातों की नींद शालिनी की पढ़ाई पर कुर्बान कर दी। लेकिन एक दिन फैक्ट्री में हुए एक भीषण हादसे में राघव ने अपने दोनों पैर खो दिए...!! अपाहिज होने के बाद राघव को लगा कि वह अब शालिनी के लिए सिर्फ एक बोझ बन जाएगा। उसी...

राग बसन्त*

धरती के उल्लास का स्वर- *राग बसन्त* 🎵 वसन्ती हवा… फूलों की महक… कोयल की कूक... पलाश के रंग... फाग का उल्लास... ये सब ऋतुराज वसन्त के अनुचर हैं। और इसके सौन्दर्यगान का राग है - *राग बसन्त!* 🎵 वसन्त ऋतु में गाया जाने वाला राग हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत परम्परा के पूर्वी थाट का है। इसकी जाति औडव‑संपूर्ण है। इसके आरोह में पाँच, तथा अवरोह में सात स्वर होते हैं। इसका वादी स्वर 'सा' तथा संवादी स्वर 'प' है। 🎵 शृंगार का यह राग श्रोता-मन में प्रकृति के वासन्ती उत्सव व उल्लास का दृश्य जगा देता है। होली पर गाई जाने वाली बंदिशें तो इसकी विशेषता है।  🎵आइये हम सब मिलकर पं. भीमसेन जोशी द्वारा इस राग में गाए गए एक प्रसिद्ध गीत-  'केतकी गुलाब जूही'  के साथ ऋतुराज वसन्त का स्वागत करें! *मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩*

जीवन की सूत्र

" जब हम मर जाते हैं, तो हमारी सारी दौलत बैंक में पड़ी रहती है...  लेकिन जब हम जीवित होते हैं, तो हम खर्च करने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं होते। असल में, जब हम चले जाते हैं, तो बहुत सारा पैसा खर्च नहीं किया जाता। चीन के एक व्यवसायी टाइकून की मृत्यु हो गई। उसकी विधवा, जिसके पास बैंक में $1.9 बिलियन थे, ने उसके ड्राइवर से शादी कर ली।  ड्राइवर ने कहा:- "सारी जिंदगी, मुझे लगता था कि मैं अपने बॉस के लिए काम कर रहा था... अब मुझे समझ में आता है कि मेरा बॉस हमेशा मेरे लिए काम कर रहा था!!!" कठिन सच्चाई यह है कि जीवन में अधिक संपत्ति होने से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि हम लंबा जीएं। इसलिए हमें एक मजबूत और स्वस्थ शरीर की कोशिश करनी चाहिए।  यह वास्तव में मायने नहीं रखता कि कौन किसके लिए काम कर रहा है। एक बढ़िया फोन में, 70% फीचर्स बेकार होते हैं! एक महंगी कार में, 70% स्पीड और गैजेट्स की कोई जरूरत नहीं होती। अगर आपके पास एक भव्य हवेली है, तो 70% स्थान आमतौर पर उपयोग नहीं होता। आपकी अलमारी में कपड़े? 70% कपड़े नहीं पहने जाते! सारी जिंदगी की मेहनत और कमाई... 70% दूसरों के खर्च करने के लिए...

आज का सुविचार

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कृष्ण की लीला समझ में आए या नहीं, पर उनका संदेश स्पष्ट है— धर्म के साथ खड़े रहो, और मन में प्रेम रखो। जो सबका होकर भी किसी के बंधन में नहीं— वही कृष्ण हैं। ✨ Jai shri krishna ap sabhi ko🙏🏼💐☕ *┈┉❀꧁ω❍ω꧂❀┅┈*        *🍂🌸जय सियाराम🌸🍂*         *🏵🪴जय मातादी🪴🏵* *✍️किसी को बहस से जीतने के बजाय*      *मौन से पराजित करो क्योकि जो*      *आपके साथ सदा बहस करने के*      *लिये तत्पर रहता है, वो आपके मौन*     *को कभी भी सहन नहीं कर सकेगा*       *┈┉❀꧁ω❍ω꧂❀┅┈*      *🌹🦚जयश्री राधेकृष्ण🦚🌹*        *💓🍃शुभ>-<प्रभात🍃💓* *┈┉❀꧁ω❍ω꧂❀┅┈*        *🍂🌸जय सियाराम🌸🍂*         *🏵🪴जय मातादी🪴🏵* '                  🌸🌼🌸        *समय* बहरा है कभी,            किसी की नहीं सुनता...       ...

Amar Prem”*.. film of the day

Let’s start the day with Shakti Samanta’s 1972 romantic drama *”Amar Prem”* directed by Shakti Samanta.  The film starred Rajesh Khanna and Sharmila Tagore. They were supported by Vinod Mehra, Abhi Bhattacharya, Satyendra Kapoor, Madan Puri, Sujit Kumar, Bindu, Farida Jalal, Leela Mishra, Asit Sen, Rakesh Pandey, Manmohan, Master Raju and Om Prakash.  The film was based on the Bengali film 'Nishipadma' (1970). Rajesh Khanna reportedly saw Nishipadma 24 times before zeroing on the role of Anand Babu. This was the first film signed by Sharmila Tagore after the birth of her son Saif Ali Khan. Pushpa i hate tears is an all time classic dialog in bollywood many younger generations still love it. “Amar Prem” was full of memorable songs that are remembered to this date. The soundtrack was melody based, which gave Lata Mangeshkar her finest classical solo of the decade, Raina Beti Jaaye, set in an unusual blend of two Ragas, Todi in mukhara or the opening verse and Khamaj in the antar...

The world's longest possible train journey

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The world's longest possible train journey, spanning 18,755 kilometers, is a route from Lagos, Portugal to Singapore, taking approximately 21 days and passing through 13 countries.  Here's a more detailed look: Distance: Around 18,755 kilometers (11,654 miles).  Duration: Approximately 21 days.  Route: Starts in Lagos, Portugal.  Travels through Spain, France, Germany, Poland, Russia, China, Vietnam, and Thailand.  Ends in Singapore.  Countries: Passes through 13 nations.  Stops: The journey includes 11 route stops and several overnight stays, allowing passengers to explore various places along the way

*मृत्यु क्यों आवश्यक है?*🚩

1️⃣8️⃣❗0️⃣2️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣ * मृत्यु क्यों आवश्यक है?*🚩 🩷 *हर कोई मृत्यु से डरता है,* लेकिन जन्म और मृत्यु सृष्टि के नियम हैं... यह ब्रह्मांड के संतुलन के लिए आवश्यक है। इसके बिना, मनुष्य एक-दूसरे पर हावी हो जाते। कैसे? इस कहानी से जानिए... 🚩 *एक बार, एक राजा एक संत के पास गया, जो राज्य के बाहर एक पेड़ के नीचे बैठे थे।* राजा ने पूछा, "हे स्वामी! क्या कोई औषधि है जो अमरता दे सके? कृपया मुझे बताएं।" 🚩 *संत ने कहा, "हे राजा! आपके सामने जो दो पर्वत हैं, उन्हें पार कीजिए। वहाँ एक झील मिलेगी। उसका पानी पीने से आप अमर हो जाएंगे।"* 🚩 *राजा ने पर्वत पार कर झील पाई।* जैसे ही वह पानी पीने को झुके, उन्होंने कराहने की आवाज सुनी। आवाज का पीछा करने पर उन्होंने एक बूढ़े और कमजोर व्यक्ति को दर्द में देखा। 🚩 *राजा ने कारण पूछा, तो उस व्यक्ति ने कहा, "मैंने इस झील का पानी पी लिया और अमर हो गया।* जब मेरी उम्र सौ साल की हुई, तो मेरे बेटे ने मुझे घर से निकाल दिया। मैं पचास साल से यहाँ पड़ा हूँ, बिना किसी देखभाल के। मेरा बेटा मर चुका है, और मेरे पोते अब बूढ़े हो चुके हैं। मैंने ...

🌸 कृष्ण और मुट्ठी भर चावल 🌸

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🌸 कृष्ण और मुट्ठी भर चावल 🌸 एक गरीब विधवा रोज़ कृष्ण का नाम जपती थी। उसके पास देने को कुछ नहीं था, पर मन में अपार प्रेम था। एक दिन उसने सोचा — “सब लोग ठाकुर जी को भोग लगाते हैं, मैं क्या चढ़ाऊँ?” घर में देखा तो बस मुट्ठी भर चावल बचे थे। वही प्रेम से एक पत्ते पर रखकर बोली — “कृष्ण, मेरे पास यही है… स्वीकार करना।” ⸻ ✨ चमत्कार रात को उसे सपना आया। कृष्ण मुस्कुरा रहे थे और बोले — “आज बहुत तृप्त हूँ। लोगों ने सोने-चाँदी के थाल दिए, पर स्वाद तुम्हारे चावल में था, क्योंकि उसमें प्रेम था।” सुबह उठी तो देखा — उसका छोटा सा अनाज का डिब्बा पूरा भरा हुआ था। ⸻ 💛 संदेश भगवान को धन नहीं, भक्ति दिखती है। भोग नहीं, भावना पहुँचती है। 🙏 राधे राधे 🙏 (पसंद आए तो शेयर जरूर करें) ✨

ढाई अक्षर

* काफी बरसों पहले पढ़ा था..!* *पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोय।*      *ढाई अक्षर प्रेम के, पढ़े सो पंडित होय॥*       *अब पता लगा है कि, ढाई अक्षर हैं क्या ?* *तब से मन शांत हो गया.* ``` 2½ अक्षर के ‘ब्रह्मा’ और,       ढाई अक्षर की ‘सृष्टि’. ``` ``` ढाई अक्षर के ‘विष्णु’ और      ढाई अक्षर की ‘लक्ष्मी’. ``` ``` ढाई अक्षर की ‘दुर्गा’ और       ढाई अक्षर की ‘शक्ति’. ``` ``` ढाई अक्षर की ‘श्रद्धा’ और       ढाई अक्षर की ‘भक्ति’. ``` ``` ढाई अक्षर का ‘त्याग’ और       ढाई अक्षर का ‘ध्यान’. ``` ``` ढाई अक्षर की ‘इच्छा’और       ढाई अक्षर की ‘तुष्टि’. ``` ``` ढाई अक्षर का ‘धर्म’ और       ढाई अक्षर का ‘कर्म’. ``` ``` ढाई अक्षर का ‘भाग्य’ और,        ढाई अक्षर की ‘व्यथा’. ``` ``` ढाई अक्षर का ‘ग्रन्थ’ और       ढाई अक्षर का‘सन्त’.``` ``` ढाई अक्षर का ‘शब्द’ और       ढाई अक्षर क...

कोई लौटा दे.. मेरे बीते हुए दिन।।

: हमारे बचपन में कपड़े तीन टाइप के ही होते थे ••• स्कूल का ••• घर का ••• और किसी खास मौके का •••    अब तो ••• कैज़ुअल, फॉर्मल, नॉर्मल, स्लीप वियर, स्पोर्ट वियर, पार्टी वियर, स्विमिंग, जोगिंग, संगीत ड्रेस, फलाना - ढिमका ••• जिंदगी आसान बनाने चले थे ••• पर वह कपड़ों की तरह कॉम्प्लिकेटेड हो गयी है •••!  बचपन में पैसा जरूर कम था पर साला उस बचपन में दम था" . "पास में महंगे से मंहगा मोबाइल है पर बचपन वाली गायब वो स्माईल है" . "न गैलेक्सी, न वाडीलाल, न नैचुरल था, पर घर पर जमीं आइसक्रीम का मजा ही कुछ ओर था" . अपनी अपनी बाईक और  कारों में घूम रहें हैं हम पर किराये की उस साईकिल का मजा ही कुछ और था "बचपन में पैसा जरूर कम था पर यारो उस बचपन में दम था *कभी हम भी.. बहुत अमीर हुआ करते थे* *हमारे भी जहाज.. चला करते थे।* *हवा में.. भी।* *पानी में.. भी।* *दो दुर्घटनाएं हुई।* *सब कुछ.. ख़त्म हो गया।*                 *पहली दुर्घटना*  जब क्लास में.. हवाई जहाज उड़ाया। टीचर के सिर से.. टकराया। स्कूल से.. निकलने की नौबत आ गई। बहुत फजीहत हुई। कसम दिलाई...

𝗔𝗡𝗜𝗧𝗬𝗔𝗠 𝗔𝗦𝗨𝗞𝗛𝗔𝗠 𝗟𝗢𝗞𝗔𝗠 🌿 — 𝘉𝘩𝘢𝘨𝘢𝘷𝘢𝘥 𝘎𝘪𝘵𝘢 9.33

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🌿 𝗔𝗡𝗜𝗧𝗬𝗔𝗠 𝗔𝗦𝗨𝗞𝗛𝗔𝗠 𝗟𝗢𝗞𝗔𝗠 🌿              — 𝘉𝘩𝘢𝘨𝘢𝘷𝘢𝘥 𝘎𝘪𝘵𝘢 9.33 This is one of the most powerful verses of the Bhagavad Gita, summarising the nature of the material world. 𝘈𝘯𝘪𝘵𝘺𝘢𝘮 — 𝘐𝘮𝘱𝘦𝘳𝘮𝘢𝘯𝘦𝘯𝘵 𝘈𝘴𝘶𝘬𝘩𝘢𝘮 — 𝘐𝘯𝘤𝘢𝘱𝘢𝘣𝘭𝘦 𝘰𝘧 𝘨𝘪𝘷𝘪𝘯𝘨 𝘭𝘢𝘴𝘵𝘪𝘯𝘨 𝘫𝘰𝘺 𝘓𝘰𝘬𝘢𝘮 — 𝘛𝘩𝘦 𝘸𝘰𝘳𝘭𝘥 𝘸𝘦 𝘦𝘹𝘱𝘦𝘳𝘪𝘦𝘯𝘤𝘦 Lord Krishna makes it clear: nothing in this changing world can provide permanent happiness. However, Krishna is not saying there is no happiness. He is awakening us to reality.... reality that everything is bound to change. People change. Situations change. Even our feelings change — One moment we feel hopeful, loving, inspired and happy. Another moment, the same situation feels different. What once gave joy may later give pain. And this is true for relationships, possessions, achievements and circumstances. The problem is not enjoyment, dear friends. The problem is attach...

!! तीन मूर्तियाँ !!*

1️⃣4️⃣❗0️⃣2️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣ *♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*                 *!! तीन मूर्तियाँ !!*  °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° एक राजा था जिसे शिल्प कला अत्यंत प्रिय थी। वह मूर्तियों की खोज में देश-प्रदेश जाया करता था। इस प्रकार राजा ने कई मूर्तियाँ अपने राज महल में लाकर रखी हुई थी और स्वयं उनकी देख रेख करवाते। सभी मूर्तियों में उन्हें तीन मूर्तियाँ जान से भी ज्यादा प्यारी थी। सभी को पता था कि राजा को उनसे अत्यंत लगाव है।       एक दिन जब एक सेवक इन मूर्तियों की सफाई कर रहा था तब गलती से उसके हाथों से उनमें से एक मूर्ति टूट गई। जब राजा को यह बात पता चली तो उन्हें बहुत क्रोध आया और उन्होंने उस सेवक को तुरन्त मृत्युदंड दे दिया। सजा सुनने के बाद सेवक ने तुरन्त अन्य दो मूर्तियों को भी तोड़ दिया। यह देख कर सभी को आश्चर्य हुआ। राजा ने उस सेवक से इसका कारण पूछा, तब उस सेवक ने कहा - "महाराज! क्षमा कीजियेगा, यह मूर्तियाँ मिट्टी की बनी हैं, अत्यंत नाजुक हैं। अमरता का वरदान लेकर तो आई नहीं हैं। आज नहीं तो कल टूट ही जाती अ...

Worth being conscious!

* One phone call. One staircase. One misstep.* Mr. Shashi Tharoor tripped while talking on the phone and walking downstairs is not about clumsiness. It’s about the brain. (Glad to note that Mr Tharoor is doing well) Your brain is terrible at “walking + phone” multitasking. Especially while going downstairs. Why stairs are risky? When you go downstairs, your brain is busy with: ▪️Balance ▪️Depth perception ▪️Foot placement ▪️Split-second corrections Add a phone call → attention shifts → reaction time drops. That’s all it takes. *As a neurologist, I can tell you:* *_Some of the worst head injuries I see come from simple falls, not big accidents._* Please don’t use your phone when: *🚫 Going up or down stairs* *🚫 Crossing roads* *🚫 Walking on uneven surfaces* *🚫 Driving / riding* *_Your brain can focus on movement OR on your phone     Not both safely._* *✅The simplest safety hack* *▪️Pause the call.* *▪️Look at the steps.* *▪️Hold the railing.* *▪️Your brain is too valuab...

अमृत कथा*

* अमृत कथा* *बड़ी ही सुन्दर कथा है,अवश्य पढ़ें..*  एक बार मथुरा के निकट एक गाँव में एक छोटी लड़की रहती थी। वृन्दावन के निकट होने के कारण वहां से बहुत लोग ठाकुर जी के दर्शन को जाते थे। जब वो छोटी बच्ची 5 साल की हुई तो उसके घर वाले बांके बिहारी जी के दर्शन के लिए जा रहे थे। उस समय वाहन बहुत कम थे। उनको दर्शन को जाते देख उस छोटी लड़की ने कहा “पिताजी मुझे भी अपने साथ ठाकुर जी के दर्शन के लिए ले चलो” पिताजी ने कहा बेटा अभी आप छोटे हो इतना चल नहीं पाओगे थोडा बड़ा हो जाओ तब तुम्हें साथ में ले चलेंगे।      कुछ समय बीता जब वो 7 साल की हुई तो फिर घरवालों का किसी कारणवश वृन्दावन जाना हुआ। फिर उस बच्ची ने कहा “पिताजी अब मुझे भी साथ ले चलो ठाकुर जी के दर्शन के लिए।” लेकिन किसी कारणवश वो उसको न ले जा सके। बच्ची के मन में ठाकुर जी के प्रति बहुत प्रगाढ़ प्रेम था। वह बस उनका मन से चिंतन करती रहती थी और दुखी भी होती थी की ठाकुर जी के दर्शन को न जा सकी आज तक। गाँव में उसके सभी सहपाठी प्रभु जी के दर्शन कर चुके थे। जब वो सब ठाकुर जी के मंदिर और उनके रूप का वर्णन करते तो इस बच्ची के मन में दर...

इस संसार में हकीकत में कौन क्या है....✍*

* इस संसार में हकीकत में कौन क्या है....✍*         *👌जानिए हँसमुखी नज़रों से ।* *1 सिनेमा-----* पैसा देकर कैद होने का स्थान । *2 जेल --------* बिना पैसे का होस्टल । *3 सास -------* बहू के पीछे छोडा गया बिना पैसे का जासूस । *4 चिन्ता------* वजन कम करने की सबसे सस्ती दवा । *5 मृत्यु -------* बिना पासपोर्ट के पृथ्वी से दूूर जाने की छूट । *6 ताला -------* बिना वेतन का चौकीदार । *7 मुर्गा --------* देहात की अलार्म घडी । *8 झगडा ------* वकील का कमाऊ बेटा । *9 चश्मा-------* जादुई आँख । *10 स्वप्न ----* बिना पैसे की फिल्म । *11 हॉस्पिटल ---* रोगियों का संग्रहालय । *12 श्मशान --* दुनिया का आखिरी स्टेशन । *13 ईश्वर ------* किसी से मुलाकात न करने वाला एडमिन । *14 चाय कॉफी ---* कलयुग का अमृत । *15 विद्वान ------* अक्ल का ठेकेदार । *16 चोर --------* रात का शरीफ व्यापारी । *17 विश्व --------* एक महान धर्मशाला । और अंत में  *18 फेसबुक और व्हाट्सएप -----* एक लाइलाज नशा , जिसने आपको जकड़ा हुआ है ।              *हँसते रहिये , हँसाते रहिये ।*...

मूंग की विदाई, बेसन की ताजपोशी

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महंगाई की कचौरी: मूंग की विदाई, बेसन की ताजपोशी *सुदर्शन टुडे ब्यूरो बुरहानपुर*  गरीब का व्यंजन  कचौरी खाते ही मूंग दाल की महक मन मस्तिष्क में समा जाती थी वहीं हींग की हल्की सी महक स्वाद को राजशाही बना देती थी। आज की कचौरी में न स्वाद बचा न इसको स्वादिष्ट व्यंजन का जायका देने वाली मूंग की दाल बची न हींग! हाथ ठेले या चाय नाश्ते की दुकानों पर परोसे जाने वाली कचौरी में केवल तेल की भाप और बेसन का आत्मविश्वास ही महसूस होता है। मारवाड़ और मध्य भारत की शान रही कचौरी आज  बुरहानपुर मे अपनी पहचान के साथ स्वाद के संकट से जूझ रही है।  महंगाई की मार है या दुकानदार का निजी स्वार्थ हलवाई ने कचौरी से मूंग दाल को चुपचाप बाहर का रास्ता दिखा दिया  और उसकी जगह चने के बेसन ने स्थायी कब्जा जमा लिया है। मूंग अब कचौरी में नहीं, यादों में भी मुश्किल से मिलती है। हींग, जो कभी कचौरी की आत्मा हुआ करती थी, अब सिर्फ नाम की हींग रह गई है—शायद दुकानदार - हलवाई हींग का फोटो दिखाकर ही काम चला रहे हैं। 3 से 5 रूपये की कचौरी 10 से 15 रुपये की होने के बाद भी स्वाद खोजना पड़ रहा है। स्वा...

भक्त की रक्षा🙏

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.                            भक्त की रक्षा           एक गांव में कृष्णा बाई नाम की बुढ़िया रहती थी वह भगवान श्रीकृष्ण की परमभक्त थी। वह एक झोपड़ी में रहती थी। कृष्णा बाई का वास्तविक नाम सुखिया था पर कृष्ण भक्ति के कारण इनका नाम गांव वालों ने कृष्णा बाई रख दिया।           घर-घर में झाड़ू पोछा बर्तन और खाना बनाना ही इनका काम था। कृष्णा बाई रोज फूलों का माला बनाकर दोनों समय श्री कृष्ण जी को पहनाती थी और घण्टों कान्हा से बात करती थी। गांव के लोग यहीं सोचते थे कि बुढ़िया पागल है।           एक रात श्री कृष्ण जी ने अपनी भक्त कृष्णा बाई से कहा–‘कल बहुत बड़ा भूचाल आने वाला है तुम यह गांव छोड़ कर दूसरे गांव चली जाओ।’           अब क्या था मालिक का आदेश था कृष्णा बाई ने अपना सामान इकट्ठा करना शुरू किया और गांव वालों को बताया कि कल सपने में कान्हा आए थे और कहे कि बहुत प्रलय होगा पास के गांव में चली जा।     ...

माँ यशोदा जन्मोत्सव आज*🙏

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* माँ यशोदा जन्मोत्सव आज* --------------------------------------- *इस व्रत से मिलता है लंबी उम्र का वरदान!* *⭕सनातन धर्म में मां और संतान के निस्वार्थ प्रेम की जब भी बात होती है, तो माता यशोदा और भगवान श्रीकृष्ण का नाम सबसे पहले आता है. पौराणिक परंपरा के अनुसार फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती के रूप में मनाया जाता है.* *यह दिन उस ममता को समर्पित है, जिसने स्वयं ईश्वर का पालन-पोषण किया. भले ही श्रीकृष्ण ने देवकी के गर्भ से जन्म लिया, लेकिन उन्हें यशोदा नंदन के रूप में ही दुनिया ने जाना. मान्यता है कि इस दिन माता यशोदा का पूजन करने से सूनी गोद भर जाती है और संतान को दीर्घायु प्राप्त होती है.* *संतान प्राप्ति के लिए क्यों खास है यह व्रत?* ============================= यशोदा जयंती का व्रत मुख्य रूप से माताओं के लिए फलदायी माना गया है. जो महिलाएं संतान सुख से वंचित हैं या जिनकी संतान के जीवन में कष्ट हैं, उनके लिए यह दिन किसी वरदान से कम नहीं है. इस दिन माता यशोदा की गोद में विराजे बाल-गोपाल के स्वरूप की पूजा की जाती है. यह पूजा न सिर्फ वात्सल्य भाव बढ़ाती ...

आज का चिंतन....

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* आज का चिंतन................* *आपको जीवन में*  *कौन मिलता है?*             *यह समय तय करता है,* *आप उनमें से*  *किसका साथ चाहते हैं?*                  *यह आप तय करते हैं।* *और उनमें से*  *कौन आपके साथ रहता है?*           *यह आपका व्यवहार तय करता है।* *🙏🏼 जय श्री राधेकृष्ण 🙏🏼* *आपका दिन शुभ रहे 😊🌹🙏🏼* ☘️🌼🌼☘️☘️🌼🌼☘️☘️🌼🌼☘️ *सूर्योदय और सूर्यास्त हमें बताता है कि जीवन में कुछ भी स्थाई नहीं है, इसलिये हमेशा खुश रहें एवं जीवन की यात्रा का भरपूर आनंद लें ।।* *आपका दिन शुभ और मंगलमय हो।*

मन की बात❤️

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*!!   जय श्री कृष्ण  !!* *संसार का मायावी व्यवहार जितनी जल्दी समझ आ जायेगा उतनी जल्दी आपकी बुद्धि परमात्मा की ओर लगने लगेगी। केवल सांसारिक बुद्धि से जीव का कल्याण कभी संभव नहीं हो सकता इसलिए संसार की परीक्षा भी करते रहना चाहिए।* *संसार की परीक्षा करते-करते समय- समय पर स्वयं का भी निरीक्षण करते रहें कि कहीं मैं अपने मार्ग से भटक तो नहीं रहा। भौतिक एवं आध्यात्मिक समृद्धि आपको स्वयं के द्वारा ही प्राप्त होगी। अज्ञानी व्यक्ति स्वयं के बजाय दूसरों के गुण-दोषों का चिंतन करते रहने के कारण अपने जीवन में कुछ श्रेष्ठ पाने से भी वंचित रह जाता है।*           *सुप्रभात*🙏🙏 *आज का दिन शुभ मंगलमय हो।* *!!!...अतीत की कुछ स्मृतियाँ...* *पछतावे के सिवा और कुछ नहीं देती...!!!* *!!  जय श्री कृष्ण  !!* *संसार का मायावी व्यवहार जितनी जल्दी समझ आ जायेगा उतनी जल्दी आपकी बुद्धि परमात्मा की ओर लगने लगेगी। केवल सांसारिक बुद्धि से जीव का कल्याण कभी संभव नहीं हो सकता इसलिए संसार की परीक्षा भी करते रहना चाहिए।* *संसार की परीक्षा करते-करते समय- समय पर स्व...

Jai siyaram🙏

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🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🌞 *श्री सीताराम सुप्रभातम* 🌞 *सकल बिघ्न ब्यापहिं नहिं तेही। राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही॥*   *सोइ सादर सर मज्जनु करई। महा घोर त्रयताप न जरई॥*  भावार्थ:-ये सारे विघ्न उसको नहीं व्यापते (बाधा नहीं देते) जिसे श्री रामचंद्रजी सुंदर कृपा की दृष्टि से देखते हैं। वही आदरपूर्वक इस सरोवर में स्नान करता है और महान्‌ भयानक त्रिताप से (आध्यात्मिक, आधिदैविक, आधिभौतिक तापों से) नहीं जलता॥ 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 *🌺शुभ प्रभात !!!* *रिश्तों को "जेबो" में नहीं,* *हुज़ूर "दिलों" में रखिए* *क्योंकि "वक़्त" से "शातिर"* *कोई "जेबकतरा" नहीं होता !!!*                    🙏*🙏💞जय श्री कृष्णा💞🙏*      *🙏💞राधे राधे💞🙏*

सच में बहुत नॉस्टैल्जिक!*

दोस्तों, मुझे यह बहुत पसंद आया और यह बिल्कुल सच है 🧅 *बिना स्टेरलाइज़्ड, बिना माफी मांगने वाली पीढ़ी के लिए एक कविता* मेरी माँ एक ही चाकू ऐसे चलाती थीं जैसे विश्वकर्मा का ब्लेड हो— टमाटर, धनिया, मक्खन की फौज। कोई अलग बोर्ड नहीं, कोई साफ-सफाई के नियम नहीं, फिर भी हम ज़िंदा रहे—न पेट फूलना, न एम्बुलेंस की लाइटें। हमारे सैंडविच रीसायकल किए हुए कवर में होते थे— ब्रेड का वैक्स पेपर, चाय की पन्नी। ई. कोलाई, फैटी... नहीं, कभी नहीं, हमने खाया, हम दौड़े, हम हँसे, एक स्वस्थ लिवर के साथ। हम कहानियों के योद्धाओं की तरह कीटाणुओं के बीच साइकिल चलाते थे, सड़कों, लॉन, कंकड़ पर खूब खेलते थे। मिट्टी के बर्तन बनाते थे, सुंदर मूर्तियाँ बनाते थे, कोई डेटॉल वाइप्स नहीं, फिर भी हम ठीक महसूस करते थे। पी.टी. के जूते—कैनवस के, किस्मत की तरह सपाट, ऊँचा उठाने के लिए कोई एयर-कुशन सोल नहीं। हम दौड़े, हम गिरे, हमें चोट लगी, हम ठीक हुए, कभी कोई ऑर्थोपेडिक ड्रामा सामने नहीं आया। छड़ी, डस्टर, सच्चाई का थप्पड़— अनुशासन दुर्व्यवहार नहीं था, यह जवानी थी। हम बड़ों के सामने झुकते थे, न कि ट्रॉमा चार्ट के सामने, इज्ज़त कमाई...

The Naked Truth of Life*

* The Naked Truth of Life* There was a man with four wives. He loved his fourth wife the most and took great care of her and gave her the best. He also loved his third wife and always wanted to show her off to his friends. However, he always had a fear that she might runaway with some other man. He loved his second wife too. Whenever he faced some problems, he always turned to his second wife and she would always help him out. He did not love his first wife though she loved him deeply, was very loyal to him and took great care of him.  One day the man fell very ill and knew that he is going to die soon. He told himself, *_"I have four wives. I will take one of them along with me when I die to keep me company in my death."_* Thus, he asked the fourth wife to die along with him and keep him company. *_"No way!"_* she replied and walked away without another word. He asked his third wife. She said *_"Life is so good over here. I'm going to remarry when you die...

सुबह का अभिवादन* 🙏

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: 🌺 * मेरे गोविंद..* 🌺 *जैसी भी की तुम्हारी भक्ति, बस वो काम आ जाये..* *हे दीनबंधु..* ,, *मेरे अंत समय में,जिह्वा पे बस तुम्हारा नाम आ जाये...* 🌹 *जय श्री राधाकृष्ण* 🌹    🙏*प्राताः वंदन..*🙏 *वैचारिक मतभेद*  *भले ही*  *कितने ही हो जाएं ...* *लेकिन उम्र का लिहाज़*  *और शब्दों की मर्यादा*  *हमेशा ही*  *बनाये रखना जरूरी है ।* सुप्रभात  *जय श्री कृष्णा* 🌹 [: 🌸🌷🌹🪷🪷🌹🌷🌸  *जीवन में,  "_सम्पत्ति_" अच्छी मित्र नहीं होती...*  *किन्तु अच्छे मित्र असली सम्पत्ति होते हैं...!!*          *🌹 जय श्री महाकाल🌹*          🌸🌸 🙏🙏 🌸🌸 [ 🌈🌹🩷  *सुबह का अभिवादन*  🌈 ________________________. 🙏🏼 *क्षमा माँगना और क्षमा करना ये दोनों गुण ही जीवन को महान बनाते हैं।दूसरों को क्षमा करने की आदत डालो,जीवन की बहुत समस्याओं से बच जाओगे।बलवान वो नहीं जो किसी को दण्ड देने की सामर्थ्य रखता हो अपितु बलवान वो है जो किसी को क्षमा करने की सामर्थ्य रखता है।*।    ...

Must Read🙏

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* श्रीकृष्ण द्वारा पांडवों को बताए गए कलियुग के 5 यथार्थ .........* *अधपहला सत्य —* धर्म दिखावा बन जाएगा कलियुग में लोग धर्म को जीएंगे नहीं, बल्कि केवल दिखाएंगे। मंदिरों की भीड़ होगी,पर मन अहंकार से भरा होगा। ग्रंथों का ज्ञान होगा, पर जीवन में उसका आचरण नहीं। जो जितना पथभ्रष्ट होगा,वह स्वयं को उतना ही बड़ा धर्मात्मा बताएगा। *दूसरा सत्य —* धन ही रिश्तों की नींव बनेगा मनुष्य का मूल्य उसके संस्कारों से नहीं, उसकी संपत्ति से आँका जाएगा। भाई,मित्र,यहाँ तक कि अपने भी लाभ देखकर साथ निभाएंगे। जहाँ स्वार्थ समाप्त, वहाँ संबंध भी समाप्त। *तीसरा सत्य —* चतुराई, ज्ञान से ऊपर होगी, कलियुग में बुद्धिमान नहीं, चालाक पूजे जाएंगे। सत्यनिष्ठ व्यक्ति सरल कहलाएगा, और छल करने वाला समझदार। जो सच बोलेगा, वह अकेला पड़ जाएगा, जो झूठ बोलेगा, वही आगे बढ़ेगा। *चौथा सत्य —* प्रेम क्षीण होगा, भोग बढ़ेगा रिश्तों का अर्थ बदल जाएगा। विवाह पवित्र बंधन नहीं,सुविधा का समझौता बन जाएगा। माता-पिता उपकार नहीं, बोझ समझे जाएंगे। जहाँ सुख समाप्त, वहीं अपनापन भी समाप्त। *पाँचवां सत्य —* केवल भगवान का नाम ही सहारा बनेग...

_*सी.आय.डी.*_

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* _*सी.आय.डी.*_ 30 जुलाई 1956 निर्माता- गुरू दत्त निर्देशक- राज खोसला गीत- मजरूह सुल्तानपुरी, जान निसार अख्तर (JNA) संगीत- ओ पी नय्यर कलाकार- देव आनंद, शकीला, वहीदा रहमान, के एन सिंह, जॉनी वाकर, कुमकुम, महमूद, मीनू मुमताज, टुन टुन, बिर सखूजा, शिला वाज, जगदीश राज                                गुरू दत्त ने इस फ़िल्म से हिन्दी सिनेमा को वहीदा रहमान दी.. वहीदा रहमान की ये डेब्यू हिन्दी फिल्म थी.. इससे पहले उन्होंने तेलुगू और तमिल फिल्मों में काम किया था.. गुरु दत्त ने वहीदा रहमान की अदाकारी से प्रभावित हो उन्हें "प्यासा" में मुख्य भूमिका अदा की.. "सी आय डी" की मुख्य भूमिका शकीला ने निभाई थी लेकिन वहीदा रहमान का रोल भी बहोत अहम था.. वहीदा रहमान का नृत्य भी दर्शनीय रहा जिसे ज़ोहरा सैगल ने निर्देशित किया.. एक तेलुगू फिल्म के गीत में नृत्य करती वहीदा रहमान को गुरु दत्त ने देखा और उन्हें वो बहोत पसंद आई.. उन्होंने वहीदा को मुंबई आने के लिए कहा.. मुंबई आने के बाद वहीदा रहमान का स्क्रीन टेस्ट हुआ जिसमें वो क...

क्या आप को पता है?

* शायद ही कुछ गिने चुने हिंदुओं को पता होगा....* *काशी में मणिकर्णिका घाट पर चिता जब शांत हो जाती है तब मुखाग्नि देने वाला व्यक्ति चिता भस्म पर 94 लिखता है।* *यह सभी को नहीं मालूम है।* *खांटी बनारसी लोग या अगल बगल के लोग ही इस परम्परा को जानते हैं। बाहर से आये शवदाहक जन इस बात को नहीं जानते।* *जीवन के शतपथ होते हैं।* *100 शुभ कर्मों को करने वाला व्यक्ति मरने के बाद उसी के आधार पर अगला जीवन शुभ या अशुभ प्राप्त करता है।* *94 कर्म मनुष्य के अधीन हैं। वह इन्हें करने में समर्थ है पर 6 कर्म का परिणाम ब्रह्मा जी के अधीन होता है।* *हानि-लाभ, जीवन-मरण, यश- अपयश ये 6 कर्म विधि के नियंत्रण में होते हैं।* *अतः आज चिता के साथ ही तुम्हारे 94 कर्म भस्म हो गये।* *आगे के 6 कर्म अब तुम्हारे लिए नया जीवन सृजित करेंगे।* *अतः 100 - 6 = 94 लिखा जाता है।* *गीता में भी प्रतिपादित है कि मृत्यु के बाद मन अपने साथ 5 ज्ञानेन्द्रियों को लेकर जाता है।* *यह संख्या 6 होती है। मन और पांच ज्ञान इन्द्रियाँ।* *अगला जन्म किस देश में कहाँ और किन लोगों के बीच होगा यह प्रकृति के अतिरिक्त किसी को ज्ञात नहीं होता है।* *अतः 94 ...

माघ पूर्णिमा का स्नान 🙏

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* माघ पूर्णिमा का स्नान - जल, तप और शुद्धि का महापर्व* माघ मास की पूर्णिमा को किया गया पवित्र स्नान सनातन परंपरा में आत्मशुद्धि और पुण्य का विशेष अवसर माना गया है. गंगा, यमुना, सरस्वती तथा अन्य पावन नदियों में इस दिन स्नान कर श्रद्धालु तप, दान और संयम का संकल्प लेते हैं. आस्था है कि माघ पूर्णिमा पर स्नान से मन, वाणी और कर्म की शुद्धि होती है.  यह वही काल है जब माघ मेला अपने उत्कर्ष पर होता है और साधु-संत, कल्पवासी तथा गृहस्थ एक साथ धर्माचरण करते हैं. शीतल जल में किया गया यह स्नान धैर्य, तप और प्रकृति के साथ तादात्म्य का प्रतीक है. *मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩* 🌸 श्री कृष्ण कहते हैं 🌸 प्रेम हो या मित्रता, हमेशा निःस्वार्थ होकर निभाना… क्योंकि कोई देखे या न देखे, ईश्वर सब देखते हैं। ✨ सच्चे संबंध कर्म से नहीं, भावना से निभाए जाते हैं। 💫 🙏✨ जय श्री कृष्ण ✨🙏

उल्टी यात्रा

फ्री होकर प्यार से पढना आनंद आएगा            उल्टी यात्रा 2025 से 1960 से 1970 के दशक अर्थात बचपन की तरफ़ जो  50 /60 को पार कर गये हैं या करीब हैं उनके लिए यह खास है🙏🏻🙏🏻🙏🏻 मेरा मानना है कि दुनिया में ‌जितना बदलाव हमारी पीढ़ी ने देखा है हमारे बाद की किसी पीढ़ी को "शायद ही " इतने बदलाव देख पाना संभव हो 🤔🤔 हमने बिजली को DC से AC होते हुए देखा है। बड़े बड़े भारी पंखे वह बल्ब देखें हैं। हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जिसने बैलगाड़ी से लेकर सुपर सोनिक जेट देखे हैं। बैरंग ख़त से लेकर लाइव चैटिंग तक देखा है और "वर्चुअल मीटिंग जैसी" असंभव लगने वाली बहुत सी बातों को सम्भव होते हुए देखा है। 🙏🏻 हम वो पीढ़ी हैं   जिन्होंने कई-कई बार मिटटी के घरों में बैठ कर परियों और राजाओं की कहानियां सुनीं हैं। ज़मीन पर बैठकर खाना खाया है। प्लेट में डाल डाल कर चाय पी है। 🙏 हम  वो " लोग " हैं ?*l जिन्होंने बचपन में मोहल्ले के मैदानों में अपने दोस्तों के साथ पम्परागत खेल, गिल्ली-डंडा, छुपा-छिपी, खो-खो, कबड्डी, कंचे जैसे खेल , खेले हैं । 🙏हम आखरी पीढ़ी  के वो लोग हैं ...

एक महिला होना अनमोल है।🙏

* एक औरत की खुशबू!* यह उन सबसे अच्छे आर्टिकल्स में से एक है जो मैंने एक औरत के बारे में पढ़े हैं। कृपया इसे पूरा पढ़ें। यह निश्चित रूप से पढ़ने लायक है। *औरत...* जब भगवान ने औरत को बनाया, तो वह शुक्रवार को देर रात तक काम कर रहे थे।... तभी एक फ़रिश्ते ने पूछा, “इतना समय क्यों लग रहा है?” भगवान ने कहा, “क्या तुमने देखा है कि उसे बनाने के लिए मुझे कितनी शर्तें पूरी करनी हैं?” ● उसे सभी परिस्थितियों में काम करने में सक्षम होना चाहिए। ● उसे एक साथ कई बच्चों की देखभाल करने में सक्षम होना चाहिए। ● उसका आलिंगन सब कुछ ठीक करने में सक्षम होना चाहिए - घुटने की खरोंच से लेकर टूटे दिल तक। ● और उसे यह सब सिर्फ़ दो हाथों से करना है। ● बीमार होने पर भी वह खुद को संभाल लेती है और दिन में 18 घंटे काम कर सकती है। फ़रिश्ता हैरान रह गया, “सिर्फ़ दो हाथ? असंभव!” “और यह सामान्य डिज़ाइन है?” फ़रिश्ता औरत के पास गया और उसे छुआ। “प्रभु, आपने उसे बहुत नरम बनाया है।” भगवान ने कहा, “वह नरम है, लेकिन मैंने उसे बहुत मज़बूत बनाया है। तुम्हें अंदाज़ा नहीं है कि वह कितना सह सकती है और कितनी मुश्किलों का सामना कर सकती ह...

एक औरत की ज़िन्दगी 🥲

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एक औरत की ज़िन्दगी  छोड़ने की सूची बन जाती है — कभी प्रेम  कभी पहचान  कभी सपने,,,  बाप की इज़्ज़त के लिए  दिल का रिश्ता छोड़ती है  पति के नाम पर  अपना घर  भाई के हिस्से में  ज़मीन जाती है  और उसके हिस्से में  ख़ामोशी  बच्चों के लिए  वह नौकरी छोड़ती है  और अगर बाहर कोई उसे छेड़ दे — तो बाहर जाना भी  उसकी गलती ठहरा दी जाती है  हर मोड़ पर  उससे कहा जाता है — ' अच्छी औरत बनो ' और अच्छी औरत वही मानी जाती है  जो हर बार  ख़ुद को छोड़ दे  आख़िर में  कुछ लोगों की दुनिया में  वह तभी पवित्र होती है  जब उसके भीतर की औरत  मर जाए  और वह ज़िन्दा लाश बन कर  सब कुछ सह ले  कड़वा है ये सब  पर औरत की कहानी  अक्सर ऐसे ही  लिखी जाती है